नवादा का लाड़ला, तिरंगे में लिपटा घर लौटा: वायु सेना जवान संजय कुमार को नम आँखों से दी गई अंतिम विदाई; गूँजा— “संजय भैया अमर रहें”

नवादा/सिरदला | 02 मार्च, 2026: बिहार की माटी ने आज देश सेवा में समर्पित अपने एक और जांबाज सपूत को विदा कर दिया। नवादा जिले के सिरदला प्रखंड अंतर्गत लौंद चमोथा हाट निवासी और भारतीय वायु सेना के जवान संजय कुमार का पार्थिव शरीर जब उनके पैतृक गांव पहुँचा, तो हर आँख नम हो गई और हर जुबां पर बस एक ही नाम था। सोमवार को पूरे सैन्य सम्मान और “गार्ड ऑफ ऑनर” के साथ धनारजय नदी तट पर उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।

बीते 25 फरवरी को बिगड़ी थी तबीयत: छुट्टी पर आए थे घर

​वायु सेना के जांबाज जवान संजय कुमार (स्वर्गीय अनिल पंडित के पुत्र) के लिए नियति ने कुछ और ही लिख रखा था।

  • छुट्टी का सुख: वे बीते 18 फरवरी को खुशी-खुशी अपने परिवार के साथ समय बिताने छुट्टी पर घर आए थे।
  • अचानक तबीयत खराब: 25 फरवरी को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों ने उन्हें गया के निजी अस्पताल और फिर बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर कराया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

सैन्य सम्मान: बिहटा से पहुँची वायु सेना की टीम

​जवान संजय कुमार का पार्थिव शरीर जैसे ही तिरंगे में लिपटकर गांव पहुँचा, “भारत माता की जय” के नारों से पूरा आसमान गूँज उठा।

  • गार्ड ऑफ ऑर्नर: बिहटा एयरफोर्स स्टेशन से अधिकारियों और जवानों का दस्ता तीन गाड़ियों के काफिले के साथ पहुँचा।
  • अंतिम सलामी: बिगुल की मातमी धुन के बीच वायु सेना के जवानों ने अपने साथी को अंतिम विदाई दी और सैन्य परंपरा के अनुसार ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ प्रदान किया।

नदी तट पर अंतिम विदाई: परिवार को दी गई सहायता

​शहीद जवान का अंतिम संस्कार बड़गांव स्थित धनारजय नदी तट पर किया गया।

  1. शोक का माहौल: हजारों की संख्या में ग्रामीण और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस दुखद घड़ी में परिवार को ढांढस बंधाने पहुँचे।
  2. तात्कालिक सहायता: वायु सेना की टीम ने उनकी पत्नी सिंपी कुमारी को 25 हजार रुपये की तात्कालिक नकद सहायता राशि सौंपी और भविष्य में परिवार की हर संभव देखभाल का वचन दिया।
  3. पीछे छोड़ गए यादें: संजय कुमार अपने पीछे पत्नी, एक 13 वर्षीय पुत्र और एक 8 वर्षीय पुत्री को छोड़ गए हैं।

VOB का नजरिया: एक मिलनसार योद्धा का जाना

​संजय कुमार केवल एक सैनिक नहीं थे, बल्कि वे अपने गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत थे। 2004 में वायु सेना में भर्ती होने के बाद से उन्होंने हमेशा देश की सीमाओं की रक्षा की और बेंगलुरु में अपनी तैनाती के दौरान भी वे अपने गांव के विकास के लिए चिंतित रहते थे। नवादा ने आज अपना एक ‘ध्रुव तारा’ खो दिया है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ ईश्वर से प्रार्थना करता है कि शोकाकुल परिवार को यह अपार दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।

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