बिहार डेस्क | 22 फरवरी, 2026: बिहार के नालंदा से एक ऐसी खबर आई है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। सरमेरा इलाके में चल रहे ‘काजल ऑर्केस्ट्रा’ पर जब दिल्ली और स्थानीय पुलिस की टीम ने धावा बोला, तो वहां का नजारा देख अधिकारियों के भी होश उड़ गए। ऑर्केस्ट्रा की चमक-धमक के पीछे 13 नाबालिग बच्चियों को बंधक बनाकर रखा गया था, जिन्हें रविवार को कड़ी मशक्कत के बाद रेस्क्यू किया गया।
यूपी से जुड़े हैं तार: सोनभद्र की रहने वाली हैं सभी बच्चियाँ
जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि रेस्क्यू की गई सभी 13 लड़कियां और इस काले धंधे को चलाने वाले संचालक मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सोनभद्र (रॉबर्ट्सगंज) के रहने वाले हैं। ऑर्केस्ट्रा की आड़ में इन बच्चियों से जबरन काम कराया जा रहा था और उन्हें नरक जैसी जिंदगी जीने पर मजबूर किया गया था।
दिल्ली से पटना तक मची थी हलचल, तब हुआ एक्शन
यह कोई साधारण छापेमारी नहीं थी। इसके तार सीधे दिल्ली और पटना के आला अधिकारियों से जुड़े थे:
- बड़ा निर्देश: राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो और पटना सीआईडी (कमजोर वर्ग) के एडीजी अमित कुमार जैन के सीधे आदेश पर यह मिशन शुरू हुआ।
- संयुक्त ऑपरेशन: इस मिशन में दिल्ली के ‘रेस्क्यू फाउंडेशन’, ‘मिशन मुक्ति फाउंडेशन’ और पश्चिम बंगाल की टीमों ने स्थानीय सरमेरा थाना और महिला थाना पुलिस के साथ मिलकर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसी कार्रवाई की।
संचालकों की खैर नहीं: महिला समेत दो हिरासत में
पुलिस ने मौके से एक महिला और एक पुरुष संचालक को धर दबोचा है। इनके खिलाफ सरमेरा थाने में मानव तस्करी और बाल श्रम जैसी संगीन धाराओं के तहत FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब यह खंगाल रही है कि इस बड़े रैकेट के तार बिहार और यूपी में और कहां-कहां फैले हैं।
अब क्या होगा बच्चियों का?
- मेडिकल चेकअप: सभी 13 बच्चियों को फिलहाल सुरक्षा घेरे में रखा गया है और उनका मेडिकल कराया जा रहा है।
- घर वापसी: मेडिकल के बाद उन्हें जिला बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने पेश किया जाएगा, जहाँ से उनके सुरक्षित पुनर्वास और यूपी में उनके घर वापसी की प्रक्रिया शुरू होगी।


