HIGHLIGHTS:
- ऑन-कैमरा मस्ती: सभा छोड़कर जा रही महिलाओं और जीविका दीदियों को सीएम नीतीश ने मंच से ही रोका।
- चुटीला सवाल: “अगर सब भाग जाएगा तो हम छोड़ देते हैं? बोलिए हम छोड़ दें?”— मुस्कुराते हुए बोले सीएम।
- अतीत पर प्रहार: 2005 से पहले की सरकार को बताया ‘डरावना’; बोले- “तब लोग शाम को निकलने से डरते थे।”
- बड़ा लक्ष्य: 50 लाख को दिया रोजगार, अगले 5 साल में 1 करोड़ नौकरी और रोजगार देने का संकल्प।
“अरे रुकिए ना! कहाँ भाग रही हैं?”— जब भाषण के बीच ‘सुशासन बाबू’ ने ली चुटकी
बेगूसराय: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के तहत बेगूसराय के बियाडा मैदान पहुंचे। यहाँ का माहौल तब और दिलचस्प हो गया जब सीएम अपना भाषण दे रहे थे और कुछ जीविका दीदियां व महिलाएं सभा छोड़कर जाने लगीं। यह देख नीतीश कुमार ने अपना भाषण बीच में रोका और अपने चिर-परिचित मजाकिया अंदाज में उन्हें टोकना शुरू कर दिया।
[सीएम की ‘क्लास’: मंच से सीधी बातचीत]
मैदान में मची हलचल को देख सीएम ने माइक्रोफोन संभाला और सीधे पीछे की कतारों की ओर इशारा किया:
नीतीश कुमार: “अरे कहाँ भाग रहे हैं? हम बंद कर दें क्या? काहे भाग रही हैं? हम तो देख रहे थे पहले उधर से जा रही थीं, अब पीछे से जा रही हैं। अगर सब भाग जाएगा तो हम छोड़ देते हैं, बोलिए हम छोड़ दें? जहाँ बैठी हैं, वहीं बैठकर सुनिए।”
सीएम की यह बात सुनकर पूरी सभा में ठहाके गूंज उठे और जो महिलाएं जा रही थीं, वे वापस अपनी जगहों पर बैठ गईं। इसके बाद सीएम ने हाथ उठवाकर पूछा— “भाषण होगा ना?” और फिर शुरू हुआ उनका सियासी प्रहार।
[रिपोर्ट कार्ड: नीतीश कुमार का ‘अब और तब’ वाला प्रहार]
सीएम ने बेगूसराय की धरती से लालू-राबड़ी शासनकाल (2005 से पहले) पर जमकर हमला बोला:
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विषय |
2005 से पहले (सीएम के अनुसार) |
2005 के बाद (एनडीए सरकार) |
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सुरक्षा |
शाम को लोग घर से निकलने में डरते थे। |
कानून का राज है, महिलाएं सुरक्षित हैं। |
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सामाजिक एकता |
हिंदू-मुस्लिम झगड़े आम बात थी। |
कब्रिस्तानों की घेराबंदी और मंदिरों की बाउंड्री। |
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रोजगार |
व्यवस्था चौपट थी, सिर्फ अपनों की पैरवी। |
50 लाख को रोजगार दिया, 1 करोड़ का लक्ष्य। |
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सिस्टम |
शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था रद्दी थी। |
चहुंओर विकास और केंद्र की मदद। |
“पुरानी वाली सरकार का काम ‘रद्दी’ था”— सीएम का तीखा वार
नीतीश कुमार ने कहा कि पिछली सरकार में लोग शाम होने के बाद बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे। उन्होंने कहा, “उन लोगों ने जनता के लिए कुछ नहीं किया, सिर्फ अपने परिवार को बढ़ावा दिया। हमने तेजी से कब्रिस्तानों की घेराबंदी करवाई ताकि झगड़े बंद हों और मंदिरों में भी बाउंड्री बनवाई। आज सब जगह शांति है।”
युवाओं के लिए ‘नौकरी’ का मेगा प्लान
सीएम ने अपनी उपलब्धि गिनाते हुए कहा कि अब तक 50 लाख युवाओं को नौकरी और रोजगार से जोड़ा गया है। उन्होंने ऐलान किया कि आने वाले 5 सालों में इस लक्ष्य को बढ़ाकर 1 करोड़ किया जाएगा। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे पुरानी सरकार के ‘डरावने समय’ को कभी न भूलें।
VOB का नजरिया: नीतीश कुमार का ‘मैनेजमेंट’ और ‘मैसेजिंग’!
बेगूसराय की इस सभा में दो बातें साफ दिखीं। पहली, नीतीश कुमार का आज भी आम जनता (खासकर महिलाओं) से सीधा जुड़ाव है, जहाँ वे उन्हें अधिकार से टोक सकते हैं। दूसरी, 2026 के चुनावी मोड में आते ही सीएम ने अपनी पिच साफ कर दी है— ‘विकास बनाम पुराना डरावना दौर’। 1 करोड़ नौकरियों का वादा एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक है, जो सीधे तौर पर युवाओं को आकर्षित करने की कोशिश है। हालांकि, सभा छोड़कर जाती महिलाओं को टोकना यह भी दर्शाता है कि घंटों तक धूप में इंतजार करने वाली जनता के धैर्य की भी एक सीमा होती है।


