मोबाइल छीन भाग रहे लुटेरे के पीछे चलती ट्रेन से कूदी मुंगेर की छात्रा; हालत नाजुक

बांदा/मुंगेर | 25 फरवरी, 2026: बिहार के मुंगेर की एक बेटी ने अपनी बहादुरी से सबको चौंका दिया है, लेकिन इस बहादुरी की उसे भारी कीमत चुकानी पड़ी है। झांसी में पढ़ रही पॉलिटेक्निक की छात्रा सृष्टि कुमारी ने अपना मोबाइल बचाने के लिए जान की बाजी लगा दी और चलती ट्रेन से नीचे कूद गई। इस जानलेवा कदम के कारण छात्रा के सिर में गंभीर चोट आई है और वह अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है।

चंबल एक्सप्रेस में ‘झपट्टा मार’ गिरोह का शिकार

​मुंगेर जिले की रहने वाली सृष्टि, झांसी पॉलिटेक्निक कॉलेज में द्वितीय वर्ष की छात्रा है। मंगलवार को वह चंबल एक्सप्रेस के एस-थ्री (S3) कोच में सवार होकर झांसी से अपने घर बिहार लौट रही थी। दोपहर करीब पौने दो बजे, जब ट्रेन बांदा के बदौसा रेलवे स्टेशन से आगे बढ़ी, तभी एक शातिर बदमाश ने चार्जिंग में लगे सृष्टि के मोबाइल पर झपट्टा मारा और गेट की तरफ भागने लगा।

लुटेरे का पीछा और वो ‘खतरनाक’ छलांग

​सृष्टि ने हिम्मत नहीं हारी और बदमाश के पीछे दौड़ पड़ी। शातिर लुटेरा चलती ट्रेन से नीचे कूद गया। उसे भागता देख सृष्टि ने भी बिना सोचे-समझे पटरी के किनारे छलांग लगा दी। गनीमत यह रही कि पास में पुल होने की वजह से ट्रेन की रफ्तार थोड़ी धीमी थी, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। हालांकि, जमीन पर गिरते ही सृष्टि के सिर में गहरा जख्म हो गया और वह बेसुध हो गई।

RPF ने पहुंचाया अस्पताल, मुंगेर में परिजनों को दी सूचना

​आरपीएफ (RPF) के जवानों ने तुरंत मौके पर पहुँचकर घायल छात्रा को संभाला और उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। आरपीएफ थाना प्रभारी (कर्वी) राजेंद्र द्विवेदी ने बताया कि सृष्टि के सिर की चोट काफी गंभीर है और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं। मुंगेर में रह रहे उनके परिजनों को इस घटना की सूचना दे दी गई है, जो बांदा के लिए रवाना हो चुके हैं।

VOB का नजरिया: बहादुरी और सुरक्षा के बीच की बारीक लकीर

​सृष्टि का साहस काबिले तारीफ है कि उसने अपराधियों के सामने घुटने नहीं टेके, लेकिन यह घटना एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है। क्या ₹10-20 हजार के मोबाइल के लिए अपनी अनमोल जान को दांव पर लगाना सही है? रेलवे में बढ़ती ‘झपट्टा मार’ गिरोह की सक्रियता और सुरक्षा की कमी ही छात्रों को ऐसे आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर रही है।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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