
भागलपुर। नाथनगर प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित ट्राइसम भवन में बाढ़ अनुश्रवण समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में संभावित बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारियों, प्रभावित लोगों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं और राहत सामग्री की व्यवस्था सहित कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान बाढ़ पीड़ितों को दी जाने वाली जीआर राशि की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी का मामला भी प्रमुखता से उठा। विभिन्न पंचायतों के जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि जीआर राशि की इंट्री के दौरान पात्र लाभुकों को कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है और कुछ योग्य लोगों का नाम लाभार्थियों की सूची से छूट जाने की शिकायत सामने आती है।
बैठक की अध्यक्षता नाथनगर प्रखंड प्रमुख दुर्गा दयाल ने की। बैठक शुरू होने से पहले नाथनगर के नवपदस्थापित अंचल अधिकारी मनोहर कुमार का जनप्रतिनिधियों की ओर से स्वागत किया गया। जनप्रतिनिधियों ने उन्हें अंग वस्त्र पहनाकर अभिनंदन किया और प्रखंड में नई जिम्मेदारी संभालने पर शुभकामनाएं दीं। इसके बाद समिति की बैठक में संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए की जा रही प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा की गई।
बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं और बाढ़ की संभावित स्थिति को लेकर प्रशासन का ध्यान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की ओर आकर्षित किया। नाथनगर प्रखंड के कई इलाके हर वर्ष बाढ़ की स्थिति से प्रभावित होते हैं। ऐसे में बाढ़ आने से पहले ही नाव, खाद्य सामग्री, सूखा राशन, टेंट और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को तैयार रखना आवश्यक माना जाता है। अधिकारियों ने बताया कि इस दिशा में आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और संबंधित विभागों एवं एजेंसियों को जरूरी निर्देश दिए जा चुके हैं।
अंचल अधिकारी मनोहर कुमार ने बैठक में जानकारी दी कि अगले सप्ताह से प्रखंड के सभी बाढ़ संभावित क्षेत्रों का स्थल निरीक्षण किया जाएगा। इस निरीक्षण में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को बेहतर तरीके से समझा जा सके। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, वहां तक पहुंचने के रास्ते, नावों की उपलब्धता और राहत व्यवस्था को लेकर जमीनी स्तर पर जानकारी जुटाना जरूरी है। इसके आधार पर बाढ़ के समय राहत एवं बचाव कार्य को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
सीओ ने बताया कि संभावित बाढ़ को देखते हुए नावों की सूची तैयार कर ली गई है। बाढ़ की स्थिति में जिन इलाकों में सड़क या अन्य मार्गों से आवागमन प्रभावित हो सकता है, वहां लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए नावों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। प्रशासन की ओर से उपलब्ध नावों और नाविकों की जानकारी एकत्रित की जा चुकी है, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल उनका इस्तेमाल किया जा सके।
बैठक में राहत सामग्री की व्यवस्था को लेकर भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि सूखा राशन और खाद्य सामग्री के वितरण के लिए निविदा प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा बाढ़ की स्थिति में राहत शिविरों या अन्य आवश्यक स्थानों पर टेंट और पंडाल की व्यवस्था करने वाले संबंधित लोगों को भी जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन की कोशिश है कि जरूरत पड़ने पर राहत शिविरों और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को बिना किसी देरी के शुरू किया जा सके।
नाविकों के बकाया भुगतान का मुद्दा भी बैठक के दौरान सामने आया। इस पर अंचल अधिकारी मनोहर कुमार ने बताया कि बकाया राशि के भुगतान के लिए अधियाचना भेजी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि आवंटन प्राप्त होते ही भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, अगले दो से चार दिनों में आवंटन प्राप्त होने की उम्मीद है, जिसके बाद संबंधित नाविकों के बकाया भुगतान की कार्रवाई पूरी की जाएगी।
