
पटना |15 जुलाई 2025: भारत की वास्तविक प्रगति अब केवल जीडीपी या बुनियादी ढाँचे की उपलब्धियों से नहीं, बल्कि मानव पूँजी—अर्थात शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और उत्पादकता—में किए गए निवेश से मापी जा रही है। बीते एक दशक में नीति आयोग ने इस दिशा में एक शांत लेकिन दूरगामी क्रांति का नेतृत्व किया है।
भारत की 65% आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है, जिसे जनसांख्यिकीय लाभांश माना जाता है। इस युवा शक्ति को आर्थिक और राष्ट्रीय विकास की धारा में लाने के लिए नीति आयोग ने कई क्रांतिकारी पहल की हैं:
1. शिक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने में नीति आयोग की केंद्रीय भूमिका रही है।
- रटंत शिक्षा की जगह आलोचनात्मक सोच, लचीलापन और नवाचार पर ज़ोर।
- अटल टिंकरिंग लैब्स और अटल नवाचार मिशन के ज़रिए स्कूल स्तर से ही नवाचार को प्रोत्साहन।
2. कौशल विकास और रोजगार
- कौशल भारत मिशन के तहत 1.5 करोड़ से अधिक युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण।
- आकांक्षी जिलों में रोजगारोन्मुखी कार्यक्रमों की पहुँच।
- श्रम कानूनों को सरल बना कर अनौपचारिक क्षेत्र के करोड़ों कामगारों को लाभ।
3. स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश
- आयुष्मान भारत योजना से 50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा।
- 1.5 लाख से अधिक स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों की स्थापना।
- महामारी के दौरान ई-संजीवनी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली की शुरुआत।
4. नवाचार और स्टार्टअप्स को बढ़ावा
- स्टार्टअप इंडिया और अटल इनोवेशन मिशन जैसे अभियानों से हेल्थटेक, एडटेक, एग्रीटेक जैसे क्षेत्रों में हज़ारों नवाचारों को मंच मिला।
5. साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण
- एसडीजी इंडेक्स, रियल-टाइम डैशबोर्ड, और व्यवहारिक अध्ययन के माध्यम से नीति निर्माण को वैज्ञानिक बनाया गया।
- राज्यों की प्रदर्शन आधारित रैंकिंग से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बल मिला।
नीति आयोग ने स्पष्ट किया है कि विकास का असली मापदंड लोगों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन में निहित है। यह संस्थान अब केवल एक थिंक टैंक नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के भारत की धड़कन बन गया है।


