HIGHLIGHTS: कल्याणपुर स्वास्थ्य केंद्र में निगरानी का ‘ट्रैप’
- रंगे हाथ दबोचा: कल्याणपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के हेड क्लर्क रवि चतुर्वेदी ₹10,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार।
- शर्मनाक: अपने ही विभाग के रिटायर्ड चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी से ‘रिटायरमेंट फंड’ क्लियर करने के नाम पर मांगी थी घूस।
- एक्शन: पीड़ित भरत ठाकुर की शिकायत पर निगरानी ब्यूरो ने बिछाया जाल।
- टीम लीडर: निगरानी डीएसपी विकास श्रीवास्तव के नेतृत्व में हुई सफल छापेमारी।
मोतिहारी | 17 मार्च, 2026
पूर्वी चम्पारण के मोतिहारी में आज भ्रष्टाचार के खिलाफ एक और बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक हुई है। जिस स्वास्थ्य केंद्र का काम लोगों को जीवनदान देना है, वहां के एक बाबू ने एक बुजुर्ग कर्मचारी के जीवनभर की कमाई (रिटायरमेंट के पैसे) पर ‘कमीशन’ की नजर गड़ा दी थी। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी क्लर्क को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।
बुजुर्ग कर्मचारी का ‘हक’ और क्लर्क की ‘घूस’
मामला कल्याणपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा है, जहाँ भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी नजर आ रही हैं:
- पीड़ित: भरत ठाकुर, जो हाल ही में चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी के पद से रिटायर हुए थे।
- मांग: हेड क्लर्क रवि कुमार चतुर्वेदी उनके रिटायरमेंट के बकाये पैसे दिलवाने के एवज में लगातार रिश्वत का दबाव बना रहा था।
- शिकायत: परेशान होकर भरत ठाकुर ने स्वाभिमान से समझौता करने के बजाय पटना स्थित निगरानी विभाग में मुकदमा दर्ज करा दिया।
घात लगाकर बैठी थी टीम और फिर…
निगरानी के डीएसपी विकास श्रीवास्तव ने बताया कि शिकायत के सत्यापन के बाद आज यानी मंगलवार को टीम ने जाल बिछाया।
- रंगे हाथ गिरफ्तारी: जैसे ही हेड क्लर्क रवि चतुर्वेदी ने भरत ठाकुर से ₹10,000 की रकम हाथ में ली, पहले से घात लगाकर बैठी निगरानी टीम ने उसे दबोच लिया।
- हड़कंप: अस्पताल परिसर में अचानक हुई इस कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच अफरातफरी का माहौल कायम हो गया।
- अगली कार्रवाई: गिरफ्तार क्लर्क को लेकर टीम मुजफ्फरपुर/पटना के लिए रवाना हो गई है, जहाँ उन्हें निगरानी की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।
VOB का नजरिया: जब अपनों की जेब काटने लगे ‘सरकारी बाबू’
मोतिहारी की यह घटना व्यवस्था पर एक बड़ा तमाचा है। एक व्यक्ति जिसने पूरी उम्र विभाग की सेवा की, उसे अपने ही हक के पैसे के लिए गिड़गिड़ाना पड़ा और रिश्वत देनी पड़ी। रवि चतुर्वेदी जैसे ‘बाबू’ सिस्टम के वो दीमक हैं जो ईमानदारी को खोखला कर रहे हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ भरत ठाकुर के साहस को सलाम करता है जिन्होंने चुप्पी तोड़ने का फैसला किया। क्या अब स्वास्थ्य विभाग इस हेड क्लर्क के कार्यकाल में हुई अन्य फाइलों की भी जांच कराएगा?


