HIGHLIGHTS: अन्नदाता के हक पर डाका डालने वालों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’; पटना से सीमांचल तक छापेमारी तेज
- बड़ी कार्रवाई: वर्ष 2025-26 में अब तक 115 प्रतिष्ठानों पर केस दर्ज और 449 दुकानदारों के लाइसेंस रद्द।
- मंत्री का दावा: बिहार के किसी भी जिले में उर्वरक (Fertilizer) की कोई कमी नहीं; यूरिया और DAP का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध।
- उड़नदस्ता तैयार: मुख्यालय स्तर पर फ्लाइंग स्क्वाड गठित; पॉस (POS) मशीन और गोदाम के स्टॉक में अंतर मिला तो सीधे जेल।
- तस्करी पर लगाम: नेपाल और अन्य अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर SSB (सशस्त्र सीमा बल) के साथ मिलकर पुलिस करेगी सघन चेकिंग।
पटना | 21 मार्च, 2026
बिहार के खेतों में पसीना बहाने वाले किसानों के लिए एक राहत भरी खबर है। राज्य के नए कृषि मंत्री श्री राम कृपाल यादव ने ‘खाद माफिया’ के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया है। शुक्रवार को पटना में हाई-लेवल मीटिंग के बाद मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार अब केवल चेतावनी नहीं देगी, बल्कि सीधे लाइसेंस रद्द करेगी और जेल भेजेगी। अक्सर सीजन के समय खाद की ‘कृत्रिम किल्लत’ पैदा कर महंगे दामों पर बेचने वाले बिचौलियों के लिए यह खबर किसी ‘करंट’ से कम नहीं है।
आंकड़ों में बिहार का ‘खाद भंडार’ (20 मार्च 2026 तक)
किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि गोदामों में खाद का पर्याप्त कोटा मौजूद है:
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उर्वरक का प्रकार |
उपलब्ध स्टॉक (मीट्रिक टन) |
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यूरिया (Urea) |
2.45 लाख |
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डीएपी (DAP) |
1.46 लाख |
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एनपीके (NPK) |
2.05 लाख |
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एसएसपी (SSP) |
1.03 लाख |
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एमओपी (MOP) |
0.41 लाख |
डिजिटल पहरा: पॉस मशीन से नहीं चलेगी ‘चालाकी’
मंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि हर दुकान की पॉस (POS) मशीन में दर्ज स्टॉक और फिजिकल स्टॉक का मिलान किया जाए। अगर दुकानदार ने खाद बेच दी है लेकिन मशीन में स्टॉक दिखा रहा है (कालाबाजारी के लिए), तो उस पर तुरंत ‘जीरो टॉलरेंस’ के तहत कार्रवाई होगी। प्रखंडवार आवश्यकता के अनुसार ही अब खाद की सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि किसी एक इलाके में किल्लत न हो।
VOB का नजरिया: क्या केवल ‘लाइसेंस रद्द’ करने से थमेगी कालाबाजारी?
राम कृपाल यादव का यह तेवर किसानों के लिए उम्मीद की किरण है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि 115 FIR और 449 लाइसेंस रद्द करना एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन चुनौती अभी बड़ी है।
अक्सर देखा गया है कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं (जैसे बिहार-नेपाल बॉर्डर) से खाद की तस्करी धड़ल्ले से होती है। मंत्री जी का SSB के साथ समन्वय का निर्देश गेम-चेंजर साबित हो सकता है। लेकिन असली मार तब पड़ती है जब बुआई के पीक सीजन में खाद की किल्लत होती है। अधिकारियों को केवल ‘फ्लाइंग स्क्वाड’ तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हर पंचायत स्तर पर किसानों को सही दाम पर खाद मिले, इसकी जिम्मेदारी तय करनी होगी। सरकार के पास स्टॉक है, यह अच्छी बात है, लेकिन यह स्टॉक ‘बिचौलियों’ के गोदाम के बजाय ‘किसानों के खेतों’ तक समय पर पहुँचना चाहिए।


