
खबर के मुख्य बिंदु:
- खास मौका: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में फिल्म “हक़” का विशेष प्रदर्शन।
- बड़ा संदेश: महिलाओं के सम्मान के लिए पुरुषों पर निर्भरता नहीं, आपसी सहयोग है जरूरी।
- भावुक पल: दो बेटियों के पिता और संग्रहालय निदेशक कृष्ण कुमार ने समाज की जिम्मेदारी पर दिया जोर।
- फिल्मी तड़का: शूर्ण वर्मा निर्देशित फिल्म ने दर्शकों को अधिकारों के प्रति किया जागरूक।
पटना: राजधानी के ऐतिहासिक रीजेंट सिनेमा (गांधी मैदान) में शनिवार की सुबह एक अलग ही उत्साह देखने को मिला। मौका था अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित फिल्म “हक़” के विशेष प्रदर्शन का। बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम (कला एवं संस्कृति विभाग) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने पटना के कला प्रेमियों और महिलाओं को अपने अधिकारों और आत्मसम्मान के प्रति एक नई सोच दी।
महिला सशक्तिकरण का नया मंत्र: “एक-दूसरे का हाथ थामें महिलाएं”
कार्यक्रम का उद्घाटन पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया। इस अवसर पर बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम की महाप्रबंधक श्रीमती रूबी (IAS) ने एक बहुत ही गहरी और प्रेरणादायक बात कही।
उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं को अपने सम्मान और अधिकारों के लिए केवल पुरुषों की ओर देखने की जरूरत नहीं है।
“असली सशक्तिकरण तब होगा जब महिलाएं खुद एक-दूसरे का सम्मान करेंगी और एक-दूसरे को आगे बढ़ने के अवसर देंगी। आपसी सहयोग ही नारी शक्ति की सबसे बड़ी पहचान है।” — श्रीमती रूबी, महाप्रबंधक
संग्रहालय निदेशक का संदेश: “पुरुषों की भी है बराबर जिम्मेदारी”
संग्रहालय निदेशालय के निदेशक श्री कृष्ण कुमार (IAS) ने कार्यक्रम में एक अभिभावक के तौर पर अपनी बात रखी। उन्होंने अपनी दो बेटियों का जिक्र करते हुए कहा कि बेटियों के लिए एक सुरक्षित और आत्मविश्वास से भरा वातावरण बनाना पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल महिलाओं का विषय नहीं है, बल्कि पुरुषों को भी इसमें सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
फिल्म ‘हक़’: संघर्ष और न्याय की दास्तान
रीजेंट सिनेमा के बड़े पर्दे पर जब निर्देशक शूर्ण वर्मा की फिल्म “हक़” शुरू हुई, तो पूरा हॉल खामोश हो गया।
- निर्माता: विनीत जैन, विशाल गुरनानी, जूही पारेख मेहता, हरमन बावेजा और विक्की जैन।
- विषय: यह फिल्म उन सामाजिक बेड़ियों और परिस्थितियों की कहानी है, जिनसे लड़कर एक महिला अपने न्याय और हक को हासिल करती है।
- प्रतिक्रिया: फिल्म खत्म होने के बाद दर्शकों ने इसकी जमकर सराहना की और इसे आज के समय की एक बेहद जरूरी फिल्म बताया।
रंजन दास का ‘रोचक’ अंदाज़
पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन श्री अरविंद रंजन दास ने किया। उन्होंने अपने खास और दिलचस्प अंदाज से दर्शकों को बांधे रखा और कार्यक्रम में मनोरंजन का तड़का लगाया। इस अवसर पर सहायक निदेशक डॉ. अजय सिंह सहित विभाग के कई आला अधिकारी और बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
VOB का नजरिया: सिनेमा के जरिए बदलाव की लहर
बिहार सरकार का फिल्म निगम जिस तरह से सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन कर रहा है, वह काबिले तारीफ है। “हक़” जैसी फिल्में न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि समाज के उस हिस्से को झकझोरती हैं जहाँ महिलाओं को आज भी अपने हक के लिए संघर्ष करना पड़ता है। पटना की सड़कों से रीजेंट सिनेमा के पर्दे तक, आज सिर्फ एक ही गूँज थी— “हमारा हक, हमारा सम्मान।”


