समाचार के मुख्य बिंदु: समावेशी शिक्षा की ओर बिहार का क्रांतिकारी कदम
- बड़ी पहल: ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009’ के तहत अब राज्य के निजी स्कूलों में दिव्यांग बच्चों का नामांकन अनिवार्य होगा।
- उच्च स्तरीय मंथन: पटना में शिक्षा विभाग के ACS डॉ. बी. राजेंद्र और समाज कल्याण सचिव बंदना प्रेयषी के बीच हुई महत्वपूर्ण बैठक।
- कमेटी का गठन: प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर की अध्यक्षता में विशेष समिति गठित; नामांकन सुनिश्चित करने के लिए देगी सुझाव।
- SOP की तैयारी: दिव्यांग बच्चों के सुगम पठन-पाठन के लिए जल्द तैयार होगी ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (SOP)।
- स्कूलों के साथ बैठक: निजी विद्यालय संघ के प्रतिनिधियों के साथ जल्द होगी वार्ता; इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं पर होगा काम।
- VOB इनसाइट: यह फैसला न केवल दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ेगा, बल्कि निजी स्कूलों को भी सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के प्रति जवाबदेह बनाएगा।
पटना | 25 मार्च, 2026
बिहार की शिक्षा व्यवस्था में आज एक ऐसा अध्याय जुड़ा है, जो वर्षों से हाशिए पर रहे दिव्यांग बच्चों के भविष्य को सुनहरी चमक देगा। अब ‘पैसे’ या ‘सुविधा’ की कमी किसी विशेष आवश्यकता वाले बच्चे की शिक्षा में बाधा नहीं बनेगी। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने ‘निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009’ के प्रावधानों को अब निजी स्कूलों में दिव्यांग बच्चों के नामांकन के लिए सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है।
शिक्षा और समाज कल्याण का ‘महा-गठबंधन’: डॉ. बी. राजेंद्र और बंदना प्रेयषी का विजन
बुधवार को विकास भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में दो विभागों के दिग्गजों ने दिव्यांग बच्चों के भविष्य पर गहन मंथन किया।
बैठक के प्रमुख फैसले और निर्देश:
- विशेष समिति: अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंद्र ने प्राथमिक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने का निर्देश दिया है। यह कमेटी राज्य के निजी स्कूलों में दिव्यांग बच्चों के नामांकन में आने वाली तकनीकी और व्यावहारिक बाधाओं को दूर करने के उपाय सुझाएगी।
- SOP और नियम: निजी स्कूलों के लिए एक ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (SOP) तैयार की जाएगी, जिसमें यह स्पष्ट होगा कि स्कूल परिसर को दिव्यांग-अनुकूल (Accessibility) कैसे बनाया जाए और शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण कैसे दिया जाए।
- एजेंसी संवाद: शिक्षा विभाग जल्द ही निजी विद्यालय संघ के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेगा ताकि जमीनी स्तर पर समन्वय स्थापित किया जा सके।
समाज कल्याण विभाग की भूमिका: चुनौतियों पर सीधा प्रहार
बैठक के दौरान समाज कल्याण विभाग की सचिव बंदना प्रेयषी ने उन चुनौतियों का जिक्र किया जो दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा के स्कूलों तक पहुँचने से रोकती हैं।
- सचिव का सुझाव: उन्होंने RTE 2009 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि केवल नामांकन काफी नहीं है, बल्कि बच्चों को ऐसा वातावरण देना होगा जहाँ वे बिना किसी भेदभाव के पढ़ सकें।
- पूर्ण सहयोग का वादा: बंदना प्रेयषी ने स्पष्ट किया कि दिव्यांगजन सशक्तिकरण निदेशालय इस कार्य में शिक्षा विभाग को हर संभव संसाधन और विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा।
बैठक में मौजूद प्रमुख पदाधिकारी
समावेशी शिक्षा के इस खाके को तैयार करने में राज्य के कई वरीय अधिकारियों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई:
- डॉ. बी. राजेंद्र: अपर मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग।
- बंदना प्रेयषी: सचिव, समाज कल्याण विभाग।
- योगेश कुमार सागर: निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तिकरण निदेशालय।
- विक्रम विरकर: निदेशक, प्राथमिक शिक्षा।
VOB का नजरिया: क्या निजी स्कूल ‘बैरियर-फ्री’ बनने को तैयार हैं?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि कागजों पर लिया गया यह निर्णय तब तक सफल नहीं होगा जब तक निजी स्कूलों का नजरिया नहीं बदलेगा।
- बुनियादी ढांचा: अधिकांश निजी स्कूलों में आज भी रैंप, विशेष शौचालय और ब्रेल लिपि या साइन लैंग्वेज जानने वाले शिक्षक नहीं हैं। सरकार को इन सुविधाओं के लिए फंड या रियायत पर भी विचार करना होगा।
- सामाजिक स्वीकृति: सामान्य बच्चों के साथ दिव्यांग बच्चों का पढ़ना ‘सेंसिटाइजेशन’ (संवेदनशीलता) को बढ़ावा देगा, जो एक स्वस्थ समाज के लिए जरूरी है।
- कठोर अनुपालन: RTE के तहत 25% सीटों पर गरीब बच्चों के नामांकन में अक्सर गड़बड़ी की खबरें आती हैं। दिव्यांग बच्चों के मामले में ऐसी लापरवाही न हो, इसके लिए विभाग को ‘कठोर निगरानी’ रखनी होगी।
सुशासन और संवेदना का संगम
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘न्याय के साथ विकास’ के नारे को चरितार्थ करते हुए यह फैसला बिहार के हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आया है। अब देखना यह है कि डॉ. बी. राजेंद्र की कमेटी कितनी जल्दी अपनी रिपोर्ट सौंपती है और निजी स्कूलों के गेट इन बच्चों के लिए कब खुलते हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस नीति के क्रियान्वयन और स्कूलों में होने वाले पहले नामांकन की गौरवमयी खबर आप तक सबसे पहले पहुँचाता रहेगा।


