शादी की सालगिरह के 24 घंटे बाद मातम! ‘बिट्टी का ख्याल रखना’ लिखकर फंदे पर झूली 23 साल की प्रियंका; दहेज या डिप्रेशन?

HIGHLIGHTS:

  • हृदयविदारक: धूमधाम से मनाई पहली वेडिंग एनिवर्सरी, अगले ही दिन फांसी के फंदे पर झूली विवाहिता।
  • इमोशनल नोट: “तुम कुछ मत करना यार, बिट्टी का ख्याल रखना… ओके बाय।”
  • टकराव: मायके का आरोप- “दहेज के लिए की हत्या”, पति बोला- “मानसिक बीमार थी प्रियंका।”

एनिवर्सरी का केक अभी सूखा भी नहीं था कि… उजड़ गया संसार

हरदोई: उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसने ‘रिश्तों’ और ‘खुशियों’ के दोहरे चेहरे को बेनकाब कर दिया है। अजमतपुर गांव के रहने वाले विशाल और 23 वर्षीय प्रियंका ने शनिवार को अपनी शादी की पहली सालगिरह बड़े ही अरमानों के साथ मनाई थी। घर में हंसी-खुशी का माहौल था, लेकिन किसे पता था कि यह जश्न एक खौफनाक अंत की भूमिका लिख रहा है। सालगिरह के ठीक 24 घंटे बाद, रविवार को प्रियंका का शव कमरे में साड़ी के फंदे से लटकता मिला।

सुसाइड नोट की वो आखिरी अपील: “खुशी से रहना यार… ओके बाय”

​पुलिस को मौके से जो सुसाइड नोट मिला है, उसने जांच अधिकारियों की भी आंखें नम कर दी हैं। प्रियंका ने अपनी डेढ़ महीने की मासूम बेटी की खातिर अपने पति से एक भावुक गुहार लगाई है। नोट में लिखा है:

​”मेरी प्यारी बिटिया का ध्यान रखना। कुछ समझ नहीं आया और तुम कुछ नहीं करना, वरना बिट्टी का ख्याल कौन करेगा। खुशी से रहना यार। ओके बाय।”

 

​नोट के अंत में ‘बाबू जी’ शब्द का भी जिक्र है, जिसे पुलिस एक महत्वपूर्ण कोड या सुराग मानकर जांच कर रही है।

दहेज की आग या मानसिक तनाव? दो पक्षों के अलग दावे

​प्रियंका की मौत के बाद अब आरोपों का दौर शुरू हो गया है:

  • मायके का ‘दहेज’ आरोप: मृतका की मां गीता का सीधा आरोप है कि विशाल और उसके परिवार वाले दहेज में बाइक और सोने की चेन के लिए प्रियंका को प्रताड़ित करते थे। उनका दावा है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या है।
  • पति की ‘मानसिक बीमारी’ वाली दलील: वहीं पति विशाल का कहना है कि प्रियंका लंबे समय से मानसिक रूप से परेशान (डिप्रेशन) थी और इसी तनाव के कारण उसने यह आत्मघाती कदम उठाया।

पुलिस की कार्रवाई: पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

​अतरौली थाना प्रभारी सतीश चंद्र के मुताबिक, शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस फिलहाल दो मुख्य बिंदुओं पर काम कर रही है:

    1. हैंडराइटिंग मिलान: क्या सुसाइड नोट सच में प्रियंका ने ही लिखा है?
    2. परिस्थितिजन्य साक्ष्य: क्या घर में वास्तव में कोई झगड़ा हुआ था? थाना प्रभारी ने स्पष्ट किया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि यह ‘दहेज हत्या’ का मामला है या ‘आत्महत्या’ का।

VOB का नजरिया: एक मासूम की चीख और समाज का मौन!

प्रियंका ने सुसाइड नोट में ‘बिट्टी’ का ख्याल रखने की बात तो कह दी, लेकिन सवाल यह है कि डेढ़ महीने की उस बच्ची का क्या कसूर था जिसके सिर से उसकी मां का साया उठ गया? अगर यह दहेज प्रताड़ना है, तो यह हमारे समाज के माथे पर कलंक है कि सालगिरह का जश्न मनाने वाला पति अगले ही दिन कातिल बन जाता है। और अगर यह डिप्रेशन है, तो यह और भी डरावना है कि साथ रहने वाले को भनक तक नहीं लगी कि प्रियंका के अंदर क्या तूफान चल रहा था। न्याय मिलना जरूरी है, उस ‘बिट्टी’ के लिए जो अब अपनी मां को केवल तस्वीरों में देखेगी।

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