
मोतिहारी। जिले में शनिवार को राजनीतिक सरगर्मी उस समय तेज हो गई जब के प्रमुख और पूर्व मंत्री ने निषाद समाज के अधिकारों को लेकर जोरदार आवाज उठाई। ताजपुर सरैया में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने आरक्षण, शिक्षा और राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।
कार्यक्रम में दिखी बड़ी भीड़, सहनी का जोरदार संबोधन
मुकेश सहनी ‘बाबू अमर सिंह महाराज प्राण प्रतिष्ठा समारोह’ में शामिल होने पहुंचे थे, जहां उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए निषाद समाज के हक और हिस्सेदारी की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि जब तक समाज शिक्षित और राजनीतिक रूप से सशक्त नहीं होगा, तब तक उसका समुचित विकास संभव नहीं है।
“शिक्षा ही बदलाव की कुंजी”
अपने संबोधन में सहनी ने शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बताते हुए कहा कि समाज की आधी से ज्यादा समस्याएं केवल शिक्षा के माध्यम से हल की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि जागरूक और शिक्षित समाज ही अपने अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ा हो सकता है।
आरक्षण पर केंद्र सरकार को घेरा
निषाद आरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए सहनी ने केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा—
“हम किसी का हिस्सा नहीं मांग रहे हैं, लेकिन अपना हक जरूर चाहिए। जब तक आरक्षण नहीं मिलेगा, तब तक निषाद समाज का बेटा कलेक्टर जैसे उच्च पदों तक नहीं पहुंच पाएगा।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि जिन राज्यों में निषाद समाज संगठित रहा, वहां उन्हें आरक्षण का लाभ मिला, लेकिन बिहार में अब भी संघर्ष जारी है।
“जाति नहीं, गरीबी हो आधार”
सहनी ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज फैसले जाति और चेहरे देखकर लिए जा रहे हैं, जबकि असली आधार गरीबी होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लोगों को बांटने की राजनीति कर रही है और छोटे-छोटे प्रलोभन देकर वोट हासिल करने की कोशिश करती है।
राजनीतिक सशक्तिकरण पर जोर
VIP प्रमुख ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि समाज को अपने अधिकारों के लिए राजनीतिक रूप से मजबूत बनना होगा। उन्होंने कहा कि जिस समाज के पास राजनीतिक ताकत होती है, उसकी समस्याओं का समाधान भी तेजी से होता है।
यूजीसी और कानून व्यवस्था पर सवाल
अपने भाषण में सहनी ने शिक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार कमजोर वर्गों को सुरक्षा देने में नाकाम रही है और कई महत्वपूर्ण फैसलों पर स्पष्ट रुख नहीं अपना रही है।
निष्कर्ष
पूर्वी चंपारण में मुकेश सहनी का यह बयान साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में निषाद आरक्षण का मुद्दा बिहार की राजनीति में और तेज हो सकता है। शिक्षा, आरक्षण और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर उठी यह आवाज आने वाले चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है।


