सफाली संस्थान में इंटर्नशिप के दूसरे दिन छात्राओं ने सीखा बीएमआई निकालने का तरीका, रक्तदान के महत्व पर भी दी गई जानकारी

भागलपुर, 13 मार्च। भागलपुर के एसएम कॉलेज के जूलॉजी विभाग की यूजी सेमेस्टर-5 की छात्राओं के लिए चल रही इंटर्नशिप के दूसरे दिन शुक्रवार को सफाली संस्थान में स्वास्थ्य और शरीर विज्ञान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। इस दौरान छात्राओं को बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) निकालने की प्रक्रिया सिखाई गई तथा ब्लड ग्रुप की पहचान और रक्तदान के महत्व के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।

सफाली संस्थान के अध्यक्ष, न्यूट्रीशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (भागलपुर चैप्टर) के संयोजक और जेपी विश्वविद्यालय छपरा के पूर्व कुलपति प्रो. फारूक अली ने छात्राओं को बीएमआई की अवधारणा और उसके उपयोग के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि बीएमआई किसी व्यक्ति के वजन और ऊंचाई के आधार पर यह निर्धारित करने का एक वैज्ञानिक तरीका है कि व्यक्ति का वजन सामान्य, कम या अधिक है।

स्वास्थ्य मूल्यांकन में बीएमआई का महत्व

प्रो. फारूक अली ने कहा कि बीएमआई शरीर के ऊतकों के द्रव्यमान का एक महत्वपूर्ण संकेतक है और इसका उपयोग यह जानने के लिए किया जाता है कि किसी व्यक्ति का वजन उसकी ऊंचाई के अनुसार स्वस्थ है या नहीं। उन्होंने छात्राओं को बताया कि स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं का आकलन करने में बीएमआई की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

इंटर्नशिप के दौरान छात्राओं ने व्यावहारिक रूप से वजन और ऊंचाई मापकर बीएमआई निकालने का अभ्यास भी किया। इसके अलावा कुछ छात्राओं ने ब्लड ग्रुप की जांच की प्रक्रिया को भी दोबारा समझा और उसका अभ्यास किया।

रक्तदान के महत्व से भी कराया अवगत

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को रक्तदान के महत्व के बारे में भी जागरूक किया गया। प्रो. फारूक अली ने कहा कि रक्तदान एक महान सामाजिक कार्य है, जिससे जरूरतमंद मरीजों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने युवाओं से नियमित रूप से रक्तदान के प्रति जागरूक रहने की अपील की।

50 छात्राएँ ले रही हैं इंटर्नशिप में भाग

इस इंटर्नशिप कार्यक्रम में जूलॉजी विभाग की लगभग 50 छात्राएँ भाग ले रही हैं। कार्यक्रम के दौरान तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. दीपक कुमार दिनकर भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन गुलफ्शा परवीन ने किया। वहीं प्रतिभागी छात्राओं कोमल कुमारी और कृति कुमारी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कक्षा के बाहर इस तरह की व्यावहारिक शिक्षा से नई चीजें सीखने का अवसर मिलता है।

छात्राओं ने कहा कि सफाली संस्थान द्वारा आयोजित यह इंटर्नशिप उन्हें स्वास्थ्य और शरीर विज्ञान से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सैद्धांतिक और प्रायोगिक दोनों रूपों में सीखने का अवसर दे रही है, जो उनके भविष्य के अध्ययन और करियर के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी।

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