मुंगेर में मुआवजे की खातिर मां ने रची बेटी से दुष्कर्म की झूठी साजिश, बेकसूर को मिली उम्रकैद; अब युवती ने राष्ट्रपति को पत्र लिख मांगी माफी

मुंगेर। बिहार के मुंगेर जिले से न्याय व्यवस्था और रिश्तों की मर्यादा को तार-तार कर देने वाला एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने समाज और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। यह कहानी एक ऐसी ‘साजिश’ की है जहाँ महज कुछ लाख रुपये की सरकारी सहायता (मुआवजा) पाने के लालच में एक मां ने अपनी ही नाबालिग बेटी को मोहरा बना दिया और एक निर्दोष व्यक्ति की पूरी जिंदगी सलाखों के पीछे धकेल दी। धरहरा थाना क्षेत्र की रहने वाली एक युवती ने अब साहस दिखाते हुए इस पूरी साजिश का पर्दाफाश किया है। युवती ने देश के सर्वोच्च पद ‘राष्ट्रपति’, बिहार के ‘राज्यपाल’ और ‘पटना हाईकोर्ट’ के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखकर यह स्वीकार किया है कि वर्ष 2022 में जिस व्यक्ति को उसके साथ दुष्कर्म का दोषी मानकर उम्रकैद की सजा सुनाई गई, वह पूरी तरह बेकसूर है। युवती का दावा है कि उसे पुलिस और परिजनों के दबाव में झूठा बयान देने के लिए मजबूर किया गया था। इस खुलासे के बाद मुंगेर से लेकर पटना तक हड़कंप मच गया है, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर एक बेगुनाह को मिली कठोरतम सजा और कानून के दुरुपयोग से जुड़ा है।

साजिश का ‘ब्लूप्रिंट’: 4 लाख के लिए रिश्तों का सौदा

​इस पूरे मामले की जड़ें वर्ष 2022 में दफन हैं। युवती का आरोप है कि जब वह मात्र 14 वर्ष की थी, तब उसकी मां और कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोगों ने पुलिस के साथ साठगांठ कर एक खौफनाक पटकथा लिखी। साजिश यह थी कि युवती के अपहरण और दुष्कर्म की एक झूठी प्राथमिकी दर्ज कराई जाए, ताकि राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली ‘पीड़ित मुआवजा राशि’ को हड़पा जा सके। युवती ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा है कि उसका कभी अपहरण नहीं हुआ था और न ही उसके साथ किसी ने कोई गलत काम (दुष्कर्म) किया था।

​युवती के अनुसार, यह पूरी कवायद केवल सरकारी खजाने से मिलने वाले चार लाख रुपये के लिए की गई थी। विडंबना देखिए कि जिस मां को अपनी बेटी की अस्मत की रक्षा करनी थी, उसी ने उसे एक झूठे केस की ‘पीड़िता’ बना दिया। युवती का कहना है कि उसे डराया-धमकाया गया कि अगर वह पुलिस और कोर्ट में उनके कहे अनुसार बयान नहीं देगी, तो उसके साथ बुरा होगा। यह मामला केवल एक परिवार के लालच का नहीं है, बल्कि यह उस तंत्र की विफलता भी है जिसने बिना पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्यों के एक युवक को ‘दरिंदा’ घोषित कर दिया।

पुलिस हिरासत में प्रताड़ना: ‘वर्दी’ पर लगे गंभीर आरोप

​युवती ने केवल अपनी मां पर ही नहीं, बल्कि पुलिस विभाग के अधिकारियों पर भी अत्यंत गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र में दावा किया गया है कि उसे जमालपुर थाना पुलिस द्वारा 30 घंटे से अधिक समय तक अवैध हिरासत में रखा गया था। इस दौरान उसे न केवल मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, बल्कि शारीरिक रूप से भी दबाव डाला गया। युवती का कहना है कि पुलिस के अधिकारी अच्छी तरह जानते थे कि मामला झूठा है, लेकिन उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट को इस तरह से तैयार किया जिससे आरोपी को अधिकतम सजा मिल सके।

​युवती ने जमालपुर थाना के 7 सितंबर 2022 के सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग की है। उसका कहना है कि यदि उस दिन का फुटेज निकाला जाए, तो यह साफ हो जाएगा कि पुलिस उसे थाने में रखकर किस तरह बयान बदलने और झूठी गवाही देने के लिए मजबूर कर रही थी। पुलिस पर आरोप है कि उन्होंने युवती को ‘सिखाया-पढ़ाया’ और कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने वही बयान देने को कहा जो उन्होंने लिखकर दिया था। यह आरोप यदि सच साबित होते हैं, तो यह पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा काला धब्बा होगा, जहाँ वर्दीधारियों ने न्याय दिलाने के बजाय न्याय का सौदा किया।

रवि कुमार: एक ‘बेकसूर’ जिसे समाज और कानून ने ठुकराया

​इस साजिश का सबसे बड़ा शिकार बना रवि कुमार, जिसे पुलिस की झूठी जांच रिपोर्ट और युवती के (दबाव में दिए गए) बयानों के आधार पर न्यायालय ने दोषी करार दिया। रवि कुमार को दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई गई। एक ऐसा व्यक्ति जिसकी पूरी उम्र और भविष्य अभी सामने था, वह पिछले दो वर्षों से जेल की कालकोठरी में सड़ रहा है। रवि के परिवार ने उस समय भी उसे निर्दोष बताया था, लेकिन ‘पीड़िता’ के बयान के सामने उनकी एक न सुनी गई।

