
Highlights:
- बड़ी योजना: मुख्यमंत्री दिव्यांगजन योजना के तहत उद्यमियों को मिलेगा आर्थिक संबल।
- बजट: प्रति इकाई 10 लाख रुपये तक का ऋण और अनुदान।
- लक्ष्य: ‘7 निश्चय-3’ के माध्यम से राज्य में 1 करोड़ रोजगार सृजन की तैयारी।
- प्रोसेस: उद्योग विभाग के पोर्टल udyami.bihar.gov.in पर करना होगा ऑनलाइन आवेदन।
पटना: बिहार में नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। ‘सात निश्चय-3’ के तहत बिहार को स्वरोजगार का हब बनाने के लिए ‘मुख्यमंत्री दिव्यांगजन योजना’ को रफ्तार दी जा रही है। इस योजना के जरिए अब दिव्यांग व्यक्ति केवल नौकरी की तलाश नहीं करेंगे, बल्कि दूसरों को नौकरी देने वाले ‘उद्यमी’ बनेंगे। सरकार ने साफ कर दिया है कि राज्य में 1 करोड़ रोजगार के लक्ष्य को पूरा करने के लिए दिव्यांगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
10 लाख की मदद: सपनों को मिलेगी ‘उड़ान’
उद्योग विभाग द्वारा संचालित इस योजना के तहत पात्र लाभुकों को अपनी यूनिट या बिजनेस सेटअप करने के लिए अधिकतम 10 लाख रुपये तक की राशि प्रदान की जाएगी।
- ऋण और अनुदान: यह राशि ऋण (Loan) और अनुदान (Subsidy) के मिश्रित रूप में होगी, जिससे दिव्यांग उद्यमियों पर आर्थिक बोझ कम पड़े।
- उद्यमिता को बढ़ावा: इस योजना का मुख्य उद्देश्य शारीरिक बाधाओं को दरकिनार कर दिव्यांगों के भीतर छिपे हुनर को निखारना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
7 निश्चय-3 और 1 करोड़ रोजगार का संकल्प
बिहार सरकार का विजन अब केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं है। ‘7 निश्चय-3’ के तहत सरकार राज्य में नए उद्योगों की स्थापना पर जोर दे रही है।
- औद्योगीकरण: लघु और सूक्ष्म उद्योगों को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर काम के अवसर पैदा करना।
- समावेशी विकास: समाज के हर वर्ग, विशेषकर दिव्यांगों को मुख्यधारा से जोड़ना ताकि ‘अपना बिहार’ तेजी से बढ़ सके।
कैसे करें आवेदन? नोट कर लें ये स्टेप्स
यदि आप या आपके परिचय में कोई इस योजना का लाभ लेना चाहता है, तो उसे दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है:
- पोर्टल: उद्योग विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://udyami.bihar.gov.in पर जाएं।
- पंजीकरण: पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज करें और जरूरी दस्तावेज अपलोड करें।
- स्वीकृति: विभाग द्वारा जांच के बाद पात्र उम्मीदवारों को ऋण और अनुदान की राशि सीधे उनके बैंक खातों या प्रोजेक्ट के अनुसार आवंटित की जाएगी।
VOB का नजरिया: आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता बिहार
अक्सर दिव्यांगों को समाज में सहानुभूति की दृष्टि से देखा जाता है, लेकिन नीतीश सरकार की यह योजना उन्हें ‘सहानुभूति’ नहीं ‘शक्ति’ देने वाली है। 10 लाख रुपये की पूंजी एक छोटे उद्योग के लिए काफी है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ नागरिकों से अपील करता है कि इस योजना का अधिक से अधिक प्रचार करें ताकि कोई भी योग्य व्यक्ति जानकारी के अभाव में पीछे न छूट जाए। बिहार तभी मजबूत बनेगा, जब उसका हर नागरिक मजबूत होगा।


