पटना/मुजफ्फरपुर | 27 फरवरी, 2026: बिहार पुलिस मुख्यालय ने अनुशासनहीनता और प्रशासनिक शिथिलता के खिलाफ अपना रुख और कड़ा कर दिया है। मुजफ्फरपुर जिला बल में तैनात पुलिस अवर निरीक्षक (परिचारी) कन्हैया कुमार का शिवहर तबादला केवल एक रूटीन प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक ‘सजा’ के तौर पर देखा जा रहा है। स्थानांतरण आदेश में शामिल एक “विशेष टिप्पणी” ने पूरे महकमे में हलचल मचा दी है।
तबादला आदेश की वह ‘दुर्लभ’ लाइन
आमतौर पर पुलिस विभाग में तबादले ‘प्रशासनिक दृष्टिकोण’ से होते हैं, लेकिन 25 फरवरी 2026 को जारी कन्हैया कुमार के स्थानांतरण आदेश ने सबको चौंका दिया। पुलिस उप-महानिरीक्षक (कार्मिक) द्वारा जारी पत्र में साफ शब्दों में हिदायत दी गई है:
“कन्हैया कुमार को शिवहर जिला बल में पदस्थापना के दौरान कोई महत्वपूर्ण दायित्व (जिम्मेदारी) न दी जाए।”
यह लिखित निर्देश किसी अधिकारी के करियर प्रोफाइल पर एक ‘ब्लैक मार्क’ की तरह है, जो स्पष्ट संकेत देता है कि मुख्यालय उनके पिछले कार्य-व्यवहार से बेहद असंतुष्ट है।
एसएसपी मुजफ्फरपुर को सख्त निर्देश: “तुरंत करें विरमित”
मुख्यालय ने इस मामले में मुजफ्फरपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) को किसी भी तरह की देरी न करने का निर्देश दिया है:
- अविलंब कार्यमुक्त: आदेश में कहा गया है कि संबंधित सार्जेंट को तत्काल प्रभाव से शिवहर के लिए विरमित (Relieve) किया जाए।
- वेतन प्रमाण-पत्र: उनकी विदाई के साथ ही उनका अंतिम वेतन प्रमाण-पत्र निर्गत करने की जिम्मेदारी भी तय की गई है, ताकि वे तुरंत नई जगह ज्वाइन कर सकें।
चर्चाओं का बाजार गर्म: आखिर क्या थी वजह?
मुजफ्फरपुर से शिवहर भेजे गए कन्हैया कुमार अब पुलिस महकमे में ‘टॉक ऑफ द टाउन’ बने हुए हैं।
- गंभीर सुधार का संकेत: जानकारों का मानना है कि इस तरह के आदेश तब दिए जाते हैं जब किसी अधिकारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार, लापरवाही या अधिकारों के दुरुपयोग की गंभीर प्रशासनिक शिकायतें मुख्यालय तक पहुँचती हैं।
- अधिकारों में कटौती: शिवहर जैसे छोटे जिले में भेजे जाने और ऊपर से “कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी न मिलने” के आदेश का मतलब है कि उन्हें केवल ऑफिस वर्क या गैर-महत्वपूर्ण ड्यूटी तक ही सीमित रखा जाएगा।
VOB का नजरिया: बदल रही है बिहार पुलिस की कार्यशैली?
बिहार पुलिस मुख्यालय का यह एक्शन दर्शाता है कि अब ‘फ्री हैंड’ काम करने के दिन लद गए हैं। विशेषकर त्योहारों और वीआईपी कार्यक्रमों के इस दौर में, एक पुलिस अधिकारी की शक्ति पर लगाम लगाना यह संदेश है कि वर्दी का रसूख काम नहीं आएगा, केवल प्रदर्शन (Performance) और निष्ठा ही आपकी कुर्सी बचाएगी। क्या यह ‘गुड गवर्नेंस’ की दिशा में एक बड़ा कदम है या केवल चुनिंदा अधिकारियों पर निशाना?
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


