कोर्ट ने दरिंदों को सुनाई 20-20 साल की जेल
हाजीपुर (वैशाली)। बिहार के वैशाली से न्याय की एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ की एक अदालत ने रिश्तों को कलंकित करने वाले चचेरे भाई और उसके दोस्त को गैंगरेप के मामले में ऐतिहासिक सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोनों दोषियों को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा दी है, साथ ही 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जिस बहन को भाई की सुरक्षा का भरोसा था, उसी भाई ने उसे अपनी हवस का शिकार बनाकर नर्क जैसी जिंदगी जीने पर मजबूर कर दिया था।
डीएनए टेस्ट ने खोली पोल: चचेरा भाई निकला बच्चे का पिता
इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब पीड़िता ने एक बच्चे को जन्म दिया। पुलिस ने जब बच्चे का DNA टेस्ट (आनुवंशिक जांच) करवाया, तो वैज्ञानिक साक्ष्यों ने आरोपी भाई के झूठ की धज्जियाँ उड़ा दीं। टेस्ट में यह साबित हो गया कि नाबालिग का सगा चचेरा भाई ही उस बच्चे का ‘बायोलॉजिकल पिता’ है। इस पुख्ता सबूत ने अदालत में आरोपियों के बचने के सारे रास्ते बंद कर दिए।
विश्वासघात की पूरी कहानी: घर से मौसी के यहाँ ले जाने के नाम पर किया कांड
विशेष अभियोजन अधिकारी (PP) के मुताबिक, यह घिनौना सिलसिला मार्च 2021 में शुरू हुआ था।
- धमकी का खेल: पहले भाई ने अपने साथी के साथ मिलकर नाबालिग से दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी।
- साजिश के तहत अपहरण: कुछ दिन बाद, आरोपी ने पीड़िता को विश्वास में लिया कि वह उसे उसकी मौसी के घर छोड़ आएगा।
- दोबारा दरिंदगी: रास्ते में उसने अपने दोस्त को बुलाया और लड़की को सुनसान जगह ले जाकर फिर से गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया।
18 महीने बाद खुला राज, परिवार के उड़े होश
पीड़िता डर के मारे डेढ़ साल तक खामोश रही, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। सितंबर 2022 में जब नाबालिग के गर्भवती होने का खुलासा हुआ, तो परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। बदनामी और लोक-लाज के डर को दरकिनार कर परिवार ने थाने की चौखट छुई और न्याय की गुहार लगाई।
भास्कर विशेष: आखिर कब तक अपनों से डरेंगी बेटियाँ?
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- रिश्तों पर दाग: जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो समाज किस पर भरोसा करे?
- देर से मिला न्याय: मार्च 2021 की घटना पर सजा आते-आते 2024/25 हो गया, लेकिन कोर्ट के इस फैसले ने अपराधियों में खौफ जरूर पैदा किया है।
“न्यायालय का यह फैसला समाज के लिए एक नजीर है। वैज्ञानिक साक्ष्यों (DNA) ने इस केस को बेहद मजबूत बनाया, जिससे दरिंदों को सख्त सजा दिलाना मुमकिन हो सका।”
— कानूनी विशेषज्ञ


