
बिहार के मिथिला क्षेत्र के लिए बड़ी खुशखबरी है। 8 नवंबर 2020 को उद्घाटित दरभंगा एयरपोर्ट पर अब जल्द ही नाइट लैंडिंग की सुविधा शुरू होने वाली है। अब तक यहां केवल दिन में ही उड़ानें संचालित हो रही थीं, जिससे यात्रियों को खासकर सर्दियों के मौसम में काफी परेशानी होती थी। लेकिन अब यह समस्या काफी हद तक दूर होने वाली है।
जल संसाधन विभाग से एनओसी मिलने के बाद रनवे पर कैट-2 लाइटिंग और अप्रोच लाइट्स लगाने का काम तेज कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा कार्य जनवरी 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद दरभंगा एयरपोर्ट से रात में भी विमानों की आवाजाही संभव हो सकेगी, जिससे विंटर सीजन में कोहरे के कारण होने वाली उड़ानों की रद्दीकरण की समस्या भी कम होगी।
रिंग बांध बना था सबसे बड़ी बाधा
दरअसल, नाइट लैंडिंग में सबसे बड़ी बाधा रनवे के पास स्थित रिंग बांध की ऊंचाई थी, जिसके लिए जल संसाधन विभाग से अनुमति जरूरी थी। अब योजना के तहत 350 मीटर बांध काटा जाएगा और 175 मीटर हिस्से की ऊंचाई कम की जाएगी, जिससे अप्रोच लाइटिंग लगाने में कोई तकनीकी बाधा न रहे।
रनवे के चारों ओर करीब 900 वर्ग मीटर क्षेत्र में अप्रोच लाइटिंग लगाई जानी है। इसमें से लगभग 300 वर्ग मीटर का काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य जनवरी 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा।
रात्रि उड़ानों के लिए एयरलाइंस तैयार
एयर इंडिया एक्सप्रेस ने पहले से ही दरभंगा एयरपोर्ट के लिए नाइट स्लॉट बुक कर रखा है। ऐसे में जैसे ही नाइट लैंडिंग की सुविधा शुरू होगी, यहां से उड़ानों की संख्या बढ़ने की पूरी संभावना है।
नया टर्मिनल और आधुनिक सुविधाएं
इसी के साथ दरभंगा के रानीपुर इलाके में 54 एकड़ भूमि पर नया टर्मिनल भवन भी बनाया जा रहा है। इस टर्मिनल में आधुनिक वेटिंग एरिया, चेक-इन काउंटर और उन्नत सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध होगी। इसके अलावा एप्रन और टैक्सीवे के विस्तार के बाद एक साथ सात विमानों की पार्किंग संभव हो सकेगी।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का रास्ता होगा साफ
इन सभी सुविधाओं के पूरा होने के बाद दरभंगा एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शुरुआत का रास्ता भी आसान हो जाएगा। इससे मिथिला और उत्तर बिहार के यात्रियों को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु के साथ-साथ विदेशों तक सीधी कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
क्षेत्रीय हब बनने की ओर दरभंगा
नाइट लैंडिंग सुविधा और नए इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ दरभंगा एयरपोर्ट को क्षेत्रीय एविएशन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। एयरपोर्ट अथॉरिटी और निर्माण एजेंसियां अब तेजी से काम कर रही हैं ताकि तय समयसीमा के भीतर सभी परियोजनाएं पूरी की जा सकें।
कुल मिलाकर, यह विकास न सिर्फ दरभंगा बल्कि पूरे मिथिला और उत्तर बिहार के लिए हवाई कनेक्टिविटी के लिहाज से एक ऐतिहासिक बदलाव साबित होने वाला है।


