
डेहरी-ऑन-सोन (रोहतास)। अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून की पैनी नजरों और चंद सतर्क सिपाहियों की मुस्तैदी के आगे उसकी हर चालाकी धरी की धरी रह जाती है। मध्य प्रदेश के सिंगरौली में शुक्रवार को हुई देश की एक सबसे सनसनीखेज बैंक डकैती का तार अब बिहार के रोहतास जिले से जुड़ गया है। कल जिस गिरोह ने फिल्मी अंदाज में बैंक ऑफ महाराष्ट्र को महज 15 मिनट में खंगाल दिया था, उसका एक मुख्य सदस्य शनिवार, 18 अप्रैल 2026 को बिहार की रेल पुलिस के हत्थे चढ़ गया। रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने रोहतास के डेहरी-ऑन-सोन रेलवे स्टेशन पर गश्त के दौरान लूट का माल लेकर भाग रहे लुटेरे को भारी मात्रा में कैश और सोने के जेवरों के साथ गिरफ्तार किया है। लुटेरा अपना हिस्सा लेकर सुरक्षित ठिकाने की तलाश में था, लेकिन बिहार की धरती पर कदम रखते ही उसकी किस्मत ने साथ छोड़ दिया। इस गिरफ्तारी ने न केवल अंतरराज्यीय लुटेरा गिरोह के नेटवर्क को उजागर किया है, बल्कि मध्य प्रदेश पुलिस के लिए भी जांच का रास्ता साफ कर दिया है।
दो सिपाहियों की सूझबूझ और डेहरी स्टेशन पर हाई-वोल्टेज ड्रामा
शनिवार की दोपहर डेहरी-ऑन-सोन रेलवे स्टेशन पर आम दिनों की तरह भीड़भाड़ थी। आरपीएफ के दो जवान, कांस्टेबल उमाकांत और एमडी नाजिम, प्लेटफॉर्म पर नियमित गश्ती कर रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर एक युवक पर पड़ी जो पुलिस की वर्दी देखते ही सकपका गया और विपरीत दिशा में तेज कदमों से चलने लगा। उसकी घबराहट और चाल-ढाल ने जवानों के मन में संदेह पैदा कर दिया। जवानों ने बिना वक्त गंवाए उसे रुकने का इशारा किया, लेकिन वह भागने की कोशिश करने लगा। घेराबंदी कर उसे पकड़ा गया और तत्काल इसकी सूचना आरपीएफ इंस्पेक्टर रामविलास राम को दी गई।
जब संदिग्ध की तलाशी ली गई, तो पुलिस टीम के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसके पास मौजूद बैग और शरीर में छिपाकर रखा गया 15 लाख 72 हजार रुपये नगद और करीब 61 ग्राम सोना बरामद हुआ। बरामद सोने की कीमत बाजार में 9 लाख रुपये से अधिक आंकी जा रही है। इतनी बड़ी रकम और सोना एक साधारण यात्री के पास होने का कोई पुख्ता प्रमाण वह नहीं दे सका। कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने अपना नाम कमलेश कुमार बताया, जो बिहार के ही नालंदा जिले के हिलसा थाना क्षेत्र के ग्वाल बिगहा का रहने वाला है। उसने स्वीकार किया कि यह सारा माल मध्य प्रदेश के सिंगरौली में की गई बैंक डकैती का उसका ‘हिस्सा’ है।
सिंगरौली बैंक डकैती: 15 मिनट, 15 करोड़ और दहशत का तांडव
इस गिरफ्तारी की जड़ें शुक्रवार, 17 अप्रैल को मध्य प्रदेश के सिंगरौली में हुई उस वारदात से जुड़ी हैं जिसने पूरे देश को हिला दिया था। बेड़न स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र में दोपहर करीब 12:50 बजे पांच नकाबपोश बदमाश दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर पहुँचे थे। हाथ में आधुनिक हथियार लिए इन बदमाशों ने बैंक में दाखिल होते ही ‘गन पॉइंट’ पर सबको बंधक बना लिया। बदमाशों ने केवल 15 मिनट के भीतर बैंक के लॉकर और कैश काउंटर को साफ कर दिया।
विरोध करने पर बदमाशों ने बैंक मैनेजर के साथ बेरहमी से मारपीट की और दहशत फैलाने के लिए हवाई फायरिंग भी की। पुलिस के अनुसार, इस डकैती में करीब 10 से 15 करोड़ रुपये मूल्य का सोना (लगभग 10 किलो) और 20 लाख रुपये से अधिक का कैश लूटा गया था। वारदात को अंजाम देकर लुटेरे अलग-अलग दिशाओं में फरार हो गए थे। इसी गिरोह का सदस्य कमलेश कुमार अपना हिस्सा लेकर सिंगरौली-पटना एक्सप्रेस ट्रेन के जरिए बिहार में दाखिल हुआ था, जहाँ उसे लगा था कि वह सुरक्षित निकल जाएगा।
नालंदा कनेक्शन: पेशेवर अपराधियों का अंतरराज्यीय सिंडिकेट
