पूर्वी चम्पारण में राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल का असर, 3 हजार करोड़ का कारोबार ठप

मोतिहारी। राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल के चलते मंगलवार को बिहार के पूर्वी चम्पारण जिले में बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह से ठप रही। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, ग्रामीण बैंक और सहकारिता बैंकों की सभी शाखाओं पर ताले लटके रहे, जिससे आम ग्राहकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। नकद निकासी, लोन भुगतान और अन्य बैंकिंग लेन-देन पूरी तरह बाधित रहे। कुछ जगहों पर निजी बैंकों पर भी हड़ताल का आंशिक असर देखने को मिला।

तीन दिनों से बैंक बंद, एटीएम हुए खाली

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के आह्वान पर चली इस हड़ताल से जिले में करीब 3 हजार करोड़ रुपये के बैंकिंग कारोबार पर असर पड़ा है। लगातार तीन दिनों से बैंक अवकाश रहने के कारण अधिकांश एटीएम खाली हो गए हैं, जिससे लोग निजी बैंकों के एटीएम का सहारा लेने को मजबूर हैं।

“हड़ताल से जिले में लगभग 3 हजार करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। तीन दिनों से लगातार बैंक बंद रहने के कारण एटीएम से नकद निकासी बढ़ गई, जिससे अधिकांश एटीएम खाली हो गए।”
डीएन त्रिवेदी, जिला संयोजक, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स

मोतिहारी में बैंक कर्मियों की रैली

मोतिहारी शहर में हड़ताली बैंक कर्मियों ने स्टेट बैंक की बाजार शाखा से रैली निकाली। यह रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए ग्रामीण बैंक की ज्ञानवाबू चौक शाखा पहुंची, जहां जोरदार प्रदर्शन किया गया। बैंक कर्मियों ने नारेबाजी करते हुए पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग दोहराई। रैली और धरना प्रदर्शन में महिला कर्मचारियों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही।

पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग

यूनियन नेताओं का कहना है कि रिजर्व बैंक, नाबार्ड, एलआईसी, जीआईसी, स्टॉक एक्सचेंज और वित्त मंत्रालय में हर शनिवार अवकाश रहता है, जबकि बैंकों में यह व्यवस्था लागू नहीं है। इसी भेदभाव के खिलाफ बैंक कर्मचारी हड़ताल पर हैं।

“पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू किया जाए, अन्यथा आंदोलन जारी रहेगा।”
डीएन त्रिवेदी

किसान, व्यापारी और उद्यमी सबसे ज्यादा प्रभावित

पूर्वी चम्पारण जैसे कृषि प्रधान जिले में बैंकिंग व्यवस्था खेती, किसान क्रेडिट कार्ड और सरकारी योजनाओं से जुड़ी है। हड़ताल के कारण किसानों को फसल बिक्री का भुगतान नहीं मिल सका, व्यापारियों का लेन-देन रुका रहा और छोटे उद्यमियों को नुकसान उठाना पड़ा।

जिले में 200 से अधिक बैंक शाखाएं हैं, जिनमें करीब 80 प्रतिशत सरकारी बैंक हैं। मंगलवार को सरकारी बैंकों की सभी शाखाएं बंद रहीं। निजी बैंक जैसे एक्सिस और आईसीआईसीआई की कुछ शाखाओं में सीमित काम हुआ, लेकिन वहां ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ी।

महिलाओं की मजबूत भागीदारी

रैली का नेतृत्व स्टेट बैंक के विकास कुमार रंजन, अनिकेत कुमार और भारत भूषण ने किया। यूको बैंक, पीएनबी, ग्रामीण बैंक और सेंट्रल बैंक के कर्मियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। महिला बैंक कर्मियों में सागरिका स्नेहिल, कल्पना कल्याणी, श्वेता साहू, संयोगिता कुमारी और मुशरत प्रवीण ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

अर्थव्यवस्था पर पड़ा गहरा असर

हड़ताल का असर जिले की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा। मोतिहारी, ढाका, चकिया और सीवान रोड के बाजारों में व्यापार प्रभावित रहा। जिला उद्योग केंद्र के अनुसार, छोटे उद्यमियों को 500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। एटीएम खाली होने से लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भटकते नजर आए।

एक ग्राहक ने बताया,
“तीन दिन से पैसे नहीं निकाल पा रहे हैं। निजी एटीएम पर प्रति हजार रुपये पर 50 रुपये चार्ज देना पड़ रहा है।”

देशभर में 10 लाख से अधिक कर्मियों की हड़ताल

ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉयी एसोसिएशन के अनुसार, देशभर में करीब 10 लाख बैंक कर्मियों ने हड़ताल में हिस्सा लिया। यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा। जिला प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है और लोगों से डिजिटल बैंकिंग का उपयोग करने को कहा गया है, हालांकि ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है।


 

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