शिक्षकों की शिकायतों के लिए अब ई-पोर्टल ही माध्यम, सचिवालय परिक्रमा से बचें : डॉ. सिद्धार्थ

पटना, 25 जून।स्थानांतरण संबंधी शिकायतों को लेकर लगातार सचिवालय का चक्कर काट रहे शिक्षकों को अब शिक्षा विभाग ने सख्त हिदायत दी है। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि शिक्षकों को अपनी शिकायतें सीधे सचिवालय लाकर विभागीय कार्य में बाधा नहीं पहुंचानी चाहिए।

डॉ. सिद्धार्थ ने कहा कि विभाग का स्थापना बल लगभग दस लाख है। यदि इसका एक छोटा हिस्सा भी मुख्यालय पहुंचता है, तो इससे कार्यालय संचालन में व्यापक असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि कई शिक्षक सचिवालय आकर विभागीय पदाधिकारियों से संपर्क की कोशिश करते हैं, जिससे विभागीय कामकाज प्रभावित होता है।

स्थानीय स्तर पर होगा समाधान
पत्र में कहा गया है कि शिक्षकों की स्थापना संबंधी समस्याओं का समाधान जिलों में ही जिला स्थापना समिति करती है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित यह समिति प्रत्येक मामले की केस टू केस समीक्षा कर कार्रवाई करती है। केवल अत्यंत विशेष मामलों में ही अंतर-जिला मुद्दों को राज्य स्तर पर विचार में लाया जाता है।

ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर दर्ज करें शिकायतें
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि शिक्षकों की शिकायतों के निपटारे के लिए शिक्षा विभाग ने पहले से ही एक सुव्यवस्थित ऑनलाइन व्यवस्था विकसित की है। ‘ई-शिक्षा कोष पोर्टल’ पर प्रत्येक शिक्षक अपनी लॉगिन आईडी से शिकायत दर्ज कर सकता है। इस पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की निगरानी जिला शिक्षा पदाधिकारी से लेकर निदेशक स्तर तक होती है।

उन्होंने निर्देश दिया है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी पोर्टल पर शिकायतों का समाधान कर अनुपालन रिपोर्ट भी वहीं अपलोड करें ताकि राज्य स्तर पर जन शिकायत कोषांग द्वारा समय-समय पर समीक्षा की जा सके।

डिजिटल माध्यम से होगा त्वरित समाधान
डॉ. सिद्धार्थ ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन माध्यम से शिकायत दर्ज करने की यह प्रणाली न केवल पारदर्शिता लाएगी बल्कि शिक्षकों और विभाग दोनों के समय और संसाधनों की भी बचत करेगी। इसके साथ ही विभागीय कार्यों की गति भी बनी रहेगी।

शिक्षा विभाग ने यह संदेश साफ कर दिया है कि अब सचिवालय का चक्कर लगाने की बजाय शिक्षक अपनी शिकायतों का समाधान डिजिटल माध्यम से प्राप्त करें। विभागीय कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित रखने और शिक्षकों की समस्याओं के संरचित समाधान के लिए यह अनिवार्य दिशा-निर्देश जारी किया गया है।

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