Operation Nanhe Farishte: रेलवे के ‘नन्हे फरिश्ते’! बरहरवा स्टेशन पर RPF की मुस्तैदी से बचे 3 मासूम; घर से भटके किशोरों को मिली नई जिंदगी

खबर के मुख्य बिंदु:

  • बड़ी सफलता: मालदा रेल मंडल के आरपीएफ (RPF) ने ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ के तहत 3 नाबालिग लड़कों को सुरक्षित बचाया।
  • मुस्तैदी: बरहरवा रेलवे स्टेशन पर संदिग्ध हालत में घूमते पाए गए किशोर।
  • उम्र: बचाए गए लड़कों की उम्र करीब 16 से 17 वर्ष के बीच।
  • हैंडओवर: काउंसलिंग के बाद लड़कों को ‘बाल संरक्षण मंथन, बरहरवा’ को सौंपा गया।

मालदा/बरहरवा: रेलवे स्टेशन केवल यात्रियों के आने-जाने का जरिया नहीं, बल्कि कई बार घर से रूठकर या भटककर निकले बच्चों के लिए असुरक्षित ठिकाना भी बन जाते हैं। ऐसे ही बच्चों की सुरक्षा के लिए समर्पित पूर्व रेलवे के मालदा मंडल की आरपीएफ टीम ने आज एक बार फिर अपनी सतर्कता का परिचय दिया है। ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ के तहत बरहरवा स्टेशन से तीन किशोरों को रेस्क्यू कर उन्हें गलत हाथों में पड़ने से बचा लिया गया।

प्लेटफॉर्म पर ‘भटक’ रही थी मासूमियत

​पूरी कार्रवाई मालदा मंडल के रेल प्रबंधक (DRM) श्री मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन और मंडल सुरक्षा आयुक्त (RPF) श्री असीम कुमार कुल्लू की देखरेख में की गई।

  • संदेह की नजर: शनिवार को बरहरवा स्टेशन पर नियमित चेकिंग के दौरान आरपीएफ के जवानों ने देखा कि 16-17 साल के तीन लड़के प्लेटफॉर्म पर बेहद परेशान और बिना किसी उद्देश्य के इधर-उधर घूम रहे हैं।
  • त्वरित कार्रवाई: उनकी संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए आरपीएफ ने उन्हें तुरंत अपनी सुरक्षा में लिया और पूछताछ के लिए आरपीएफ पोस्ट लाया गया।

काउंसलिंग और पुनर्वास: बाल संरक्षण मंथन को सौंपा

​पूछताछ के दौरान पता चला कि ये किशोर बिना किसी ठोस योजना के स्टेशन पहुँच गए थे और डरे हुए थे। आरपीएफ ने पहले उन्हें भोजन और पानी देकर सहज किया। इसके बाद कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए तीनों किशोरों को ‘बाल संरक्षण मंथन, बरहरवा’ के अधिकृत प्रतिनिधियों को सौंप दिया गया। वहां इन बच्चों की उचित देखभाल और काउंसलिंग की जाएगी ताकि उन्हें सुरक्षित उनके घर तक पहुँचाया जा सके।

त्वरित अवलोकन (Quick Facts)

  • अभियान का नाम: ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते (Operation Nanhe Farishte)
  • स्थान: बरहरवा रेलवे स्टेशन (मालदा मंडल)
  • रेस्क्यू किए गए बच्चे: 03 नाबालिग लड़के
  • उम्र वर्ग: 16–17 वर्ष
  • संस्था जहाँ सौंपा गया: बाल संरक्षण मंथन, बरहरवा

VOB का नजरिया: खाकी के पीछे छिपी मानवता

​आरपीएफ की यह कार्रवाई केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है जिनके बच्चे रास्ता भटक जाते हैं। ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ देशभर में हजारों बच्चों को मानव तस्करी और अपराध की दुनिया में जाने से रोक रहा है। मालदा मंडल की आरपीएफ टीम की यह सजगता काबिले तारीफ है। माता-पिता को भी चाहिए कि वे किशोरावस्था में अपने बच्चों के व्यवहार और उनकी परेशानियों पर नजर रखें ताकि वे ऐसा कदम न उठाएं।

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