
नवादा, 20 मई 2026: बिहार के नवादा जिले से एक बेहद भावुक और दुखद खबर सामने आई है। ग्रामीण चिकित्सा और समाज सेवा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाले राष्ट्रपति सम्मानित चिकित्सक जगदीश शर्मा उर्फ नवल किशोर सिंह का निधन हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही नवादा समेत आसपास के कई जिलों में शोक की लहर दौड़ गई। वर्षों तक जड़ी-बूटी और पारंपरिक उपचार पद्धति से गरीबों का निःशुल्क इलाज करने वाले जगदीश शर्मा को लोग आज भी “गरीबों के वैद्य” के नाम से याद करते हैं।
बताया जा रहा है कि उन्होंने सोमवार को पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में अंतिम सांस ली। उनके निधन के बाद गांव से लेकर सामाजिक और चिकित्सा जगत तक शोक का माहौल है। बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
जड़ी-बूटी से करते थे निःशुल्क इलाज
नवादा जिले के पकरीबरावां प्रखंड स्थित डुमरावां गांव निवासी जगदीश शर्मा वर्षों से ग्रामीण चिकित्सा सेवा से जुड़े हुए थे। उन्होंने आधुनिक चिकित्सा संसाधनों से दूर ग्रामीण इलाकों में जड़ी-बूटी और पारंपरिक उपचार पद्धति के जरिए हजारों मरीजों का इलाज किया।
सबसे खास बात यह थी कि वे गरीब और जरूरतमंद लोगों से इलाज के बदले कोई शुल्क नहीं लेते थे। यही वजह थी कि दूर-दराज के गांवों से लोग उनके पास इलाज कराने पहुंचते थे।
ग्रामीणों का कहना है कि कई ऐसे मरीज थे, जिन्हें लंबे समय तक बीमारी से राहत नहीं मिली, लेकिन जगदीश शर्मा के उपचार के बाद उन्हें फायदा हुआ। इसी कारण उनकी पहचान धीरे-धीरे पूरे बिहार में फैल गई।
बिहार के कई जिलों में थी पहचान
जगदीश शर्मा सिर्फ नवादा तक सीमित नहीं थे। पटना, गया, मुजफ्फरपुर और आसपास के कई जिलों में उनके उपचार और सेवा कार्यों की चर्चा होती थी।
बताया जाता है कि अलग-अलग जगहों पर उनके क्लिनिक संचालित थे, जहां आज भी गरीब और जरूरतमंद मरीजों को सहायता मिलती है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के बीच उन्होंने लोगों के लिए उम्मीद की तरह काम किया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे सिर्फ चिकित्सक नहीं बल्कि समाजसेवी भी थे। जरूरतमंद परिवारों की आर्थिक मदद करना और बीमार लोगों की सहायता करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था।
राष्ट्रपति से मिला था सम्मान
ग्रामीण चिकित्सा और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए वर्ष 2012 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने उन्हें सम्मानित किया था।
यह सम्मान उनके वर्षों के समर्पण और सेवा भावना की पहचान माना गया। राष्ट्रपति सम्मान मिलने के बाद भी उनके व्यवहार और जीवनशैली में कोई बदलाव नहीं आया। वे पहले की तरह सादगी के साथ लोगों का इलाज करते रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि सम्मान मिलने के बाद भी उन्होंने कभी अपने काम का प्रचार नहीं किया। उनका उद्देश्य सिर्फ जरूरतमंद लोगों की सेवा करना था।
निधन की खबर से शोक की लहर
जैसे ही उनके निधन की खबर लोगों तक पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण, मरीज और सामाजिक कार्यकर्ता उनके घर पहुंचने लगे।
कई लोगों की आंखें नम थीं। ग्रामीणों का कहना था कि उन्होंने केवल एक चिकित्सक नहीं बल्कि समाज के अभिभावक को खो दिया है।
सोशल मीडिया पर भी लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। कई लोगों ने उनके साथ बिताए अनुभव साझा किए और बताया कि किस तरह उन्होंने कठिन समय में लोगों की मदद की।
गरीबों के बीच थे बेहद लोकप्रिय
जगदीश शर्मा की सबसे बड़ी पहचान गरीबों और जरूरतमंदों के बीच उनकी लोकप्रियता थी। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के बीच वे लोगों के लिए बड़ी राहत बने।
कई मरीज ऐसे भी थे जो आर्थिक तंगी के कारण बड़े अस्पतालों में इलाज नहीं करा सकते थे। ऐसे लोगों के लिए जगदीश शर्मा उम्मीद की किरण साबित होते थे।
ग्रामीणों का कहना है कि वे मरीजों का इलाज सिर्फ दवा से नहीं बल्कि आत्मीय व्यवहार से भी करते थे। यही कारण था कि लोग उन पर आंख बंद कर भरोसा करते थे।
परिवार में शोक का माहौल
परिजनों के अनुसार जगदीश शर्मा अपने पीछे बड़ा परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिवार में छह बेटियां और दो बेटे हैं। इनमें पांच बेटियों की शादी हो चुकी है, जबकि दो बेटे और एक बेटी अभी अविवाहित हैं।
उनके निधन के बाद परिवार में गहरा दुख है। घर पर लगातार लोगों का आना-जाना लगा हुआ है। रिश्तेदारों और शुभचिंतकों की भीड़ परिवार को सांत्वना देने पहुंच रही है।
सामाजिक और चिकित्सा जगत ने जताया दुख
जगदीश शर्मा के निधन पर सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने गहरा दुख व्यक्त किया है।
कई लोगों ने कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों और असहाय लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया। उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणा है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि आज के दौर में जहां चिकित्सा सेवा महंगी होती जा रही है, वहां जगदीश शर्मा जैसे लोग मानवता की मिसाल बनकर सामने आए।
ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर चर्चा
उनके निधन के बाद एक बार फिर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी है।
ऐसे में कई पारंपरिक चिकित्सक और समाजसेवी लोगों के लिए सहारा बनते हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि पारंपरिक चिकित्सा के साथ आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार भी जरूरी है।
लोगों की यादों में हमेशा जिंदा रहेंगे जगदीश शर्मा
जगदीश शर्मा भले ही इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनके द्वारा किए गए सेवा कार्यों को लोग लंबे समय तक याद रखेंगे। हजारों मरीजों और गरीब परिवारों के लिए उन्होंने जो काम किया, वह उन्हें हमेशा खास बनाए रखेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने सिर्फ इलाज नहीं किया बल्कि लोगों को जीने की उम्मीद दी। यही वजह है कि उनके निधन को लोग समाज की बड़ी क्षति मान रहे हैं।


