बाबा मंदिर केस में गिरफ्तारी देने पहुंचे निशिकांत दुबे, पुलिस ने किया इनकार — बोले, “मैं भगोड़ा नहीं, कानून का पालन करना ही मेरा धर्म”

देवघर, 9 अगस्त 2025 — झारखंड के गोड्डा लोकसभा सांसद और भाजपा नेता डॉ. निशिकांत दुबे शनिवार को देवघर के बाबा मंदिर थाना पहुंचे, इरादा था खुद को गिरफ्तार करवाने का। लेकिन पुलिस ने साफ कह दिया — “अभी गिरफ्तारी संभव नहीं”। वजह? शनिवार का दिन, कोर्ट बंद, और कानूनी प्रक्रिया अधूरी।


थाने पहुंचे, गिरफ्तारी की पेशकश, लेकिन…

बाबा बैद्यनाथ धाम के इस चर्चित केस में एफआईआर दर्ज होने के बाद सांसद दुबे खुद शनिवार को थाना पहुंचे। करीब आधे घंटे तक थाने में रहे, लेकिन पुलिस ने उन्हें बताया कि बाबा मंदिर प्रकरण में सीधी गिरफ्तारी नहीं हो सकती
कानून के मुताबिक, इस मामले में गिरफ्तारी से पहले तीन बार नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। साथ ही, शनिवार होने के कारण कोर्ट बंद है और अभी तक एफआईआर की कॉपी कोर्ट में भी नहीं पहुंची है।


“मैं भगोड़ा नहीं, कानून बनाता हूं और मानता भी हूं”

थाने से निकलते वक्त मीडिया से बात करते हुए सांसद दुबे ने कहा —

“मैं सांसद हूं, कानून बनाता हूं और उसका सम्मान करना मेरा धर्म है। जब मुझे पता चला कि मेरे खिलाफ एफआईआर हुई है, मैं तुरंत थाना आ गया। मैं कभी कानून से भागूंगा नहीं।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रशासन जब भी बुलाएगा, वे पेश होंगे।


राज्य सरकार पर निशाना साधा

दुबे ने झारखंड सरकार और देवघर जिला प्रशासन पर व्यक्तिगत द्वेष का आरोप लगाया। उनका कहना था कि यह पूरा मामला उन्हें परेशान करने के लिए खड़ा किया गया है।

“बैद्यनाथ धाम के आशीर्वाद से मैं वादा करता हूं कि आने वाले समय में इनको उनकी गलती का एहसास कराऊंगा और मुंहतोड़ जवाब दूंगा।”

उन्होंने बताया कि धारा 105 के तहत उन्होंने संसद में झारखंड के डीजीपी, मुख्य सचिव, देवघर डीसी और एसपी के खिलाफ सवाल उठाए हैं, जिसकी सुनवाई सोमवार को होगी।


आखिर मामला है क्या?

यह विवाद 2 अगस्त को तब खड़ा हुआ, जब सांसद निशिकांत दुबे और सांसद मनोज तिवारी पर मंदिर के निकास द्वार से जबरन गर्भगृह में प्रवेश करने का आरोप लगा। मंदिर के पुजारी कार्तिक ठाकुर ने शिकायत दर्ज कराई कि इससे सुरक्षा व्यवस्था और पूजा-अर्चना बाधित हुई।
इसी शिकायत के आधार पर बाबा मंदिर थाना में एफआईआर दर्ज की गई।


अब आगे क्या?

कानूनी प्रक्रिया के मुताबिक, अगला कदम पुलिस द्वारा नोटिस जारी करना होगा। यदि सांसद नोटिस का पालन नहीं करते, तभी गिरफ्तारी की स्थिति बन सकती है। सोमवार को इस मामले पर संसद में भी बहस होने की संभावना है।


 

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