बैठक के दौरान सबसे अधिक चर्चा जीआर राशि को लेकर हुई। प्रखंड की नौ पंचायतों के जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि बाढ़ पीड़ितों को मिलने वाली जीआर राशि की इंट्री प्रक्रिया में ऑपरेटरों के स्तर पर गड़बड़ी की शिकायतें सामने आती रही हैं। जनप्रतिनिधियों का कहना था कि कई ऐसे परिवार हैं, जो बाढ़ से प्रभावित होने के बावजूद राहत राशि के पात्र होते हैं, लेकिन किसी कारणवश उनका नाम या विवरण सही तरीके से दर्ज नहीं हो पाता। इससे पात्र लाभुक सरकारी सहायता से वंचित हो सकते हैं।
राघोपुर, भतोड़िया, भुवालपुर, शंकरपुर, बैरिया, गोसाईंदासपुर, रन्नुचक सहित नौ पंचायतों के प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया। उनका कहना था कि बाढ़ जैसी आपदा की स्थिति में प्रभावित परिवारों को सरकारी सहायता समय पर मिलना बेहद जरूरी है। यदि लाभार्थियों की इंट्री या सत्यापन की प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी होती है, तो उसका सीधा असर जरूरतमंद परिवारों पर पड़ता है। इसलिए पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है।
जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए अंचल अधिकारी मनोहर कुमार ने जीआर राशि की इंट्री प्रक्रिया को लेकर नई व्यवस्था की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नौ पंचायतों के लिए अलग-अलग काउंटर बनाए जाएंगे। इससे प्रत्येक पंचायत के लाभार्थियों की इंट्री और संबंधित प्रक्रिया को अलग-अलग तरीके से व्यवस्थित किया जा सकेगा। अलग काउंटर होने से भीड़ को नियंत्रित करने और लाभुकों की प्रक्रिया को सुचारु तरीके से पूरा कराने में भी मदद मिलेगी।
सीओ ने स्पष्ट किया कि जीआर राशि से जुड़ी इंट्री की पूरी प्रक्रिया उनकी सीधी निगरानी में कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए काउंटरों और संबंधित गतिविधियों की सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लाभार्थियों की इंट्री में किसी तरह की अनियमितता की गुंजाइश न रहे और पात्र लोगों को सरकारी सहायता प्राप्त करने में परेशानी न हो।
अधिकारी के इस आश्वासन के बाद बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि नई व्यवस्था से जीआर राशि की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित हो सकेगी। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि बाढ़ के दौरान प्रभावित परिवारों को राहत उपलब्ध कराने में प्रशासन के साथ पंचायत स्तर के प्रतिनिधियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए ही राहत कार्यों को प्रभावी बनाया जा सकता है।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि संभावित बाढ़ को लेकर प्रशासनिक तैयारी केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि समय रहते सभी जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। नाव, नाविक, खाद्य सामग्री, सूखा राशन, राहत शिविर और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता की नियमित समीक्षा की जानी चाहिए। इससे बाढ़ आने की स्थिति में तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सकेगा।
अंचल अधिकारी ने कहा कि बाढ़ संभावित क्षेत्रों के स्थल निरीक्षण के दौरान स्थानीय समस्याओं को भी समझने का प्रयास किया जाएगा। जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में होने वाले निरीक्षण से उन स्थानों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जहां बाढ़ के दौरान लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसके आधार पर राहत एवं बचाव की रणनीति को बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकेगा।
बैठक में प्रखंड प्रमुख, पंचायत समिति सदस्य, विभिन्न पंचायतों के मुखिया और प्रखंड कार्यालय के कर्मी मौजूद रहे। सभी ने संभावित बाढ़ की स्थिति में लोगों को समय पर राहत उपलब्ध कराने और सरकारी योजनाओं का लाभ सही पात्र परिवारों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
कुल मिलाकर, नाथनगर में आयोजित बाढ़ अनुश्रवण समिति की बैठक में एक ओर जहां संभावित बाढ़ से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की गई, वहीं दूसरी ओर जीआर राशि की इंट्री में कथित गड़बड़ी का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। जनप्रतिनिधियों की शिकायत के बाद सीओ ने नौ पंचायतों के लिए अलग-अलग काउंटर और सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था का भरोसा दिया है। अब प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर नजर रहेगी कि नई व्यवस्था के तहत बाढ़ प्रभावित और पात्र परिवारों को राहत राशि का लाभ कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ मिल पाता है।


