CM पद छोड़ने के बाद पहली बार JDU दफ्तर पहुंचे नीतीश कुमार, खुद पर बना गाना सुन बजाने लगे ताली

पटना: मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद रविवार को पहली बार जनता दल (यूनाइटेड) के प्रदेश कार्यालय पहुंचे। यह दौरा कई मायनों में खास रहा, क्योंकि लंबे समय बाद वे सीधे पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच नजर आए। इस दौरान कार्यालय परिसर में उत्साह, भावनात्मक जुड़ाव और राजनीतिक संदेश—तीनों का अनोखा संगम देखने को मिला।

सुबह करीब 10:30 बजे जैसे ही नीतीश कुमार जदयू कार्यालय पहुंचे, वहां मौजूद कार्यकर्ताओं में जबरदस्त जोश देखने को मिला। शंखनाद और नारेबाजी के बीच उनका स्वागत किया गया। “जिंदाबाद” और “नीतीश कुमार अमर रहें” जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। कार्यकर्ताओं ने अपने नेता के प्रति समर्थन और सम्मान का खुलकर प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम के तहत भामाशाह जयंती समारोह का आयोजन किया गया था। नीतीश कुमार ने सबसे पहले मंच पर पहुंचकर वीर शिरोमणि दानवीर भामाशाह की तस्वीर पर माल्यार्पण किया। इस दौरान उन्होंने समाज सेवा, त्याग और समर्पण के मूल्यों को याद किया। उनके साथ कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

कर्पूरी सभागार में जैसे ही नीतीश कुमार पहुंचे, कार्यकर्ताओं ने खड़े होकर उनका स्वागत किया। उन्होंने हाथ जोड़कर सबका अभिवादन स्वीकार किया और कई बार हाथ हिलाकर लोगों का उत्साह बढ़ाया। यह दृश्य बताता है कि पार्टी के भीतर उनका प्रभाव और लोकप्रियता अभी भी मजबूत बनी हुई है।

कार्यक्रम के दौरान एक दिलचस्प और भावुक क्षण भी देखने को मिला। विधान पार्षद ललन सर्राफ ने घोषणा की कि सुमित बाबा नामक कलाकार नीतीश कुमार पर आधारित एक गीत प्रस्तुत करेंगे। जैसे ही गीत शुरू हुआ, पूरा माहौल संगीत और भावनाओं से भर गया। गीत के बोलों में नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा, उनके कार्य और उनकी छवि को दर्शाया गया था।

गीत सुनते हुए नीतीश कुमार खुद को रोक नहीं पाए और मुस्कुराते हुए तालियां बजाने लगे। यह दृश्य कार्यकर्ताओं के लिए खास बन गया। एक ओर जहां यह उनके सहज और मानवीय पक्ष को दिखाता है, वहीं दूसरी ओर यह संकेत भी देता है कि वे पार्टी और कार्यकर्ताओं से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं।

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी, वरिष्ठ नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव, पूर्व मंत्री लेशी सिंह और अशोक चौधरी समेत कई प्रमुख नेता मौजूद थे। खास बात यह रही कि नीतीश कुमार ने बिजेंद्र यादव को दूर से बुलाकर अपने पास बैठाया, जिससे उनके बीच की नजदीकी और आपसी सम्मान साफ झलकता है।

करीब 10 से 15 मिनट तक कार्यालय में रुकने के दौरान नीतीश कुमार ने किसी औपचारिक भाषण से परहेज किया, लेकिन उनके हाव-भाव और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद ने बहुत कुछ कह दिया। उनके इस छोटे लेकिन प्रभावशाली दौरे ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे अभी भी पार्टी के केंद्र में हैं।

राजनीतिक दृष्टिकोण से यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद यह पहला अवसर था जब वे इतने खुले रूप में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच नजर आए। इससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में वे संगठनात्मक गतिविधियों में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक उपस्थिति नहीं था, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी था। इससे यह दिखाने की कोशिश की गई कि जदयू अब भी नीतीश कुमार के नेतृत्व में एकजुट है और कार्यकर्ताओं का भरोसा उनके साथ कायम है।

भामाशाह जयंती जैसे आयोजन के माध्यम से पार्टी ने सामाजिक समरसता और सेवा के मूल्यों को भी सामने रखने की कोशिश की। इस कार्यक्रम के जरिए यह संदेश दिया गया कि राजनीति केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि समाज सेवा का जरिया भी है।

नीतीश कुमार के इस दौरे के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि आगे उनकी भूमिका क्या होगी और वे किस तरह से राज्य की राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज कराएंगे।

कुल मिलाकर, जदयू कार्यालय में उनका यह दौरा भले ही समय में छोटा रहा हो, लेकिन प्रभाव के लिहाज से काफी बड़ा साबित हुआ। कार्यकर्ताओं के उत्साह, गीत के दौरान उनकी प्रतिक्रिया और नेताओं के साथ उनकी बातचीत ने यह साफ कर दिया कि बिहार की राजनीति में उनका कद आज भी बरकरार है।

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