पटना: बिहार विधानसभा चुनाव के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट जारी कर अपने 20 वर्षों के शासनकाल की उपलब्धियों का ब्योरा दिया है।
उन्होंने कहा कि “हमने जो कहा, वो किया और आगे भी बिहार के विकास के लिए लगातार काम करते रहेंगे।”
इस पोस्ट में उन्होंने 2005 से पहले के बिहार की स्थिति की तुलना आज के “विकसित बिहार” से की है।
2005 से पहले का बिहार: टूटी सड़कें, अराजकता और उपेक्षा
नीतीश कुमार ने लिखा कि 2005 से पहले बिहार विकास के हर क्षेत्र में पिछड़ा हुआ था।
उनके अनुसार —
“विकास के कार्य ठप थे, सड़कें टूटी-फूटी थीं, भवनों का रखरखाव तक नहीं होता था।
बिहार की पहचान अराजकता और भ्रष्टाचार से जुड़ गई थी।
लोग राज्य के बाहर ‘बिहारी’ कहलाने से भी कतराते थे।”
उन्होंने कहा कि उस दौर में बुनियादी ढांचे का कोई अस्तित्व नहीं था और राज्य की ऐतिहासिक विरासत उपेक्षित थी।
2005 के बाद शुरू हुआ बदलाव
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2005 के बाद उनकी सरकार ने
सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना पर सबसे अधिक ध्यान दिया।
उन्होंने लिखा —
“राज्य में नये भवनों का निर्माण हुआ, ऐतिहासिक स्थलों का पुनरुद्धार हुआ
और आधुनिक परियोजनाओं से बिहार की छवि राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर हुई।”
उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया अभी भी जारी है और सरकार लगातार विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है।
बजट में ऐतिहासिक वृद्धि
नीतीश कुमार ने बताया कि 2004-05 में बिहार का बजट केवल 24 हजार करोड़ रुपये था,
जो अब बढ़कर 3 लाख 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने कुशल वित्तीय प्रबंधन के साथ इस राशि का उपयोग
राज्य के सर्वांगीण विकास में किया है।
“जो कहा, वो किया” — जनता से अपील
अपनी पोस्ट के अंत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनता से अपील की —
“हमलोगों ने जो आपके लिए काम किए हैं, उसे याद रखिएगा।
आगे भी हमलोग ही काम करेंगे।
हमलोग जो कहते हैं, उसे पूरा करते हैं।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि
नीतीश कुमार की यह विस्तृत पोस्ट सिर्फ उनकी 20 साल की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड नहीं,
बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए
जनता को यह याद दिलाने की कोशिश भी है कि
“बदलाव की शुरुआत नीतीश कुमार के शासन से हुई थी।”