​युवती अब रवि कुमार के लिए न्याय की गुहार लगा रही है। उसने अपने पत्र में लिखा है कि वह एक निर्दोष व्यक्ति को सजा काटते हुए देख अपना मानसिक संतुलन खो रही है। उसका विवेक उसे कचोट रहा है कि उसकी एक ‘झूठी गवाही’ ने किसी के घर का चिराग बुझा दिया और उसे अपराधी बना दिया। युवती ने मांग की है कि रवि कुमार को तुरंत बाइज्जत बरी किया जाए और जिन पुलिस अधिकारियों ने इस झूठे मामले को गढ़ा, उन पर हत्या की साजिश जैसी कड़ी धाराओं में मुकदमा चलाया जाए।

मुआवजा लौटाने की पेशकश: पश्चाताप की अग्नि

​इस मामले में एक और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब युवती ने सरकार से मिली सहायता राशि को लौटाने की इच्छा जताई। राज्य सरकार की योजना के तहत उसे मुआवजे के तौर पर चार लाख रुपये मिले थे। युवती ने साफ कर दिया है कि वह इन ‘खून और आंसुओं’ से सने पैसों को वापस करना चाहती है। उसका कहना है कि उसे यह रकम नहीं चाहिए, उसे बस इस अपराधबोध से मुक्ति चाहिए कि उसने किसी की जिंदगी बर्बाद की है।

​मुआवजा राशि लौटाने की यह पेशकश इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि युवती के दावों में सच्चाई हो सकती है। आमतौर पर ऐसे मामलों में लोग पैसा हड़पकर खामोश हो जाते हैं, लेकिन यहाँ युवती ने खुद सामने आकर पूरी व्यवस्था को चुनौती दी है। वह चाहती है कि यह पैसा वापस लेकर उस निर्दोष व्यक्ति के सम्मान को बहाल किया जाए। यह कदम उन लोगों के लिए भी एक सबक है जो सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए झूठे आपराधिक मामले दर्ज कराते हैं।

कानूनी पेच और उच्च न्यायालय में लंबित मामला

​वर्तमान में रवि कुमार की सजा के खिलाफ अपील पटना उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। युवती द्वारा राष्ट्रपति और राज्यपाल को लिखे गए पत्र की प्रतियां हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी भेजी गई हैं। अब गेंद न्यायपालिका के पाले में है। कानून के जानकारों का मानना है कि यदि ‘पीड़िता’ स्वयं मुकर गई है और उसने साजिश की बात स्वीकार की है, तो यह ‘रिट्रैक्शन ऑफ स्टेटमेंट’ (बयान से पलटना) का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मामला बन जाता है।

​हालांकि, कानूनी प्रक्रिया इतनी आसान नहीं है। न्यायालय को यह देखना होगा कि क्या युवती अब किसी और के दबाव में तो बयान नहीं बदल रही? लेकिन जिस तरह से उसने सीसीटीवी फुटेज और पुलिस की प्रताड़ना की बात की है, वह मामले को एक नया मोड़ देता है। हाईकोर्ट अब इस मामले में नए सिरे से जांच के आदेश दे सकता है या निचली अदालत के रिकॉर्ड को तलब कर सकता है। मुंगेर के विधि विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला एक मिसाल बनेगा कि कैसे ‘POCSO’ जैसे कड़े कानूनों का दुरुपयोग निजी लाभ के लिए किया जा सकता है।

क्या मिल पाएगा रवि को उसका खोया हुआ सम्मान?

​20 अप्रैल 2026 की यह खबर बिहार की पूरी न्याय प्रणाली के लिए एक चेतावनी है। मुंगेर की इस युवती ने जो हिम्मत दिखाई है, वह काबिले तारीफ है, लेकिन इसके पीछे छिपी कहानी उतनी ही डरावनी है। 51 हजार करोड़ की सड़क परियोजनाओं की मंजूरी के लिए सरकारें लड़ रही हैं, अंचलाधिकारियों के तबादले हो रहे हैं, लेकिन एक व्यक्ति जो बिना किसी अपराध के उम्रकैद काट रहा है, उसका हिसाब कौन देगा?

​साजिशकर्ता मां और दोषी पुलिस अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी, यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन रवि कुमार के जीवन के जो साल जेल में बीत गए, उन्हें कोई वापस नहीं लौटा पाएगा। यह मामला समाज के उस काले सच को भी उजागर करता है जहाँ चंद रुपयों के लिए इंसानियत का गला घोंट दिया जाता है। अब सबकी निगाहें राष्ट्रपति भवन और पटना हाईकोर्ट पर टिकी हैं, जहाँ से मुंगेर की इस ‘तथाकथित पीड़िता’ और ‘बेगुनाह दोषी’ के भाग्य का फैसला होगा। न्याय केवल अपराधी को सजा देना नहीं, बल्कि निर्दोष को न्याय दिलाना भी है।

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