
नई दिल्ली/पटना। भारतीय राजनीति के फलक पर ‘सुशासन बाबू’ के नाम से अपनी पहचान दर्ज कराने वाले नीतीश कुमार ने शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को एक नए सियासी सफर का आगाज़ कर दिया। दिल्ली के संसद भवन में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उन्हें राज्यसभा सदस्य के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह केवल एक शपथ ग्रहण नहीं था, बल्कि एक ऐसे रिकॉर्ड की मुकम्मल तस्वीर थी जिसे तोड़ पाना आने वाले समय में किसी भी राजनेता के लिए हिमालय चढ़ने जैसा होगा। लेकिन इस ऐतिहासिक गौरव के बीच जेडीयू के भीतर सुलग रही उत्तराधिकार की आग ने दिल्ली की सड़कों पर ही धधकना शुरू कर दिया। जैसे ही नीतीश कुमार शपथ लेकर बाहर निकले, अपनी ही पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के आक्रोश और भावुकता का उन्हें सामना करना पड़ा। कार्यकर्ताओं ने दोटूक लहजे में नीतीश कुमार के फैसले को ‘गलत’ करार देते हुए साफ़ कह दिया कि बिहार की गद्दी पर निशांत कुमार, संजय झा या ललन सिंह के अलावा किसी और की ताजपोशी उन्हें बर्दाश्त नहीं होगी।
शपथ ग्रहण और ‘पेन’ वाला वह खास लम्हा
शुक्रवार की सुबह दिल्ली का सियासी तापमान बढ़ा हुआ था। नीतीश कुमार जब शपथ लेने पहुंचे तो उनके साथ बिहार एनडीए के दिग्गजों का जमावड़ा था। केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और अर्जुन राम मेघवाल की मौजूदगी ने इस बात पर मुहर लगा दी कि भले ही नीतीश कुमार बिहार की सक्रिय राजनीति से दूर हो रहे हैं, लेकिन दिल्ली में उनका कद अब भी बेहद ऊंचा रहने वाला है।
शपथ ग्रहण के दौरान एक रोचक दृश्य भी देखने को मिला। जब हस्ताक्षर करने की बारी आई, तो जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने अपनी जेब से पेन निकालकर नीतीश कुमार की ओर बढ़ाया। हस्ताक्षर करने के तुरंत बाद नीतीश कुमार की देहबोली में एक अजीब सी जल्दीबाजी दिखी। उन्होंने अपनी चिर-परिचित मुस्कान के साथ कहा— “हो गया… चलें?” हालांकि, वहां मौजूद अधिकारियों और फोटोग्राफरों ने उन्हें फोटो सेशन के लिए रुकने का आग्रह किया, जिसके बाद वे कुछ पलों के लिए रुके। यह क्षण बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव का प्रतीक था—नीतीश कुमार अब औपचारिक रूप से ‘दिल्ली वाले’ हो गए थे।
चार सदनों का ‘अजेय’ योद्धा: नीतीश कुमार का संसदीय कीर्तिमान
नीतीश कुमार ने आज राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण कर भारतीय संसदीय इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया है। वे देश के उन विरले नेताओं में शुमार हो गए हैं जिन्होंने लोकतंत्र के चारों सदनों की दहलीज को न केवल लांघा है, बल्कि वहां अपनी अमिट छाप छोड़ी है।
- लोकसभा: नीतीश कुमार कई बार लोकसभा के सदस्य रहे और केंद्र में रेल व कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों को संभाला।
- बिहार विधानसभा: वे बिहार विधानसभा के सदस्य के रूप में सदन के नेता रहे।
- बिहार विधान परिषद: मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने लंबे समय तक विधान परिषद के जरिए सदन की सदस्यता बनाए रखी।
- राज्यसभा: आज राज्यसभा की शपथ लेकर उन्होंने अपनी इस विधायी यात्रा के चक्र को पूरा कर लिया है।
पहली बार राज्यसभा पहुंचे नीतीश कुमार के लिए यह अनुभव नया है, लेकिन उनकी प्रशासनिक क्षमता और विधायी ज्ञान से अब उच्च सदन को एक नया आयाम मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली में कार्यकर्ताओं का ‘विद्रोह’: “आपका फैसला गलत है”
नीतीश कुमार के लिए आज की सबसे बड़ी चुनौती शपथ ग्रहण नहीं, बल्कि उसके बाद अपने ही कार्यकर्ताओं का सामना करना था। जैसे ही वे संसद से बाहर निकले और समर्थकों से मिले, वहां का माहौल पूरी तरह बदल गया। वर्षों से नीतीश कुमार की जय-जयकार करने वाले कार्यकर्ताओं ने आज उनके फैसले का विरोध करना शुरू कर दिया।
नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नीतीश कुमार के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते हुए कहा— “हम लोग आपके फैसले का विरोध करते हैं। बिहार को ऐसे समय में छोड़ना गलत है।” बात केवल विरोध तक नहीं रुकी, बल्कि कार्यकर्ताओं ने अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अपनी ‘लाइन’ खींच दी। कार्यकर्ताओं ने चिल्लाते हुए मांग की कि— “निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाइये, संजय झा को बनाइये या ललन सिंह को… इनके अलावा कोई दूसरा चेहरा बिहार की कुर्सी पर हमें मंजूर नहीं है।”
यह घटना दर्शाती है कि जेडीयू के भीतर इस समय जबरदस्त अंतर्विरोध और असुरक्षा का भाव है। कार्यकर्ताओं को डर है कि यदि भाजपा का कोई चेहरा मुख्यमंत्री बनता है, तो जेडीयू का वजूद खतरे में पड़ सकता है। इसीलिए वे नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद लोगों या उनके पुत्र निशांत कुमार के नाम पर अड़े हुए हैं।
सुबह से शाम तक बैठकों का दौर: दिल्ली में बिहार का जमावड़ा
शपथ ग्रहण से पहले ही नीतीश कुमार के दिल्ली स्थित आवास पर बिहार के बड़े नेताओं का तांता लगा रहा। सुबह-सुबह जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और राज्यसभा सांसद रामनाथ ठाकुर ने उनसे मुलाकात की। इसके बाद बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मंत्री अशोक चौधरी और मदन सहनी भी उनसे मिले। इन मुलाकातों को औपचारिक बताया जा रहा है, लेकिन सूत्रों की मानें तो इन बंद कमरों की चर्चाओं का मुख्य केंद्र ‘बिहार का अगला उत्तराधिकारी’ ही रहा। भाजपा नेतृत्व और नीतीश कुमार के बीच मुख्यमंत्री के नाम को लेकर चल रही खींचतान अब अंतिम दौर में है।
सियासी वार-पलटवार: मांझी की विदाई और राजद का प्रहार
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश लिखा। मांझी ने लिखा— “बिहार विल मिस यू नीतीश जी।” यह संदेश उस लंबे राजनीतिक सफर की याद दिलाता है जो नीतीश और मांझी ने साथ तय किया है।
दूसरी ओर, विपक्षी दल राजद ने नीतीश कुमार के इस कदम पर तीखा तंज कसा है। राजद प्रवक्ता शक्ति यादव ने कहा कि “आज से बिहार में उनकी सेवा समाप्त होती है।” राजद का मानना है कि नीतीश कुमार ने जनता के जनादेश को बीच में छोड़कर भागने का रास्ता चुना है और अब बिहार की राजनीति में उनकी पारी पूरी तरह से खत्म हो चुकी है।
निष्कर्ष: 14 अप्रैल का इंतजार और सस्पेंस
नीतीश कुमार अब राज्यसभा सांसद बन चुके हैं और दिल्ली से वापस पटना के लिए रवाना भी हो गए हैं। पटना पहुँचते ही वे सबसे पहले मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की प्रक्रिया पर चर्चा करेंगे। कार्यकर्ताओं की नाराजगी और उनके द्वारा दिए गए तीन नामों (निशांत, संजय झा, ललन सिंह) ने इस सस्पेंस को और बढ़ा दिया है।
क्या नीतीश कुमार अपने कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए जेडीयू के किसी चेहरे को आगे बढ़ाएंगे? या फिर भाजपा की पसंद के किसी नेता को बिहार की कमान सौंपी जाएगी? दिल्ली में आज कार्यकर्ताओं ने जो ‘निशांत निश्चय’ की मांग उठाई है, वह आने वाले 48 घंटों में बिहार की राजनीति में एक बड़ा तूफान ला सकती है। फिलहाल, 14 अप्रैल को नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे और उसके बाद होने वाली नई सरकार की घोषणा पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।
राजनीतिक घटनाक्रम की मुख्य कड़ियां:
- रिकॉर्ड: चारों सदनों के सदस्य बनने वाले बिहार के पहले मुख्यमंत्री।
- तनाव: जेडीयू कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में नीतीश कुमार के सामने ही जताया विरोध।
- विकल्प: कार्यकर्ताओं ने केवल निशांत कुमार, संजय झा और ललन सिंह के नाम की वकालत की।
- विपक्ष: राजद ने नीतीश की पारी को ‘समाप्त’ घोषित किया।
- अगला कदम: पटना पहुँचकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की तैयारी।


