मुजफ्फरपुर, 14 अगस्त 2025 | बिहार में मद्य निषेध कानून लागू होने के बावजूद अवैध शराब तस्करी के संगठित नेटवर्क पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। बुधवार सुबह ईडी ने बिहार सहित चार राज्यों में सात ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की, जिसमें मुजफ्फरपुर के बिशनपुर वघनगरी मॉडल पंचायत की मुखिया बबिता देवी के आवास पर भी तलाशी ली गई।
ईडी की यह कार्रवाई शराब तस्करी के कथित मुख्य सरगना सुनील भारद्वाज और उसके करीबियों पर केंद्रित रही। बिहार के अलावा झारखंड के रांची, हरियाणा के गुरुग्राम और अरुणाचल प्रदेश के नाहरलागुन व नामसाई जिलों में भी छापे मारे गए।
मुखिया के घर से दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त
मुजफ्फरपुर में हुई छापेमारी के दौरान ईडी ने मुखिया बबिता देवी के घर से कई दस्तावेज, बैंक खातों के रिकॉर्ड, संपत्ति के कागजात और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए। सूत्रों के मुताबिक, इन दस्तावेजों में अवैध शराब कारोबार और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिलने की संभावना है।
मुखिया के पति बबलू मिश्रा और उनके भाई पर पहले से ही शराब तस्करी के मामले दर्ज हैं। हालांकि, बबिता देवी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा—
“यह कार्रवाई मेरे या मेरे पति के खिलाफ नहीं, बल्कि मेरे देवर सुजीत मिश्रा से जुड़े मामले में हुई है। हम सभी एक ही पैतृक मकान में रहते हैं, इसलिए ईडी की टीम यहां भी आई।”
सरगना के नेटवर्क पर कसा शिकंजा
ईडी के अनुसार, मद्य निषेध के बावजूद सुनील भारद्वाज ने बिहार के भीतर और बाहर अवैध शराब की सप्लाई का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर रखा था। यह नेटवर्क न केवल ट्रकों के जरिए शराब की खेप बिहार में पहुंचाता था, बल्कि नकली दस्तावेजों, गुप्त रूट और कोड वर्ड का इस्तेमाल करके करोड़ों रुपये का काला धन इकट्ठा करता था।
ईडी ने पहले भी इस मामले में कार्रवाई की थी और करीब 9.31 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गई थीं। जांच में अब सामने आया है कि यह गिरोह पुनः सक्रिय हो गया है और पहले से भी बड़े पैमाने पर कारोबार कर रहा है।
चार राज्यों में फैला ऑपरेशन
- बिहार (मुजफ्फरपुर) – मुखिया बबिता देवी के घर छापा
- झारखंड (रांची) – कारोबार से जुड़े ठिकानों की तलाशी
- हरियाणा (गुरुग्राम) – हवाला और फर्जी कंपनियों के दफ्तरों पर छापा
- अरुणाचल प्रदेश (नाहरलागुन व नामसाई) – कथित सप्लाई चेन के ठिकानों की जांच
ईडी अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। इस ऑपरेशन में आयकर विभाग और स्थानीय पुलिस की भी मदद ली गई।


