मुंगेर-जमुई फोरलेन कॉरिडोर को लेकर बड़ी पहल: बरियारपुर से बिशुनपुर तक चौड़ी होगी सड़क, सुल्तानगंज मार्ग से कनेक्टिविटी का खाका तैयार

पटना/मुंगेर, 18 मई 2026। बिहार के दक्षिण-पूर्वी हिस्से की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले मुंगेर और जमुई प्रक्षेत्र के बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर पर अपग्रेड करने की दिशा में एक बहुत बड़ा नीतिगत कदम उठाया गया है। मुंगेर के बरियारपुर से लेकर जमुई जिले के बिशुनपुर तक की रणनीतिक सड़क को अब फोरलेन (चार लेन) राजमार्ग के रूप में विकसित किया जाएगा। बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग ने राष्ट्रीय राजमार्ग 333 (एनएच 333) के इस महत्वपूर्ण खंड के चौड़ीकरण और कायाकल्प को लेकर नई दिल्ली स्थित केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को दोबारा एक व्यापक संशोधित प्रस्ताव प्रेषित किया है। इस परियोजना के धरातल पर उतरने से न केवल मुंगेर और जमुई के बीच का सफर बेहद सुगम और तीव्र हो जाएगा, बल्कि यह प्रक्षेत्र अंतर-प्रांतीय व्यापार और धार्मिक पर्यटन के एक विशाल हब के रूप में विलेखों में दर्ज होगा। पथ निर्माण विभाग इस योजना को लेकर पूरी कड़ाई से प्रशासनिक तैयारियों में जुट गया है।

केंद्रीय मंत्रालय के फीडबैक के बाद तैयार हुआ नया संशोधित ब्लूप्रिंट

​इस ढांचागत विकास योजना के तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की बात करें तो पथ निर्माण विभाग ने पूर्व में भी इस मार्ग के चौड़ीकरण को लेकर एक प्रारंभिक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। उस प्रस्ताव पर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की तकनीकी विंग ने गहन विमर्श किया और वर्तमान यातायात घनत्व तथा भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए कतिपय महत्वपूर्ण सुझाव और हिदायतें दी थीं। केंद्रीय मंत्रालय के उन्हीं सुझावों और तकनीकी संरेखणों को समाहित करते हुए बिहार के इंजीनियरों और योजनाकारों ने एक नया, दोषरहित और संशोधित प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे अब अंतिम विधिक स्वीकृति के लिए दोबारा दिल्ली भेजा गया है।

​विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि जैसे ही केंद्र सरकार की ओर से इस संशोधित विलेख पर अंतिम प्रशासनिक मुहर लगेगी, वैसे ही निविदा जारी करने और भूमि के भौतिक हस्तांतरण की अग्रतर कार्रवाई तेज गति से शुरू कर दी जाएगी। इस सड़क के फोरलेन हो जाने से भारी वाहनों, मालवाहक ट्रकों और यात्री बसों की गति सीमा में अभूतपूर्व सुधार होगा, जिससे दक्षिण बिहार की लॉजिस्टिक क्षमता काफी मजबूत होगी।

86 किलोमीटर लंबे मुख्य खंड का होगा पूर्ण ढांचागत सुदृढ़ीकरण

​भौगोलिक दृष्टिकोण से राष्ट्रीय राजमार्ग 333 का बिहार और झारखंड के बीच संपर्क स्थापित करने में एक बहुत बड़ा और अनिवार्य अवदान है। यह पूरी सड़क मुंगेर जिले के बरियारपुर से शुरू होकर खड़गपुर के पहाड़ी रास्तों, लक्ष्मीपुर के ग्रामीण इलाकों, जमुई जिला मुख्यालय और चकाई के घने जंगलों से गुजरते हुए सीधे झारखंड की सीमा पर स्थित बाबाधाम देवघर तक जाती है। इस संपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई लगभग 145 किलोमीटर आंकी गई है।

​पथ निर्माण विभाग द्वारा तैयार किए गए इस नए मेगा प्रोजेक्ट के तहत बरियारपुर से शुरू होकर जमुई के बिशुनपुर तक जाने वाले 86 किलोमीटर लंबे मुख्य खंड को पहले चरण में पूरी तरह से फोरलेन में तब्दील करने का विधिक खाका खींचा गया है। वर्तमान समय में इस मार्ग के कई हिस्से काफी संकीर्ण हैं और पहाड़ी व घुमावदार मोड़ों के कारण यहाँ अक्सर दुर्घटनाओं की विसंगति बनी रहती है। 86 किलोमीटर के इस पूरे प्रक्षेत्र के फोरलेन हो जाने से वाहनों का परिचालन पूरी तरह से निर्बाध हो जाएगा, जिससे इस मार्ग पर यात्रा का समय लगभग आधा रह जाने की उम्मीद है।

