गंगा कटाव से जूझ रहे सबौर क्षेत्र में पहुंचे विधायक मिथुन यादव, स्थायी समाधान का दिया भरोसा

भागलपुर। भागलपुर जिले के सबौर प्रखंड में गंगा कटाव की बढ़ती समस्या को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। ममलखा, मसाढ़ू और शंकरपुर समेत कई गांवों में गंगा का कटाव तेजी से बढ़ने के कारण लोगों के घर, खेत और सड़कें खतरे के दायरे में आ गई हैं। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए नाथनगर विधायक ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर कटाव स्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध कार्य सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

विधायक के निरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे। लोगों ने कटाव की समस्या और उससे हो रही परेशानियों को विधायक के सामने रखा। ग्रामीणों का कहना था कि हर वर्ष गंगा का कटाव गांवों के लिए बड़ी मुसीबत बनकर सामने आता है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाने के कारण लोग लगातार भय के साये में जीने को मजबूर हैं।

निरीक्षण के दौरान विधायक ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से चल रहे कटाव निरोधक कार्यों की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि अब तक कितने हिस्से में कार्य पूरा हुआ है और किन क्षेत्रों में अभी काम बाकी है। साथ ही उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया।

विधायक मिथुन कुमार यादव ने कहा कि क्षेत्र की जनता की सुरक्षा सरकार और जनप्रतिनिधियों की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि गंगा कटाव केवल जमीन या संपत्ति का नुकसान नहीं करता बल्कि लोगों की पूरी जिंदगी को प्रभावित कर देता है। कई परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ता है और खेती योग्य जमीन भी नदी में समा जाती है।

उन्होंने कहा कि इलाके में कटाव की समस्या लंबे समय से बनी हुई है और इसका स्थायी समाधान निकालने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विधायक ने भरोसा दिलाया कि वर्तमान में जो कटाव निरोधक कार्य चल रहा है, उसके पूरा होने के बाद लोगों को काफी राहत मिलेगी और गांवों की सुरक्षा मजबूत होगी।

स्थानीय लोगों ने विधायक के सामने यह भी शिकायत रखी कि कई बार कटाव निरोधक कार्यों में गुणवत्ता की कमी देखने को मिलती है, जिसके कारण कुछ समय बाद स्थिति फिर खराब हो जाती है। इस पर विधायक ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा तय समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से कार्य पूरा करना अनिवार्य है।

गंगा किनारे बसे गांवों के लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में स्थिति और अधिक भयावह हो जाती है। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ कटाव तेजी से होने लगता है, जिससे खेत और आबादी दोनों खतरे में पड़ जाते हैं। कई परिवारों को हर साल अपना घर बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

विशेषज्ञों के अनुसार गंगा कटाव बिहार के कई जिलों में बड़ी समस्या बन चुका है। खासकर भागलपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में नदी की धारा लगातार बदलती रहती है, जिसके कारण कटाव की घटनाएं बढ़ जाती हैं। यदि समय पर प्रभावी रोकथाम नहीं की जाए तो बड़े पैमाने पर भूमि क्षरण और विस्थापन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

निरीक्षण के दौरान सबौर उत्तरी के जिला परिषद सदस्य ने भी ग्रामीणों से बातचीत की। उन्होंने स्थानीय लोगों को कटाव निरोधक कार्य की निगरानी के लिए एक समिति बनाने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि यदि ग्रामीण स्वयं निगरानी करेंगे तो कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

जिला परिषद सदस्य ने कहा कि विकास और सुरक्षा से जुड़े कार्यों में स्थानीय लोगों की भागीदारी बेहद जरूरी है। इससे प्रशासन और जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है तथा किसी भी गड़बड़ी की जानकारी तुरंत सामने आ सकती है।

ग्रामीणों ने भी निगरानी समिति बनाने के सुझाव का स्वागत किया। लोगों का कहना है कि यदि उन्हें कार्य की निगरानी में शामिल किया जाता है तो वे निर्माण की गुणवत्ता पर नजर रख सकेंगे और समय पर अपनी समस्याएं भी प्रशासन तक पहुंचा पाएंगे।

कार्यक्रम के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने गंगा कटाव से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की। लोगों ने बताया कि कटाव के कारण कई किसानों की उपजाऊ जमीन नदी में समा चुकी है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है। कई परिवारों के सामने आजीविका का संकट भी खड़ा हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कटाव निरोधक कार्य केवल अस्थायी उपायों तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके लिए दीर्घकालिक योजना, वैज्ञानिक अध्ययन और नियमित मॉनिटरिंग की आवश्यकता होती है। नदी की धारा, मिट्टी की संरचना और जल प्रवाह को ध्यान में रखते हुए तकनीकी समाधान विकसित किए जाने चाहिए।

निरीक्षण के दौरान उपमुखिया , उपसरपंच , , , , और सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विधायक और जिला परिषद सदस्य के इस संयुक्त प्रयास से उनमें नई उम्मीद जगी है। लोगों को उम्मीद है कि इस बार कटाव की समस्या का प्रभावी समाधान निकलेगा और उन्हें हर साल आने वाले खतरे से राहत मिलेगी।

फिलहाल प्रशासन और विभागीय अधिकारी कटाव निरोधक कार्य को तेजी से पूरा करने में जुटे हुए हैं। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि घोषित योजनाएं जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती हैं और गंगा कटाव से प्रभावित गांवों को कितनी राहत मिलती है।

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