
नालंदा | 22 फरवरी, 2026: बिहार का नालंदा जिला एक बार फिर साइबर अपराध के एक घिनौने और शातिर चेहरे के कारण चर्चा में है। कतरीसराय थाना पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो ‘हनीट्रैप’ और ‘प्रेग्नेंट जॉब’ जैसे विज्ञापनों के जरिए मासूम लोगों की भावनाओं और लालच का फायदा उठाकर लाखों रुपये ऐंठ रहा था। पुलिस ने छापेमारी कर एक नाबालिग सहित कुल 6 अपराधियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
“ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब”: लालच और अश्लीलता का घातक कॉकटेल
पुलिस जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। यह गिरोह फेसबुक पर “ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब” नाम से फर्जी पेज चलाता था।
- मोडस ऑपेरंडी: पेज पर महिलाओं के आकर्षक वीडियो और फोटो डालकर यह दावा किया जाता था कि ‘प्रेग्नेंट’ करने पर पुरुषों को भारी धनराशि मिलेगी।
- वसूली का तरीका: चयन के नाम पर पहले रजिस्ट्रेशन फीस ली जाती थी। इसके बाद शातिर अपराधी सिक्योरिटी फीस, सर्विस टैक्स और जीएसटी के नाम पर 5,000 से 20,000 रुपये तक की चपत लगाते थे। एक बार पैसा मिलने के बाद अपराधी मोबाइल नंबर ब्लॉक कर देते थे।
सस्ते लोन का झांसा: दूसरा जाल
सिर्फ ‘हनीट्रैप’ ही नहीं, यह गिरोह आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों को भी निशाना बना रहा था।
- फर्जी फाइनेंस कंपनियां: आरोपियों के फोन से धनी फाइनेंस और मुद्रा फाइनेंस जैसी बड़ी कंपनियों के नाम पर फर्जी विज्ञापन मिले हैं।
- प्रोसेसिंग फीस की लूट: सस्ते ब्याज दर पर लोन दिलाने का वादा कर ये लोग ‘प्रोसेसिंग फीस’ के नाम पर ठगी करते थे।
खेतों (चंवर) में चल रहा था ‘कंट्रोल रूम’
इस गिरोह की कार्यशैली बिल्कुल किसी कॉर्पोरेट ऑफिस जैसी थी, लेकिन इनका ठिकाना था कतरीसराय के सुंदरपुर और बरीठ गांव के बीच के सुनसान खेत (चंवर)।
- छापेमारी: गुप्त सूचना पर जब पुलिस ने दबिश दी, तो अपराधी झुंड बनाकर मोबाइल पर शिकार फंसाते मिले। पुलिस को देखते ही वे भागने लगे, लेकिन पुलिस ने घेराबंदी कर उन्हें दबोच लिया।
- बरामदगी: मौके से कई स्मार्टफोन जब्त किए गए हैं, जिनमें ठगी के ऑडियो और चैट्स भरे पड़े हैं।
पुलिस की कार्रवाई: ‘प्रतिबिंब’ पर चढ़े नंबर
राजगीर के डीएसपी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि गिरफ्तार 5 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है, जबकि एक नाबालिग को बाल सुधार गृह भेजा गया है।
- तकनीकी ट्रैकिंग: आरोपियों के मोबाइल नंबरों को ‘प्रतिबिंब पोर्टल’ पर अपलोड किया गया है ताकि देशभर में इनके खिलाफ दर्ज अन्य मामलों का पता लगाया जा सके।
- नेटवर्क की जांच: CCTNS (अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम) के जरिए इनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।