एसएच 22 से कनेक्टिविटी के लिए बनेगा 12 किलोमीटर का नया फोरलेन लिंक रोड

​इस पूरी सड़क परियोजना की सबसे बड़ी रणनीतिक और तकनीकी खूबी यह है कि इसे राज्य के एक अन्य अत्यंत महत्वपूर्ण राजमार्ग से जोड़ने की प्रविधि पर भी समानांतर रूप से काम किया जा रहा है। सरकार के नए प्रस्ताव में एनएच 333 को राज्य उच्च पथ 22 (एसएच 22) से एकीकृत करने के लिए 12 किलोमीटर लंबी एक नई फोरलेन लिंक सड़क बनाने की बात कही गई है। यह 12 किलोमीटर की नई सड़क मुंगेर जिले के संग्रामपुर के समीप सीधे जाकर एसएच 22 विन्यास में विधिक रूप से जुड़ जाएगी।

​इस लिंक रोड के बन जाने से दो अलग-अलग प्रक्षेत्रों के बीच एक बेहद मजबूत और सुगम संपर्कता ग्रिड का निर्माण होगा। वर्तमान समय में इन दोनों प्रमुख सड़कों के बीच कोई सीधा और चौड़ा संपर्क मार्ग उपलब्ध नहीं होने के कारण बड़े व्यावसायिक वाहनों को एक मार्ग से दूसरे मार्ग पर जाने के लिए सुदूर ग्रामीण पगडंडियों या संकीर्ण रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे न केवल ईंधन की भारी बर्बादी होती है बल्कि ग्रामीण इलाकों में कानून-व्यवस्था और जाम की समस्या भी उत्पन्न होती है। इस नए बाईपास लिंक रोड के बनने से दोनों राजमार्गों का यातायात प्रबंधन अत्यधिक सुचारू हो जाएगा।

श्रावणी मेले और कांवड़ यात्रा के लिए लाइफलाइन साबित होगा यह नया संरेखण

​इस सड़क परियोजना का जितना बड़ा आर्थिक महत्व है, उससे कहीं अधिक इसका धार्मिक और आध्यात्मिक मूल्य भी है। एसएच 22 का जो प्रक्षेत्र है, वह भागलपुर के सुल्तानगंज (उत्तरवाहिनी गंगा तट) से शुरू होकर तारापुर, संग्रामपुर, बेलहर और कटोरिया के दुर्गम क्षेत्रों से गुजरते हुए सीधे चांदन तक जाता है। यह पूरा इलाका विश्व प्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेले का मुख्य कांवड़िया पथ माना जाता है, जहां हर साल सावन के पावन महीने में देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर देवघर स्थित बैद्यनाथ धाम की पैदल और वाहनों से यात्रा करते हैं।

​इसके समानांतर, बरियारपुर-जमुई एनएच 333 भी बाबाधाम जाने वाले श्रद्धालुओं की गाड़ियों, वीआईपी काफिलों और यात्री बसों का सबसे मुख्य लाइफलाइन मार्ग है। वर्तमान समय में इन दोनों राजमार्गों के संकीर्ण होने के कारण सावन के पूरे महीने में बरियारपुर, खड़गपुर और संग्रामपुर के शहरी इलाकों में गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती हैं। 86 किलोमीटर के मुख्य खंड के फोरलेन बनने और 12 किलोमीटर के लिंक रोड द्वारा दोनों राजमार्गों के आपस में जुड़ जाने से कांवड़ियों और आम यात्रियों के वाहनों का डायवर्जन अत्यंत सुगम हो जाएगा। यह नया बुनियादी ढांचा आने वाले वर्षों में श्रावणी मेले के दौरान भीड़ प्रबंधन और यातायात सर्विलांस को कड़ाई से लागू करने में जिला प्रशासन के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

भूमि की उपलब्धता और जिला प्रशासनों की सांगठनिक तैयारी

​पथ निर्माण विभाग के मुख्य सचिवालय से प्राप्त इनपुट्स के अनुसार, इस संशोधित प्रस्ताव को दिल्ली भेजने के साथ ही राज्य स्तर पर भी प्रारंभिक विलेखों को दुरुस्त करने की विधा शुरू कर दी गई है। मुंगेर और जमुई जिलों के जिलाधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने राजस्व प्रक्षेत्रों के भीतर एनएच 333 के दोनों किनारों पर उपलब्ध सरकारी और अधिग्रहित भूमि के लैंड रिकॉर्ड्स की भौतिक मैपिंग को पूरी तरह से संधारित रखें।

​चूंकि सड़क की चौड़ाई को बढ़ाकर फोरलेन किया जाना है, इसलिए जहां भी अतिरिक्त निजी भूमि के अर्जन (Land Acquisition) की आवश्यकता महसूस होगी, वहां नए पारदर्शी नियमों के तहत रैयतों और जमीन मालिकों को समयबद्ध तरीके से उचित मुआवजा देने की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है। पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो, इसके लिए सड़क के संरेखण में इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि कम से कम पेड़ काटने पड़ें और जहां आवश्यक हो, वहां नई ग्रीन बेल्ट विकसित की जाए। दक्षिण बिहार के इस आंशिक रूप से पिछड़े और पहाड़ी प्रक्षेत्र के आर्थिक पुनरुत्थान, रोजगार सृजन और ढांचागत आधुनिकीकरण के लिए इस फोरलेन परियोजना को एक अत्यंत अनिवार्य और युगांतरकारी विधा माना जा रहा है।

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