17 मार्च को ‘सुशासन बाबू’ की भागलपुर में दस्तक! रातों-रात चमकने लगा शहर; मंजूषा कला से सज रही दीवारें, सड़कों पर बिछी नई परत

HIGHLIGHTS:

  • VIP मूवमेंट: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का 17 मार्च को संभावित भागलपुर दौरा; प्रशासनिक अमले में मची खलबली।
  • शहर का मेकओवर: स्टेशन से एयरपोर्ट तक युद्ध स्तर पर सफाई; लोहिया पुल की रेलिंग से लेकर समाहरणालय तक का हो रहा रंग-रोगन।
  • सांस्कृतिक टच: समाहरणालय की दीवारों पर उकेरी जा रही अंग जनपद की प्रसिद्ध ‘मंजूषा चित्रकला’।
  • रफ्तार: समीक्षा भवन और ग्लोकल हॉस्पिटल रोड को किया गया चकाचक; अधिकारियों की छुट्टियां रद्द!

नीतीश के आने की आहट और ‘सिस्टम’ की जगमगाहट: भागलपुर में ‘मिशन 17 मार्च’!

भागलपुर: कहते हैं कि जब सूबे के मुखिया के कदम किसी शहर में पड़ने वाले हों, तो वहां की किस्मत रातों-रात बदल जाती है। भागलपुर में भी कुछ ऐसा ही नजारा है। शुक्रवार दोपहर पटना से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 17 मार्च को संभावित आगमन की ‘मौखिक’ सूचना क्या मिली, सोए हुए विभाग अचानक ‘सुपरफास्ट’ मोड में आ गए। आनन-फानन में फाइलों की धूल झाड़ी गई और शहर की सूरत बदलने का काम शुरू हो गया।

मंजूषा कला से सजी दीवारें: अंग क्षेत्र की पहचान को मिली जगह

​इस बार मुख्यमंत्री के स्वागत में भागलपुर अपनी सांस्कृतिक विरासत को भी पेश कर रहा है। समाहरणालय की दीवारों पर मंजूषा पेंटिंग बनाई जा रही है। इसका मकसद केवल मुख्यमंत्री को लुभाना नहीं, बल्कि यह संदेश देना भी है कि रेशमी नगरी अपनी कला और संस्कृति को लेकर सजग है। समीक्षा भवन के पास टूटी दीवारों को दुरुस्त कर चमकाया जा रहा है।

सड़कों का ‘कायाकल्प’: धूल फांकने वाले रास्तों पर नई चमक

​हवाईअड्डा मैदान से लेकर बैजानी हाईस्कूल तक की सड़कें, जो कल तक गड्ढों और धूल से भरी थीं, अब वहां डामर की नई परत दिखाई दे रही है। मौखिक आदेश मिलते ही पीडब्ल्यूडी (PWD) और नगर निगम की टीमें 24×7 काम में जुट गई हैं ताकि मुख्यमंत्री के काफिले को कोई झटका न लगे।

VOB का नजरिया: क्या ‘दौरे’ के बिना विकास मुमकिन नहीं?

भागलपुर की सड़कों का रातों-रात चकाचक होना सुखद है, लेकिन एक बड़ा सवाल खड़ा करता है— क्या शहर को साफ और सुंदर रखने के लिए हमेशा मुख्यमंत्री की यात्रा का ही इंतजार करना होगा? जो काम महीनों से लंबित थे, वे 48 घंटों में कैसे पूरे हो रहे हैं? जनता चाहती है कि मंजूषा की यह सुंदरता और सड़कों की यह चमक ‘वीआईपी’ के जाने के बाद भी बरकरार रहे, न कि अगली यात्रा तक फिर से धूल और गड्ढों में तब्दील हो जाए।

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