
HIGHLIGHTS:
- बड़ा बदलाव: 1962 कॉल सेंटर अब 24 घंटे सातों दिन (24×7) रहेगा एक्टिव।
- डॉक्टर ऑन कॉल: सुबह शिकायतों का निपटारा, दोपहर में गांव-गांव लगेंगे कैंप।
- डिजिटल नजर: डैशबोर्ड से होगी रियल-टाइम मॉनिटरिंग और व्हाट्सएप पर मिलेगा पर्चा।
पशुपालकों के लिए ‘वरदान’: अब आधी रात को भी मिलेगा इलाज
भागलपुर: जिले के पशुपालकों के लिए आज का दिन एक बड़ी सौगात लेकर आया है। समाहरणालय, भागलपुर ने मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई (MVU) के संचालन नियमों में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। अब अगर आपका पशु बीमार है, तो आपको उसे लेकर शहर भागने की जरूरत नहीं है। बस 1962 डायल कीजिए और डॉक्टर सीधे आपके द्वार पर होंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि यह कॉल सेंटर अब किसी भी समय—दिन हो या रात—आपकी सेवा के लिए तैयार रहेगा।
ड्यूटी का नया ‘टाइम-टेबल’: कैसे काम करेगी एम्बुलेंस?
नई व्यवस्था के तहत MVU के डॉक्टर और कर्मी सुबह 8:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक फील्ड में रहेंगे। उनके काम को दो हिस्सों में बांटा गया है:
- स्लॉट 1 (08:30 AM – 01:30 PM): इस दौरान कॉल सेंटर (1962) से मिलने वाली शिकायतों और इमरजेंसी केस के लिए एम्बुलेंस सीधे किसान के घर पहुंचेगी।
- स्लॉट 2 (01:30 PM – 04:30 PM): इस समय में MVU की टीम निर्धारित गांवों में जाकर पशु चिकित्सा शिविर (Camps) लगाएगी, ताकि सामूहिक रूप से जांच और टीकाकरण हो सके।
बजट और पारदर्शिता: भ्रष्टाचार पर लगाम
दवाइयों और ईंधन के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार ने खर्च की सीमा तय कर दी है:
मद (Category) | अधिकतम सीमा (प्रति माह) |
|---|---|
दवाइयों की खरीद | ₹35,000 |
ईंधन एवं मरम्मत | ₹33,000 |
नोट: जिला स्तरीय समिति द्वारा नियमित रूप से दवा स्टॉक और वितरण की जांच की जाएगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
हाई-टेक होगी सेवा: मोबाइल पर मिलेगा ‘व्हाट्सएप’ पर्चा
सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए अब टेलीमेडिसिन का सहारा लिया जाएगा। डॉक्टर मरीज (पशु) को देखने के बाद मोबाइल पर ही डिजिटल दवा पर्ची उपलब्ध कराएंगे। इसके साथ ही:
- रियल-टाइम मॉनिटरिंग: एक डैशबोर्ड बनाया गया है जिससे यह पता चलेगा कि कौन सी MVU एम्बुलेंस इस वक्त कहाँ है और कितने मरीजों का इलाज हुआ।
- व्हाट्सएप ग्रुप: जिले के वरीय अधिकारियों और डॉक्टरों का एक ग्रुप होगा ताकि किसी भी बड़ी समस्या का तुरंत समाधान हो सके।
VOB का नजरिया: कागजों से निकलकर क्या खूंटे तक पहुंचेगी सेवा?
सरकार की यह पहल कागजों पर तो ‘सुपरहिट’ लग रही है। 1962 को 24 घंटे चालू रखना और गांव-गांव कैंप लगाना पशुपालकों की बड़ी समस्याओं का समाधान है। लेकिन असली चुनौती होगी— नेटवर्क और रिस्पांस टाइम। भागलपुर के सुदूर टाल क्षेत्रों या दियारा इलाकों में क्या एम्बुलेंस समय पर पहुँच पाएगी? अगर मॉनिटरिंग और व्हाट्सएप ग्रुप का इस्तेमाल गंभीरता से हुआ, तो यकीन मानिए बिहार का पशुपालन क्षेत्र देश के लिए मिसाल बन सकता है।


