राजनीति में ‘नो एंट्री’: खेसारी लाल यादव ने भाजपा में शामिल होने की चर्चाओं पर लगाया विराम; कहा- “सियासत में झूठ बोलना पड़ता है, मैं कलाकार ही भला”

द वॉयस ऑफ बिहार | पटना/डेस्क

​भोजपुरी सिनेमा के ‘ट्रेंडिंग स्टार’ खेसारी लाल यादव ने राजनीति में अपने प्रवेश को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर आखिरकार चुप्पी तोड़ दी है। पिछले कुछ दिनों से सियासी गलियारों में यह चर्चा गर्म थी कि रितेश पांडे के बाद अब खेसारी भी भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। लेकिन, खेसारी ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका फिलहाल राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं है।

“सच बोलने वाले के लिए राजनीति नहीं”

​मनोज तिवारी के बयानों के बाद शुरू हुई अटकलों पर दो टूक जवाब देते हुए खेसारी ने कहा:

  • स्वभाव का अंतर: “मैं एक कलाकार हूँ और कलाकार ही रहना चाहता हूँ। राजनीति मेरे स्वभाव के अनुकूल नहीं है।”
  • सच्चाई बनाम सियासत: उन्होंने तंजिया लहजे में कहा कि राजनीति में अक्सर झूठ का सहारा लेना पड़ता है, जबकि वे सच बोलने में विश्वास रखते हैं। इसीलिए वे इस क्षेत्र से दूर रहना ही बेहतर समझते हैं।

पवन सिंह और अक्षरा सिंह विवाद पर दी प्रतिक्रिया

​खेसारी ने इंडस्ट्री के अन्य कलाकारों और निजी विवादों पर भी खुलकर बात की:

  • पवन सिंह: “जो भी कलाकार बिहार-झारखंड का नाम रोशन कर रहा है, वह हम सबका गौरव है। सभी का सम्मान होना चाहिए।”
  • अक्षरा-ज्योति सिंह विवाद: अभिनेत्री अक्षरा सिंह और ज्योति सिंह के कोर्ट केस पर उन्होंने कहा कि यह एक निजी और संवेदनशील मामला है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “मैं खुद एक बेटी का पिता हूँ, इसलिए ऐसे मामलों में दुख होता है, लेकिन कोर्ट में मामला होने के कारण कुछ भी कहना विवाद खड़ा कर सकता है।”
  • स्टारडम: तेज प्रताप यादव के हालिया बयान पर खेसारी ने कहा कि स्टारडम स्थायी नहीं होता, आज कोई और है, कल कोई और होगा।

नीट छात्रा मामले और बेटियों की सुरक्षा पर जताई चिंता

​समाज और सरकार से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर भी खेसारी ने अपनी राय रखी:

  • बेटी सुरक्षा: नीट की तैयारी कर रही छात्रा की मौत पर दुख जताते हुए उन्होंने कहा कि जिस राज्य में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, वहां सरकार को गंभीरता से आत्मचिंतन करने की जरूरत है।
  • मर्मस्पर्शी बात: “हर घर में एक बेटी जरूर होनी चाहिए, ताकि लोग बेटियों का दर्द और उनकी अहमियत समझ सकें।”
  • शराबबंदी: शराबबंदी की समीक्षा और खुले में मटन की बिक्री पर रोक जैसे सवालों को उन्होंने सरकार का विशेषाधिकार बताया और कहा कि इसकी समीक्षा भी सरकार को ही करनी चाहिए।

द वॉयस ऑफ बिहार का टेक: कलाकार की अपनी गरिमा

​प्रशांत किशोर के ‘नवनिर्माण अभियान’ और अन्य कलाकारों के भाजपा में शामिल होने के शोर के बीच खेसारी का यह स्टैंड काफी साहसी है। जहाँ अक्सर सितारे अपनी लोकप्रियता को सत्ता की सीढ़ी बनाने की कोशिश करते हैं, वहीं खेसारी का अपनी कला के प्रति समर्पित रहना उनके प्रशंसकों के बीच उनकी साख को और मजबूत करेगा।

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