पटना सिपाही भर्ती में ‘मुन्नाभाई’ का खेल! भागलपुर का अमीर धराया; लिखित परीक्षा किसी और से दिलाई, खुद दौड़ने पहुंचा गर्दनीबाग

HIGHLIGHTS: बायोमेट्रिक ने खोली फर्जीवाड़े की पोल

  • धोखाधड़ी: सिपाही भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) में फर्जी अभ्यर्थी गिरफ्तार।
  • पकड़ा गया ‘खेल’: लिखित परीक्षा में ‘स्कॉलर’ को बैठाया, फिजिकल टेस्ट देने खुद पहुंचा असली उम्मीदवार।
  • सख्त जांच: गर्दनीबाग हाईस्कूल मैदान में फोटो और बायोमेट्रिक मिलान के दौरान खुली पोल।
  • कानूनी शिकंजा: भागलपुर निवासी आरोपी को पुलिस ने हिरासत में लेकर शुरू की पूछताछ।

फर्जीवाड़े का ‘फाइल’ रिकॉर्ड: एक नजर में

  • गिरफ्तार अभ्यर्थी: अमीर (निवासी: भागलपुर)।
  • घटनास्थल: गर्दनीबाग हाईस्कूल मैदान, पटना।
  • पकड़े जाने की वजह: बायोमेट्रिक डेटा और फोटो का पुराने रिकॉर्ड से मिलान न होना।
  • आरोप: लिखित परीक्षा में किसी अन्य व्यक्ति (स्कॉलर) को बैठाकर परीक्षा पास करना।
  • पुलिस स्टेशन: गर्दनीबाग थाना, पटना।

पटना | 18 मार्च, 2026

​पटना के गर्दनीबाग हाईस्कूल मैदान में चल रही सिपाही भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा में मंगलवार को ‘मुन्नाभाई’ स्टाइल की एक बड़ी धोखाधड़ी पकड़ी गई। भागलपुर का रहने वाला अमीर नाम का एक अभ्यर्थी खाकी वर्दी पहनने के सपने के साथ मैदान में पहुंचा तो था, लेकिन उसकी एक पुरानी चालाकी ने उसे दौड़ की पटरी से सीधे हवालात की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

बायोमेट्रिक ने बिगाड़ा ‘अमीर’ का खेल

​गर्दनीबाग पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, जब अमीर अपनी शारीरिक परीक्षा (दौड़, ऊंची कूद आदि) के लिए कतार में खड़ा था, तब वहां तैनात अधिकारियों ने उसकी पहचान की जांच की:

  1. सत्यापन प्रक्रिया: फिजिकल टेस्ट से पहले हर अभ्यर्थी का बायोमेट्रिक सत्यापन और फोटो मिलान किया जाता है।
  2. विसंगति (Mismatch): जब अमीर का अंगूठा स्कैन किया गया और उसकी फोटो का मिलान लिखित परीक्षा के समय लिए गए डेटा से किया गया, तो वह मैच नहीं हुआ।
  3. कबूलनामा: कड़ाई से हुई पूछताछ में आरोपी ने मान लिया कि उसने लिखित परीक्षा में अपनी जगह किसी दूसरे ‘तेज-तर्रार’ व्यक्ति को बैठाया था, ताकि वह परीक्षा पास कर सके।

VOB का नजरिया: ‘स्कॉलर’ गैंग की जड़ें कहाँ?

​बिहार में सिपाही भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़े का यह कोई पहला मामला नहीं है, लेकिन बायोमेट्रिक तकनीक का सख्त इस्तेमाल अब इन ‘मुन्नाभाइयों’ के लिए काल बन रहा है। सवाल यह है कि अमीर जैसे अभ्यर्थी को लिखित परीक्षा में पास कराने वाला वह ‘असली’ मास्टरमाइंड कौन है? भागलपुर से पटना तक फैले इस नेटवर्क की जांच होनी जरूरी है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि सरकारी नौकरी की चाहत में ऐसे शॉर्टकट न केवल करियर बर्बाद करते हैं, बल्कि योग्य युवाओं का हक भी मारते हैं।

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