बिहार में कुदरत का ‘ब्लैकआउट’! आंधी-बारिश ने ली 4 की जान, 12 मजदूर झुलसे; आज 16 जिलों में ‘महा-अलर्ट’

HIGHLIGHTS: आसमान से बरसी आफत; फसलों पर प्रहार और सिस्टम की लाचारी

  • बड़ी त्रासदी: राज्य के 13 जिलों में भारी तबाही; ठनका (वज्रपात) और दीवार गिरने से 4 लोगों की मौत।
  • मोकामा में हड़कंप: खेत में काम कर रहे 12 मजदूर बिजली गिरने से झुलसे; अस्पताल में इलाज जारी।
  • आज का ऑरेंज अलर्ट: कटिहार, किशनगंज और अररिया में 50-60 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं।
  • भागलपुर की ‘कीचड़’ पॉलिटिक्स: नगर निगम की लापरवाही से सड़कों पर फैला नाले का गाद; बारिश के बाद नर्क बना जनजीवन।

पटना/भागलपुर | 21 मार्च, 2026

​बिहार में पिछले 24 घंटों के दौरान प्रकृति ने अपना सबसे रौद्र रूप दिखाया है। एक तरफ जहां भीषण गर्मी से तप रहे लोगों को बारिश ने राहत दी, वहीं दूसरी तरफ आंधी और बिजली ने कई परिवारों के चिराग बुझा दिए। राजधानी पटना समेत राज्य के 13 जिले शुक्रवार को ‘कुदरत के निशाने’ पर रहे। लेकिन सबसे शर्मनाक स्थिति भागलपुर की रही, जहां बारिश से पहले की ‘तैयारी’ के दावों की पोल सड़कों पर बिखरे मलबे ने खोल दी।

शनिवार का ‘वेदर चार्ट’: सावधान रहें, सुरक्षित रहें!

​मौसम विभाग ने आज 16 जिलों में बारिश और धूल भरी आंधी का अलर्ट जारी किया है।

क्षेत्र

अलर्ट का प्रकार

हवा की रफ्तार

संभावित जिले

सीमांचल

ऑरेंज अलर्ट

50 – 60 किमी/घंटा

कटिहार, किशनगंज, अररिया

मध्य व दक्षिण बिहार

येलो अलर्ट

40 – 50 किमी/घंटा

पटना, गया, नवादा, बेगूसराय, बांका

कोसी क्षेत्र

बारिश के आसार

गर्जना के साथ बौछारें

मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया, सुपौल

भागलपुर स्पेशल: तपिश के बाद बारिश, फिर ‘कीचड़’ का हमला

​भागलपुर में शुक्रवार को मौसम किसी ‘सस्पेंस थ्रिलर’ जैसा रहा।

  • तापमान: अधिकतम 32.7 डिग्री और न्यूनतम 21.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
  • शाम का मंजर: करीब 6:15 बजे 30 किमी की रफ्तार से चली धूल भरी आंधी ने शहर को ढंक लिया।
  • सबौर वैज्ञानिक की सलाह: डॉ. बीरेंद्र कुमार के अनुसार, आज भी तापमान में 1 से 2 डिग्री की गिरावट आएगी और धूल भरी आंधी के साथ हल्की बारिश होगी।

VOB का नजरिया: नगर निगम की ‘गाद’ ने डुबोई साख!

​भागलपुर में जो हुआ वह केवल ‘प्राकृतिक आपदा’ नहीं, बल्कि ‘प्रशासनिक विफलता’ है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि नगर निगम की लापरवाही ने बारिश की राहत को आफत में बदल दिया।

​मिरजानहाट मुख्य मार्ग और सिकंदरपुर जाने वाली सड़क पर नाले से निकाला गया गाद (Silt) सड़क पर ही छोड़ देना ‘गुनाह’ है। जब मौसम विभाग पहले से अलर्ट दे रहा था, तो इस मलबे को तुरंत क्यों नहीं हटाया गया? बारिश होते ही यह गाद कीचड़ में बदल गया, जिससे दक्षिणी क्षेत्र के हजारों लोग सड़क पर फिसलने को मजबूर हैं। यह ‘Ease of Living’ नहीं, बल्कि ‘Ease of Suffering’ है। प्रशासन को चाहिए कि आपदा के वक्त केवल ऑफिस में न बैठें, बल्कि सड़कों से यह मौत का कीचड़ साफ करवाएं।

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