बिहार विधानसभा चुनाव के बीच कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी और एआईसीसी कार्यसमिति सदस्य डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह ने संयुक्त प्रेस वार्ता की।
इस दौरान प्रमोद तिवारी ने उद्योग, आस्था और बिहार के सम्मान से जुड़े कई बड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार और एनडीए पर सीधा हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तीन महत्वपूर्ण सवाल पूछे।
“बिहार को 7 PM-MITRA टेक्सटाइल पार्क में एक भी क्यों नहीं मिला?” – प्रमोद तिवारी
तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री जब बेतिया की धरती से बिहार को संबोधित कर रहे हैं, तो राज्य उनसे सीधा सवाल पूछना चाहता है—
“देश में घोषित 7 पीएम-मित्रा टेक्सटाइल पार्क में बिहार को एक भी क्यों नहीं दिया गया?”
उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में केंद्र सरकार ने Prime Minister Mega Integrated Textile Region and Apparel योजना शुरू की। मई 2023 में सात राज्यों का चयन हुआ, लेकिन बिहार उनमें शामिल नहीं था, जबकि केंद्र में ही कपड़ा मंत्रालय का प्रतिनिधित्व गिरिराज सिंह करते रहे।
“अपने ही राज्य को एक भी पार्क नहीं दिला पाए बीजेपी के सांसद” – कांग्रेस नेताओं का आरोप
प्रमोद तिवारी ने कहा कि बीजेपी के बिहार से जुड़े नेता और सांसद राज्य के लिए एक भी टेक्सटाइल पार्क नहीं दिला पाए।
उधर, बिहार सरकार ने ‘मिथिला मेगा टेक्सटाइल एंड डिजाइन पार्क’ और ‘अंग मेगा सिल्क पार्क’ का दावा किया है, लेकिन फरवरी 2025 के लोकसभा सत्र में केंद्र सरकार ने लिखित रूप से कहा कि बिहार से PM-MITRA के लिए कोई प्रस्ताव स्वीकृत नहीं है और 2027-28 तक भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
“सीता माता के अपमान पर बिहार जवाब चाहता है” – प्रमोद तिवारी
प्रमोद तिवारी ने प्रधानमंत्री से दूसरा बड़ा सवाल मातृआस्था से जोड़ा।
उन्होंने कहा कि राज्यसभा में 2017 में केंद्र की बीजेपी सरकार ने यह कहकर कि “सीता माता के जन्म का कोई ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है”, बिहार और मिथिला की सांस्कृतिक पहचान का अपमान किया था।
उन्होंने कहा, “बिहार की पवित्र धरती, माता जानकी की जन्मस्थली का यह धार्मिक अपमान बिहार कभी नहीं भूलेगा।”
कांग्रेस ने आस्था को सम्मान दिया, भाजपा ने अपमान किया – प्रमोद तिवारी
तिवारी ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने धार्मिक पर्यटन को संरक्षित करने का काम किया।
2011 में बनाए गए रामायण सर्किट में बिहार के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों—सीतामढ़ी, पुनौरा धाम, जानकी मंदिर, अहिल्या स्थान, फुल्लहर, चंकीगढ़ और वाल्मीकि नगर—को प्रमुखता दी गई थी।
उनका कहना था कि कांग्रेस ने धार्मिक विरासत को दुनिया से जोड़ा, जबकि भाजपा सरकार ने ही संसद में सीता माता के अस्तित्व पर सवाल उठाकर आस्था को ठेस पहुंचाई।