गिरफ्तार आरोपी कमलेश कुमार का संबंध नालंदा जिले के हिलसा से होना बिहार पुलिस के लिए चिंता का विषय है। एएसपी रेल आलोक कुमार सिंह ने बताया कि कमलेश कुमार बैंक लूट कांड का पेशेवर अपराधी जान पड़ता है। लूट के बाद गिरोह के सदस्यों ने आपस में माल का बंटवारा किया और कमलेश अपने हिस्से का कैश और सोना लेकर अपने गांव ग्वाल बिगहा (हिलसा) लौट रहा था।
रेल पुलिस को अंदेशा है कि इस गिरोह में शामिल अन्य चार लुटेरे भी बिहार के विभिन्न जिलों या पड़ोसी राज्यों में छिपे हो सकते हैं। कमलेश की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस उसके कॉल डिटेल्स (CDR) और पिछले कुछ दिनों के संपर्कों को खंगाल रही है। इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि डकैती की योजना कहाँ बनी थी और इसमें स्थानीय स्तर पर किसने मदद की थी। नालंदा के हिलसा क्षेत्र के अपराधियों का बैंक लूट में पुराना इतिहास रहा है, जिसे देखते हुए जांच का दायरा अब बढ़ाया जा रहा है।
मध्य प्रदेश पुलिस की बिहार में एंट्री: संयुक्त पूछताछ जारी
डेहरी में हुई इस बड़ी बरामदगी की सूचना मिलते ही मध्य प्रदेश के सिंगरौली की पुलिस टीम शनिवार शाम तक रोहतास पहुँच गई। अब बिहार रेल पुलिस और मध्य प्रदेश पुलिस की संयुक्त टीम कमलेश कुमार से गहन पूछताछ कर रही है। मध्य प्रदेश पुलिस को उम्मीद है कि कमलेश के जरिए वे शेष 10 किलो सोना और अन्य चार लुटेरों तक पहुँचने में सफल होंगे।
एएसपी आलोक कुमार सिंह के अनुसार, यह रेल पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। “लुटेरा अपना हिस्सा लेकर सुरक्षित निकलने की फिराक में था, लेकिन हमारे जवानों की सतर्कता ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय अपराध का पर्दाफाश कर दिया,” उन्होंने कहा। इस कार्रवाई के बाद डेहरी-ऑन-सोन और आसपास के स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी कर दी गई है।
सतर्क जवानों को मिलेगा पुरस्कार: पुलिस महकमे में उत्साह
इस पूरे ऑपरेशन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका उन दो कांस्टेबल की रही जिन्होंने शक होने पर लुटेरे का पीछा किया। एएसपी ने घोषणा की है कि कांस्टेबल उमाकांत और एमडी नाजिम सहित आरपीएफ निरीक्षक रामविलास राम और पूरी टीम को पुरस्कृत करने के लिए मुख्यालय को अनुशंसा भेजी जाएगी। यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि अगर निचले स्तर के कर्मी भी सजग रहें, तो अपराध को नियंत्रित करना आसान हो जाता है।
बरामद माल को फिलहाल सरकारी मालखाने में सुरक्षित रखा गया है और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे मध्य प्रदेश पुलिस को सौंपा जाएगा। सिंगरौली पुलिस अब ट्रांजिट रिमांड पर कमलेश कुमार को अपने साथ ले जाने की तैयारी कर रही है ताकि लूट की जगह पर ले जाकर सीन रिक्रिएशन (Scene Recreation) कराया जा सके।
अपराध का बदलता स्वरूप और रेल पुलिस की चुनौतियां
18 अप्रैल 2026 की यह घटना बताती है कि अपराधी अब रेलवे को अपने सुरक्षित परिवहन का माध्यम बना रहे हैं। बैंक लूटने के बाद लंबी दूरी की ट्रेनों में सवार होकर दूसरे राज्यों में छिपना एक पुराना पैटर्न रहा है, लेकिन डिजिटल सर्विलांस और मैनुअल इंटेलिजेंस के संगम ने आज इस गिरोह के एक सदस्य को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया। बिहार की सीमावर्ती जिलों में अब पुलिस ने चौकसी बढ़ा दी है ताकि गिरोह के अन्य सदस्य भाग न सकें।
सिंगरौली बैंक लूट मामले में करोड़ों की लूट का यह पर्दाफाश अब अंतिम चरण में है। कमलेश कुमार से मिल रही जानकारियों के आधार पर कई जगहों पर छापेमारी की जा रही है। क्या 10 किलो सोना बरामद हो पाएगा? क्या बाकी के चार नकाबपोश बदमाश भी पुलिस के हत्थे चढ़ेंगे? इन सवालों के जवाब अब आने वाले कुछ घंटों की जांच पर टिके हैं। फिलहाल, रोहतास रेल पुलिस की इस सफलता ने अपराधियों के बीच खौफ पैदा कर दिया है।


