“विधायिका की पाठशाला” से निकले नए माननीय: बजट सत्र के बाद बोले भागलपुर विधायक रोहित पांडेय— “सदन ने दिया विकसित बिहार का विजन”

पटना/भागलपुर | 02 मार्च, 2026: बिहार विधानसभा का बजट सत्र न केवल राज्य के वित्तीय भविष्य का लेखा-जोखा रहा, बल्कि पहली बार चुनकर आए विधायकों के लिए एक ‘प्रशिक्षण केंद्र’ भी साबित हुआ। सत्र की समाप्ति के बाद भागलपुर के भाजपा विधायक रोहित पांडेय सहित कई नए जनप्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए। सभी का एक ही स्वर था— “यह सत्र एक कार्यशाला की तरह था, जहाँ लोकतंत्र की बारीकियों को सीखने का मौका मिला।”

सदन के भीतर: मुद्दों की गूँज और विकास का रोडमैप

​विधायक रोहित पांडेय ने बजट सत्र को अपने राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया। उनके अनुभवों के मुख्य बिंदु:

  • सामूहिक सोच का दर्शन: रोहित पांडेय के अनुसार, सदन में केवल स्थानीय समस्याएं ही नहीं, बल्कि “विकसित बिहार” के लिए एक साझा विजन दिखाई दिया।
  • मुद्दों की विविधता: सड़कों, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर जिस गंभीरता से चर्चा हुई, उससे नए विधायकों को काम करने की नई दिशा मिली।
  • सीखने का अवसर: वरिष्ठ विधायकों के तर्क, आंकड़ों का प्रस्तुतिकरण और विधायी प्रक्रियाओं (जैसे प्रश्नकाल और ध्यानाकर्षण) ने एक ‘वर्कशॉप’ की तरह काम किया।

संसदीय औजार: कैसे उठती है जनता की आवाज?

​पहली बार विधायक बने नेताओं ने माना कि सदन की कार्यप्रणाली को समझना उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि रही। उन्होंने सीखा कि:

    1. प्रश्नकाल (Question Hour): कैसे सीधे विभाग से जवाब मांगा जाता है।
    2. ध्यानाकर्षण (Calling Attention): जनहित के जरूरी मुद्दों पर सरकार का ध्यान कैसे खींचा जाता है।
    3. सीधा संवाद: विभागीय मंत्रियों से मिलकर अपने क्षेत्र की फाइलों को गति देना।

​”यह सिर्फ विधानसभा में बैठने की बात नहीं थी, बल्कि यह समझने की प्रक्रिया थी कि प्रभावी तरीके से जनता की आवाज को सत्ता के शीर्ष तक कैसे पहुँचाया जाए। अब हम बजट के प्रावधानों का अधिकतम लाभ अपने क्षेत्र की जनता तक पहुँचाने का प्रयास करेंगे।” — रोहित पांडेय, विधायक, भागलपुर

VOB का नजरिया: नई पीढ़ी, नई उम्मीदें

​बिहार की राजनीति में युवाओं और नए चेहरों का सदन के प्रति यह सकारात्मक दृष्टिकोण सुखद है। अक्सर शोर-शराबे और हंगामे के बीच सदन की ‘सीखने वाली’ छवि दब जाती है, लेकिन रोहित पांडेय जैसे युवा विधायकों का यह अनुभव बताता है कि लोकतंत्र की जड़ें अभी भी संवाद और विजन पर टिकी हैं। अब देखना यह है कि बजट सत्र से मिली यह ‘सीख’ भागलपुर की जमीन पर विकास बनकर कब उतरती है।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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