बिहार पुलिस में नया इतिहास: एक साथ शुरू हुआ 22 हजार से अधिक सिपाहियों का प्रशिक्षण, 33 जिलों में अस्थायी केंद्र और जीवनशैली पर विशेष फोकस

पटना, 7 अगस्त 2025 — बिहार पुलिस ने अपनी इतिहास में पहली बार एक साथ 22,300 से अधिक नवनियुक्त सिपाहियों के बुनियादी प्रशिक्षण की शुरुआत कर दी है। यह कदम न सिर्फ राज्य की कानून व्यवस्था को नई ताकत देने वाला है, बल्कि प्रशिक्षण प्रणाली के प्रबंधन और संसाधन संयोजन के लिहाज से एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती भी है।

इतिहास में सबसे बड़ा बैच

इस बार बिहार पुलिस में कुल 21,391 सिपाहियों की नियुक्ति हुई है — जिनमें 10,207 पुरुष, 11,176 महिलाएं, और 8 परलैंगिक शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, पूर्व के 1,060 सिपाही, जिनका अब तक प्रशिक्षण नहीं हुआ था, उन्हें भी इस सत्र में शामिल किया गया है। इस तरह कुल प्रशिक्षुओं की संख्या 22,300 से अधिक हो गई है।

21 जुलाई से शुरू हुआ 9 माह का प्रशिक्षण कार्यक्रम

बुनियादी प्रशिक्षण 21 जुलाई 2025 से शुरू किया गया है और इसकी कुल अवधि 9 महीने होगी। प्रशिक्षण के इस बड़े कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए 33 जिलों, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (बि.वि.स.पु.) की 15 इकाइयों, और CAPF के सहयोग से व्यापक व्यवस्था की गई है।

प्रशिक्षण केन्द्रों की विशेष योजना

  • 33 जिलों को अस्थायी प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में अधिसूचित किया गया है।
  • बि.वि.स.पु. की 15 इकाइयों को पहले से ही 2023 में प्रशिक्षण केंद्र घोषित किया गया था।
  • जिला केन्द्रों में 8,965 पुरुष, बि.वि.स.पु. केन्द्रों में 10,499 महिला प्रशिक्षु प्रशिक्षण लेंगे।
  • CRPF की चंदौली और मोकामा इकाइयों में कुल 1,299 प्रशिक्षु (614 पुरुष, 685 महिला) का प्रशिक्षण होगा।
  • SSB के बगहा, बेतिया और सीतामढ़ी बटालियन में 628 पुरुष सिपाहियों का प्रशिक्षण होगा।

अनुदेशकों की तैनाती और पाठ्यक्रम में नवाचार

  • 490 अंतः अनुदेशक और 980 बाह्य अनुदेशक प्रशिक्षण में लगे हैं।
  • सभी अंतः अनुदेशकों को राजगीर स्थित बिहार पुलिस अकादमी में Orientation Training दिया गया है।
  • प्रशिक्षण भत्ता को 12% से बढ़ाकर 20% करने का प्रस्ताव भी भेजा गया है।

पाठ्यक्रम में तीन नए कानूनों की समावेशिता

वर्ष 2024 में लागू हुए तीन नए कानूनों (भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम) को प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में समाहित किया गया है। नया पाठ्यक्रम 1100 पृष्ठों से अधिक का है और इसे तीन भागों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक प्रशिक्षु को इसकी नि:शुल्क प्रति दी जा रही है।

मेस प्रबंधन में JEEVIKA की भागीदारी

प्रशिक्षण केन्द्रों में भोजन व्यवस्था की निगरानी और संचालन के लिए जीविका (JEEVIKA) के साथ समझौता किया गया है, जिससे भोजन की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

प्रशिक्षण बजट और प्रशासनिक प्रबंध

प्रत्येक प्रशिक्षण केन्द्र के लिए “Training Head” बजट मद सृजित किया गया है और आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि केंद्रों में अवसंरचना और प्रबंधन की कोई कमी न रहे।


विश्लेषण:

बिहार पुलिस के लिए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम एक प्रशासनिक और रणनीतिक मील का पत्थर साबित हो सकता है। न सिर्फ इसमें हजारों नवनियुक्त पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, बल्कि पहली बार परलैंगिक समुदाय के 8 सदस्य भी इस सेवा का हिस्सा बन रहे हैं, जो राज्य में समावेशिता की ओर बड़ा संकेत है।

इसके अलावा, नई न्याय प्रणाली और प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का समावेश यह दर्शाता है कि बिहार अब भविष्य की पुलिसिंग को लेकर गंभीर है और तकनीकी व विधिक समझ पर ज़ोर दे रहा है।


 

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