
पटना सिटी। बिहार की राजनीति के शिखर पुरुष और वर्तमान में राज्यसभा सांसद के रूप में देश की सबसे बड़ी पंचायत में बिहार का प्रतिनिधित्व कर रहे नीतीश कुमार से मिलने शनिवार को तख्त श्री हरिमंदिर जी प्रबंधक कमेटी का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पहुँचा। यह मुलाकात केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें एक गहरी कृतज्ञता और भविष्य की विकासपरक उम्मीदों का समावेश दिखाई दिया। तख्त श्री हरिमंदिर जी प्रबंधक कमेटी के उपाध्यक्ष गुरविंदर सिंह और बिल्डिंग कमेटी के चेयरमैन सुमित सिंह कलसी ने नीतीश कुमार से उनके आवास पर भेंट की और उन्हें राज्यसभा सांसद के रूप में नई राजनैतिक पारी की शुरुआत करने के लिए हार्दिक बधाई दी। यह मिलन उस अटूट रिश्ते की तस्दीक करता है जो नीतीश कुमार ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान सिख समुदाय और विशेषकर गुरु गोविंद सिंह जी की जन्मस्थली पटना साहिब के साथ विकसित किया था। 18 अप्रैल 2026 की इस मुलाकात ने उन यादों को ताजा कर दिया जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में पटना सिटी ने वैश्विक पटल पर अपनी एक विशिष्ट आध्यात्मिक पहचान बनाई थी।
मुख्यमंत्री से सांसद तक का सफर: एक अटूट रिश्ता
नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद से राज्यसभा सांसद के रूप में संक्रमण बिहार की राजनीति के लिए एक बड़े बदलाव का प्रतीक है। लेकिन पटना साहिब और सिख समुदाय के लिए नीतीश कुमार का व्यक्तित्व किसी पद की गरिमा से कहीं ऊंचा है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने नीतीश कुमार को फूलों का गुलदस्ता भेंट किया और उनके सफल कार्यकाल की कामना की। गुरविंदर सिंह ने इस अवसर पर कहा कि नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के रूप में जिस तरह से सिख समुदाय की भावनाओं का सम्मान किया, वह भारतीय राजनीति में एक मिसाल है।
उन्होंने याद दिलाया कि नीतीश कुमार के शासनकाल में ही तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब के आसपास का कायाकल्प हुआ था। तख्त साहिब के विकास के लिए जो दूरगामी नीतियां बनाई गईं, उनका लाभ आज भी देश-दुनिया से आने वाली संगत को मिल रहा है। राज्यसभा सांसद के रूप में नीतीश कुमार की नई भूमिका को लेकर सिख समुदाय उत्साहित है क्योंकि उन्हें विश्वास है कि अब वे राष्ट्रीय स्तर पर पटना साहिब और बिहार के सांस्कृतिक गौरव को और अधिक मजबूती से उठा सकेंगे।
350वें प्रकाश पर्व का ऐतिहासिक आयोजन और नीतीश कुमार का योगदान
मुलाकात के दौरान उन गौरवशाली क्षणों की चर्चा भी हुई जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में पटना साहिब ने सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी का 350वां प्रकाश पर्व मनाया था। वह आयोजन केवल बिहार का नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर का एक बड़ा सांस्कृतिक और धार्मिक महाकुंभ था। गुरविंदर सिंह ने नीतीश कुमार की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि उस समय मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने स्वयं एक-एक छोटी से छोटी व्यवस्था की निगरानी की थी।
चाहे वह टेंट सिटी का निर्माण हो, गुरु का बाग का सौंदर्यीकरण हो या फिर राजधानी के बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाना—नीतीश कुमार के विजन ने पटना सिटी की सूरत बदल दी थी। प्रकाश पर्व के सफल आयोजन ने दुनिया भर में बिहार की छवि को बदला और यह साबित किया कि बिहार इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजनों की मेजबानी पूरी भव्यता और सुरक्षा के साथ कर सकता है। सिख समुदाय नीतीश कुमार के उस योगदान को कभी नहीं भूल सकता, जिसने पटना साहिब को ‘मिनी पंजाब’ के रूप में वैश्विक पहचान दिलाई।
बिल्डिंग कमेटी की उम्मीदें: सुमित सिंह कलसी का दृष्टिकोण
तख्त साहिब बिल्डिंग कमेटी के चेयरमैन सुमित सिंह कलसी ने नीतीश कुमार से भविष्य की परियोजनाओं पर संक्षिप्त चर्चा की। कलसी का मानना है कि तख्त साहिब परिसर में अभी भी कई ऐसे बुनियादी ढांचे के काम बाकी हैं जिन्हें केंद्रीय स्तर की योजनाओं के माध्यम से पूरा किया जा सकता है। नीतीश कुमार का राज्यसभा में पहुँचना इन परियोजनाओं के लिए एक नए द्वार खुलने जैसा है।
