छत्रपति शिवाजी महाराज की 395वीं जयंती मनी, वक्ताओं ने कहा छत्रपति शिवाजी महाराज का शौर्यगाथा इतिहास के पन्नों पर स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।

फ्रेंड्स ऑफ़ तिलकामांझी सामाजिक मित्र मंडली भागलपुर द्वारा तिलकामांझी स्थित प्रधान कार्यालय में छत्रपति शिवाजी महाराज की 395वीं जयंती मनाई गई। इसकी अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष इंदुभूषण झा ने की। जयंती समारोह का शुभारंभ वीर छत्रपति शिवाजी महाराज के चित्र के सामने दीप प्रज्वलित कर प्रधान संरक्षक जगतराम साह कर्णपुरी ने किया। उपस्थित मंच के पदाधिकारी एवं सदस्यों ने माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर वीर छत्रपति शिवाजी महाराज को नमन किया। तदुपरांत अपने उद्बोधन में जगतराम साह कर्णपुरी ने कहा कि भारत भूमि पर छत्रपति शिवाजी महाराज एक लोकप्रिय शासक के रूप में सम्मानित है। उनकी वीरता और शौर्यगाथा स्वाभिमान से भरा पड़ा है। भारत भूमि के लोग छत्रपति शिवाजी महाराज को भूल नहीं सकते।

सचिव रजनीश कुमार सिंह ने जयंती समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का शौर्य कथा इतिहास के पन्नों पर अक्षरों में अंकित है। शिवाजी महाराज मराठा साम्राज्य के विस्तार और संरक्षण के लिए दृढ़ संकल्पित थे।

जयंती समारोह की अध्यक्षता करते हुए इंदुभूषण झा ने कहा कि शिवाजी महाराज हिंदू हृदय सम्राट के रूप में जाने जाते हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज जन जन में स्वाभिमान के प्रतीक है। उनकी वीरता को स्मरण कर लोग आज भी कहते हैं कि शिवाजी जैसा वीर बनो।

इसके अलावा जयंती समारोह को राज कुमार झा, राणा पोद्दार, पवन यादव, सुमन भारती समेतअन्य सदस्यों ने भी संबोधित किया।मंच संचालन अमीत प्रताप सिंह ने किया।

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