नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने दिया इस्तीफा, आर्मी चीफ ने कहा – ‘कुर्सी छोड़ने से सुधरेंगे हालात’

काठमांडू, 9 सितंबर 2025- नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधानमंत्री सचिवालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि ओली ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। देश में लगातार बिगड़ते हालात, विरोध प्रदर्शनों और सेना की सलाह के बाद यह कदम उठाया गया।


विरोध प्रदर्शनों ने बढ़ाई मुश्किलें

नेपाल में हाल ही में सोशल मीडिया ऐप्स पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर Gen-Z और युवा वर्ग सड़कों पर उतर आया था। विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन में घुसपैठ की और राष्ट्रपति आवास को आग के हवाले कर दिया। हालात को काबू में करने के लिए सेना को तैनात करना पड़ा।


आर्मी चीफ की सलाह

नेपाल आर्मी चीफ जनरल अशोक राज सिगडेल ने प्रधानमंत्री ओली को इस्तीफे की सलाह दी थी। उन्होंने साफ कहा था कि “देश की मौजूदा स्थिति केवल सत्ता परिवर्तन से सुधर सकती है।” सेना की इस टिप्पणी के बाद दबाव और बढ़ गया।


राष्ट्रपति ने स्वीकार किया इस्तीफा

राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने प्रधानमंत्री ओली का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इस्तीफे के बाद ओली सुरक्षा कारणों से नेपाली आर्मी की निगरानी में हैं।


ओली ने इस्तीफे में क्या लिखा?

प्रधानमंत्री ओली ने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में लिखा:
“माननीय राष्ट्रपति जी, नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 76 (2) के अनुसार 31 असद 2081 बी.एस. को प्रधानमंत्री नियुक्त होने के बाद तथा देश में वर्तमान असाधारण परिस्थिति को देखते हुए, मैं संविधान के अनुच्छेद 77 (1) (ए) के तहत आज से प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं, ताकि संविधान के अनुसार समस्याओं का राजनीतिक समाधान हो सके।”


ओली का राजनीतिक सफर

  • पहली बार प्रधानमंत्री: अक्टूबर 2015 से अगस्त 2016 तक रहे, लेकिन समर्थन खोने पर इस्तीफा दिया।
  • दूसरी बार: फरवरी 2018 से मई 2021 तक 3 साल 88 दिन पद पर रहे, फिर इस्तीफा देना पड़ा।
  • तीसरी बार: जुलाई 2024 से सितंबर 2025 तक प्रधानमंत्री पद पर रहे, लेकिन हालात बिगड़ने के बाद उन्हें तीसरी बार भी पद छोड़ना पड़ा।

आगे की राह

ओली के इस्तीफे के बाद नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता और गहराने की आशंका है। राष्ट्रपति पौडेल अब संविधान के तहत नया प्रधानमंत्री नियुक्त करेंगे। विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ दल के बागी गुटों के बीच राजनीतिक जोड़तोड़ तेज हो गया है।


 

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