मोतिहारी का ‘स्पाइडर-बॉय’: मौत के कुएं में बकरी के लिए लगा दी मासूम की जान की बाजी; सोशल मीडिया पर वायरल हुआ बिहार का ‘खतरनाक जुगाड़’

मोतिहारी | 25 फरवरी, 2026: अक्सर दिल्ली और अन्य महानगरों से खबर आती है कि खुले गड्ढों या बोरवेल में गिरकर मासूमों की जान चली गई। लेकिन बिहार के मोतिहारी से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसे देखकर आपकी सांसें थम जाएंगी। यहाँ एक बकरी के बच्चे की जान बचाने के लिए ग्रामीणों ने ‘जुगाड़’ का ऐसा तरीका अपनाया, जो बहादुरी और जोखिम की पराकाष्ठा है। ग्रामीणों ने एक नन्हे बच्चे को ही रस्सी से बांधकर गहरे कुएं में उतार दिया।

पहाड़पुर के ‘इंग्लिश’ गांव का हैरतअंगेज नजारा

​यह मामला जिले के पहाड़पुर प्रखंड के इंग्लिश गांव का है। जानकारी के अनुसार, गांव में स्थित एक पुराने कुएं में एक बकरी का बच्चा गिर गया था। कुआं काफी गहरा था, लेकिन राहत की बात यह थी कि वह पूरी तरह सूखा था। बकरी के मेमने को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए गांव के बड़े-बुजुर्गों ने कोई सीढ़ी या मशीन नहीं, बल्कि गांव के ही एक जांबाज बच्चे को जरिया बनाया।

रस्सी से बंधा ‘मासूम’ और कुएं का ‘सफर’

​सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे ग्रामीणों ने बच्चे के शरीर को कपड़ों और मजबूत रस्सियों के सहारे बांधा और उसे धीरे-धीरे कुएं की गहराई में लटका दिया।

  • बहादुरी: बच्चा बिना डरे कुएं के अंधेरे में उतरा।
  • मिशन सफल: कुछ ही मिनटों में बच्चे ने बकरी को अपने हाथों में थामा और ग्रामीणों ने रस्सी खींचकर दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। जैसे ही बच्चा बाहर आया, पूरे इलाके में उसकी बहादुरी की चर्चा होने लगी।

बहादुरी या बड़ी लापरवाही? उठ रहे हैं सवाल

​हालांकि बच्चा और बकरी दोनों सुरक्षित हैं, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा मानकों पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

  1. जोखिम: अगर रस्सी टूट जाती या कुएं में कोई जहरीली गैस होती, तो यह ‘जुगाड़’ एक बड़े हादसे में बदल सकता था।
  2. मजबूरी: ग्रामीणों का तर्क है कि बिना किसी आधुनिक संसाधन के बकरी की जान बचाना जरूरी था, इसलिए उन्होंने इस तरीके को अपनाया।

VOB का नजरिया: जज्बे को सलाम, पर सुरक्षा का क्या?

​मोतिहारी के उस बच्चे का हौसला वाकई काबिले तारीफ है जिसने एक बेजुबान के लिए अपनी जान जोखिम में डाली। लेकिन ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ प्रशासन और ग्रामीणों से यह अपील करता है कि ऐसे खतरनाक प्रयोगों से बचें। बिहार के गांव में आज भी रेस्क्यू उपकरणों की कमी है, जिसके कारण लोगों को ऐसे देसी तरीके अपनाने पड़ते हैं। यह वीडियो वायरल तो हो रहा है, लेकिन यह सिस्टम की लाचारी को भी दर्शाता है।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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