
नोएडा में 13 अप्रैल को भड़की हिंसा अब केवल एक अचानक हुआ श्रमिक विरोध नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश के रूप में सामने आ रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक ऐसा शख्स है, जिसकी कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं लगती। यह शख्स है —जो कभी एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था, लेकिन अब नोएडा हिंसा का कथित मास्टरमाइंड माना जा रहा है।
पुलिस और एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि आदित्य आनंद ने अपनी सुरक्षित आईटी नौकरी छोड़कर मजदूरों के बीच एक संगठित नेटवर्क तैयार किया और धीरे-धीरे एक बड़े आंदोलन की जमीन तैयार की। उसकी गिरफ्तारी तमिलनाडु से हुई है, जहां वह लगातार लोकेशन बदलते हुए पुलिस से बचने की कोशिश कर रहा था।
इंजीनियर से ‘एक्टिविस्ट’ बनने तक का सफर
आदित्य आनंद मूल रूप से बिहार के हाजीपुर का रहने वाला है। उसने से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और पढ़ाई के दौरान वह एक मेधावी छात्र माना जाता था। इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उसने नोएडा की एक मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम शुरू किया। बाद में वह गुरुग्राम में भी आईटी सेक्टर से जुड़ा रहा।
लेकिन धीरे-धीरे उसका झुकाव सामाजिक और वैचारिक गतिविधियों की ओर बढ़ता गया। उसने अपनी हाई-प्रोफाइल नौकरी छोड़ दी और मजदूरों के बीच काम करना शुरू कर दिया। यहीं से उसके जीवन ने एक अलग मोड़ ले लिया, जिसने उसे जांच एजेंसियों की नजर में ला खड़ा किया।
रिपोर्टर का भेष और ‘नेटवर्क’ की नींव
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आदित्य आनंद ने एक रणनीति के तहत खुद को “रिपोर्टर” के रूप में प्रस्तुत करना शुरू किया। वह एक ऐसे संगठन से जुड़ा, जो मैगजीन और यूट्यूब चैनल चलाता था। इसी प्लेटफॉर्म के जरिए उसने मजदूरों के बीच अपनी पहचान बनाई और उनका विश्वास जीतने की कोशिश की।
वह मजदूरों के मुद्दों को कवर करने के बहाने फैक्ट्रियों और औद्योगिक इलाकों में जाता, बैठकों में शामिल होता और धीरे-धीरे एक नेटवर्क तैयार करता। बताया जा रहा है कि वह “मजदूर बिगुल” जैसे प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से सक्रिय था और मजदूरों को संगठित करने के लिए लगातार काम कर रहा था।
फ्लैट बना ‘साजिश का अड्डा’
एसटीएफ की जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि नोएडा के सेक्टर-37 स्थित अरुण विहार में आदित्य के किराए के फ्लैट पर कई महत्वपूर्ण बैठकें हुई थीं। 30 मार्च से 1 अप्रैल के बीच हुई इन बैठकों में विभिन्न संगठनों के सदस्य शामिल हुए थे।
इनमें ‘मजदूर बिगुल’, ‘दिशा स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन’, ‘नौजवान भारत सभा’ और ‘एकता संघर्ष समिति’ जैसे नाम सामने आए हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि इन बैठकों में आंदोलन की रणनीति तैयार की गई और इसे उग्र रूप देने की योजना बनाई गई।
बताया जा रहा है कि 9 से 10 अप्रैल के बीच आदित्य नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में काफी सक्रिय हो गया था और मजदूरों को आंदोलन के लिए प्रेरित कर रहा था। हिंसा वाले दिन भी वह भीड़ के बीच मौजूद था और भाषण देता हुआ देखा गया। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जो अब जांच का अहम हिस्सा बन चुका है।
सोशल मीडिया से ‘माहौल’ बनाने का आरोप
जांच एजेंसियों का यह भी कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम को सोशल मीडिया के जरिए उग्र बनाने की कोशिश की गई। अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर संदेश फैलाकर लोगों को जुटाने और माहौल को भड़काने की रणनीति अपनाई गई।
यह भी जांच का विषय है कि इस नेटवर्क को फंडिंग कहां से मिल रही थी और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी। एसटीएफ अब आदित्य आनंद से पूछताछ कर इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने की कोशिश कर रही है।
फरारी और तमिलनाडु से गिरफ्तारी
नोएडा हिंसा के बाद आदित्य आनंद फरार हो गया था। पुलिस से बचने के लिए उसने लगातार अपनी लोकेशन बदलनी शुरू कर दी। वह नोएडा से दिल्ली पहुंचा और फिर रेलवे नेटवर्क के जरिए दक्षिण भारत की ओर निकल गया।
नोएडा एसटीएफ यूनिट के अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्र के नेतृत्व में टीम ने उसकी तलाश शुरू की। मेट्रो स्टेशनों और रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और आखिरकार उसे तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने उस पर 1 लाख रुपये का इनाम भी घोषित कर रखा था, जिससे उसकी गिरफ्तारी को बड़ी सफलता माना जा रहा है।
आगे क्या?
फिलहाल एसटीएफ आदित्य आनंद से गहन पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस पूरे घटनाक्रम में और कौन-कौन लोग शामिल थे और इसकी योजना कितनी बड़ी थी।
संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। यदि जांच में और नाम सामने आते हैं, तो यह मामला और व्यापक रूप ले सकता है।
नोएडा हिंसा का यह मामला केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि एक जटिल नेटवर्क और रणनीति की ओर इशारा करता है। एक पढ़ा-लिखा इंजीनियर किस तरह से एक संगठित आंदोलन और फिर हिंसा के आरोपों में घिर जाता है, यह कहानी कई सवाल खड़े करती है।
अब सबकी नजर जांच एजेंसियों पर टिकी है, जो इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने की कोशिश कर रही हैं। आने वाले समय में यह साफ हो पाएगा कि यह केवल एक व्यक्ति की योजना थी या इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।


