बिहार में अगले 4 दिन ‘कुदरत का इम्तिहान’! 15-18 मार्च तक भारी बारिश और ठनका का येलो अलर्ट; 50 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

HIGHLIGHTS:

  • मौसम का मिजाज: 15 से 18 मार्च तक बिहार के अधिकांश जिलों में तेज हवा, गर्जन और बारिश की चेतावनी।
  • बड़ा खतरा: 16 मार्च को पूरे बिहार में येलो अलर्ट; ठनका (Vajrapat) गिरने की प्रबल संभावना।
  • वजह: पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और बंगाल की खाड़ी की नमी का ‘डेंजरस कॉकटेल’।
  • अलर्ट: किसानों के लिए मुश्किल घड़ी; खेतों में खड़ी फसल को पहुंच सकता है भारी नुकसान।

धूप गायब, बादलों का डेरा: बिहार में ‘मार्च’ में ‘मानसून’ जैसा अहसास!

पटना: बिहार में गर्मी की दस्तक के बीच मौसम ने अचानक यू-टर्न ले लिया है। अगर आप कल यानी 15 मार्च को किसी जरूरी काम से बाहर निकलने वाले हैं, तो यह रिपोर्ट आपके लिए ‘लाइफसेवर’ साबित हो सकती है। पटना मौसम विज्ञान केंद्र ने अगले 96 घंटों के लिए राज्य के अलग-अलग हिस्सों में येलो अलर्ट जारी कर दिया है। 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं न केवल आपके सफर में खलल डालेंगी, बल्कि बिजली आपूर्ति को भी ठप कर सकती हैं।

[येलो अलर्ट डायरी: 15 मार्च को किन जिलों में रहेगी आफत?]

​इन जिलों के लोग विशेष सावधानी बरतें, क्योंकि यहाँ हल्की से मध्यम बारिश के साथ वज्रपात का खतरा है:

क्षेत्र

जिले

उत्तर बिहार

पूर्वी व पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा।

कोसी-सीमांचल

सुपौल, अररिया, किशनगंज, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा।

पूर्वी बिहार

भागलपुर, मुंगेर, बांका, खगड़िया, जमुई।

सारण प्रमंडल

गोपालगंज, सिवान, सारण, वैशाली।

क्यों बदला मौसम का मिजाज? वैज्ञानिकों की जुबानी

​मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह बदलाव दो मौसमी प्रणालियों के आपस में टकराने का नतीजा है:

  1. पश्चिमी विक्षोभ: उत्तर भारत से आ रही ठंडी हवाएं बादलों का निर्माण कर रही हैं।
  2. नमी का प्रवाह: बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाएं स्थानीय गर्मी के साथ मिलकर ‘थंडरस्टॉर्म’ (गरज वाले बादल) बना रही हैं।
  3. नतीजा: यही वजह है कि राजधानी पटना समेत कई जिलों में धूप बेअसर है और ठंडी हवाओं ने डेरा डाल रखा है।

अन्नदाता पर ‘कुदरत की मार’: फसलों पर मंडराया संकट

​यह मौसम उन किसानों के लिए ‘काल’ बनकर आया है जिनकी फसलें पकने को तैयार हैं या खेतों में कटी पड़ी हैं।

    • नुकसान: तेज आंधी और बारिश से गेहूं, दलहन और सरसों की फसलों को गंभीर नुकसान हो सकता है।
    • सावधानी: कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर ढककर रखें और कीटनाशकों का छिड़काव अभी रोक दें।

VOB का नजरिया: सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है!

मार्च के महीने में इस तरह का बदलाव जलवायु परिवर्तन की ओर भी इशारा करता है। 50 किलोमीटर की रफ्तार वाली हवाएं और ‘ठनका’ जानलेवा हो सकते हैं। हमारी अपील है कि जब आसमान में बिजली कड़क रही हो, तो पक्के मकानों की शरण लें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने की गलती बिल्कुल न करें। खासकर उत्तर और पूर्वी बिहार के हमारे भाई-बहन 16 मार्च को विशेष सावधानी बरतें, क्योंकि उस दिन पूरा सूबा ‘येलो जोन’ में होगा।

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