कलसी ने कहा कि संगत की बढ़ती संख्या को देखते हुए आवास, लंगर हॉल के विस्तार और आधुनिक संग्रहालय जैसी सुविधाओं की आवश्यकता है। नीतीश कुमार ने जिस तरह से पूर्व में बिल्डिंग कमेटी और प्रबंधक कमेटी की मांगों को प्राथमिकता दी थी, वैसी ही उम्मीद अब भी बनी हुई है। राज्यसभा सांसद के पास विकास निधि और केंद्र सरकार के मंत्रालयों के साथ समन्वय की शक्ति होती है। सिख समुदाय को उम्मीद है कि नीतीश कुमार पर्यटन मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय के साथ मिलकर पटना साहिब के लिए विशेष पैकेज और नए प्रोजेक्ट्स लाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक एकता का संकल्प
नीतीश कुमार ने हमेशा ‘न्याय के साथ विकास’ की बात की है और उनके लिए पटना साहिब का विकास केवल ईंट-पत्थर का निर्माण नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का एक प्रतीक रहा है। गुरविंदर सिंह ने मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि नीतीश कुमार की सोच हमेशा समावेशी रही है। उन्होंने गुरुद्वारों के साथ-साथ राज्य के सभी धार्मिक स्थलों के संरक्षण के लिए काम किया, लेकिन तख्त साहिब के प्रति उनका झुकाव हमेशा विशेष रहा है।
सिख समुदाय नीतीश कुमार को एक ऐसे राजनेता के रूप में देखता है जिसने मजहब से ऊपर उठकर मानवता की सेवा और गुरुओं के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने में मदद की। राज्यसभा में उनके रहने से बिहार की आवाज तो बुलंद होगी ही, साथ ही सिख समुदाय के हित और धार्मिक पर्यटन की योजनाएं भी गति प्राप्त करेंगी। सुमित सिंह कलसी ने कहा कि नीतीश कुमार का अनुभव देश के काम आएगा और वे राज्यसभा में एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे।
भविष्य की योजनाएं: दिल्ली के गलियारों में पटना साहिब की गूँज
गुरविंदर सिंह और सुमित सिंह कलसी के अनुसार, आने वाले समय में वे नीतीश कुमार के माध्यम से केंद्र सरकार के समक्ष कुछ विशेष प्रस्ताव रखने की योजना बना रहे हैं। इनमें पटना साहिब रेलवे स्टेशन का और अधिक आधुनिकीकरण, कंगन घाट का विकास और प्रकाश पुंज (प्रकाश पर्व के अवसर पर बना संग्रहालय) को पूर्णतः क्रियाशील बनाना शामिल है।
नीतीश कुमार ने मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे बिहार और पटना साहिब की प्रगति के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे। पद बदलने से उनकी प्राथमिकताएं नहीं बदली हैं। सांसद के रूप में वे दिल्ली के गलियारों में उन परियोजनाओं की पैरवी करेंगे जो पिछले कुछ समय से तकनीकी कारणों से लंबित हैं। गुरविंदर सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार का व्यक्तित्व ऐसा है कि वे जहां भी रहेंगे, वहां विकास और सेवा की गंगा बहती रहेगी। उन्हें राज्यसभा सांसद के रूप में देखना पूरे बिहार के लिए गर्व की बात है।
सिख समुदाय का अटूट विश्वास और विदाई का भाव
पटना सिटी के सिखों के लिए नीतीश कुमार किसी पारिवारिक सदस्य की तरह रहे हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए उनका बार-बार गुरुद्वारा साहिब जाना और संगत के बीच बैठकर लंगर छकना लोगों के दिलों में बस गया है। सुमित सिंह कलसी ने बताया कि नीतीश कुमार की यह सादगी और धार्मिक सद्भाव ही उन्हें अन्य नेताओं से अलग करता है।
प्रतिनिधिमंडल ने नीतीश कुमार को यह अहसास कराया कि बिहार की जनता और सिख समुदाय हमेशा उनके साथ खड़ा है। राज्यसभा की नई पारी के लिए दी गई यह बधाई केवल एक राजनैतिक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह उन करोड़ों दुआओं का हिस्सा थी जो नीतीश कुमार ने अपने सुशासन के माध्यम से अर्जित की हैं। गुरविंदर सिंह ने अंत में कहा कि नीतीश कुमार का मार्गदर्शन तख्त साहिब की प्रबंधक कमेटी को मिलता रहे, यही हमारी कामना है।
यह मुलाकात 18 अप्रैल 2026 के दिन पटना की राजनैतिक और धार्मिक फिजां में एक सकारात्मक संदेश छोड़ गई है। नीतीश कुमार ने जिस तरह से मुस्कुराहट के साथ प्रतिनिधिमंडल की बातों को सुना और भविष्य में सहयोग का वादा किया, उसने यह साफ कर दिया है कि वे भले ही अब मुख्यमंत्री की कुर्सी पर न हों, लेकिन बिहार के विकास की धड़कन आज भी उनके विजन में समाहित है। पटना साहिब का कण-कण उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों का गवाह है और राज्यसभा सांसद के रूप में उनकी यह नई पारी इस विकास गाथा में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ने वाली है।


