सात समंदर पार से संवरेगा मुंगेर का ‘शिवकुंड’! अमेरिका से आए ‘अभिवादन’ ने गांव को बनाया ‘इको मॉडल’; चहक उठीं गौरैया

मुंगेर | 09 मार्च, 2026: बिहार के मुंगेर जिले का एक छोटा सा गांव अब वैश्विक मानचित्र पर अपनी चमक बिखेरने को तैयार है। धरहरा प्रखंड के शिवकुंड गांव में सोमवार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों का एक ऐसा समागम हुआ, जिसने ‘इको-विलेज’ (Eco-Village) की अवधारणा को धरातल पर उतार दिया। राष्ट्रगान की गूँज और ग्रामीणों के गर्मजोशी भरे स्वागत के बीच शिवकुंड ने आज से एक नई और ‘हरित’ यात्रा की शुरुआत की है।

अमेरिका से जुड़ा दिल: आरव सिंह ने लिया गांव को गोद

​इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण ‘रिजूवेनेट गंगा फाउंडेशन’ के आरव सिंह रहे, जो अमेरिका से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीधे शिवकुंड से जुड़े।

  • मिट्टी का कर्ज: मूल रूप से मुंगेर के ही रहने वाले आरव सिंह ने शिवकुंड को ‘इको ग्राम’ के रूप में विकसित करने के लिए गोद लेने की घोषणा की।
  • बड़ा विजन: उन्होंने कहा कि यह मुहिम केवल शिवकुंड तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनका उद्देश्य पूरे भारत को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाना है। अपनी जड़ों के लिए कुछ करने का यह जज्बा देख ग्रामीण भी भावुक नजर आए।

जब ‘इको-वॉरियर्स’ एक साथ आए…

​शिवकुंड को आदर्श बनाने के लिए कई नामी संस्थाओं ने हाथ मिलाया है। इनमें ‘रिजूवेनेट गंगा’, ‘बायो एंजाइम एंटरप्रेन्योर्स एकेडमी (BEA)’, ‘स्विच फॉर चेंज फाउंडेशन’, ‘गंगांजलि’, ‘देव वृक्ष’ और ‘भोजपुर महिला कला केंद्र’ शामिल हैं।

मिशन के मुख्य बिंदु:

  • प्लास्टिक को ‘ना’: ग्रामीणों को प्लास्टिक की जगह कपड़े के थैलों के इस्तेमाल की शपथ दिलाई गई।
  • बायो-एंजाइम का जादू: फूलों से तैयार होने वाले ‘बायो-एंजाइम’ की तकनीक साझा की गई, जो न केवल हवा शुद्ध करता है बल्कि खेतों के लिए शानदार जैविक खाद भी है।
  • हरित संकल्प: गांव को हरा-भरा और कचरा मुक्त बनाने का सामूहिक संकल्प लिया गया।

‘स्पैरो विलेज’: जहां हर घर में है गौरैया का बसेरा

​शिवकुंड की एक और अनोखी पहचान है—‘स्पैरो विलेज’। गौरैया संरक्षण के क्षेत्र में गांव ने मिसाल पेश की है।

    • संस्थापक की पहल: नीतीश कुमार और अनिल कुमार ने बताया कि गांव के लगभग हर घर में गौरैया के लिए विशेष घोंसले लगाए गए हैं।
    • चहचहाहट: आज आलम यह है कि पूरे गांव में सुबह-शाम गौरैया की चहचहाहट गूँजती है, जो आधुनिक दौर के कंक्रीट के जंगलों में दुर्लभ होती जा रही है।

VOB का नजरिया: ‘ग्लोबल’ सोच और ‘लोकल’ एक्शन का संगम

शिवकुंड की यह कहानी बताती है कि अगर नीयत साफ हो, तो विकास के लिए फंड और तकनीक सात समंदर पार से भी चलकर आती है। मुंगेर की मिट्टी से निकले एक बेटे (आरव सिंह) का अपने क्षेत्र के लिए यह लगाव काबिले तारीफ है। ‘स्पैरो विलेज’ से ‘इको विलेज’ तक का यह सफर बिहार के अन्य गांवों के लिए एक ‘ब्लूप्रिंट’ बन सकता है। अब जिम्मेदारी ग्रामीणों की है कि वे इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग को टिकाऊ (Sustainable) बनाएं।

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