​मोतिहारी: फर्जी एसटीएफ बनकर लूटने वाले गिरोह का भंडाफोड़; बर्खास्त सिपाही और रिटायर्ड होमगार्ड गिरफ्तार

मोतिहारी। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए पुलिस की वर्दी का सहारा लेकर अपराध करने वाले एक शातिर गिरोह का मोतिहारी पुलिस ने पर्दाफाश किया है। बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को मुफस्सिल थाना परिसर में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान पुलिस ने ‘फर्जी एसटीएफ’ (Special Task Force) बनकर आम नागरिकों को लूटने और ठगी करने वाले एक अंतरजिला गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार करने की सफलता साझा की। इस गिरोह की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें कानून की रक्षा करने वाले ही भक्षक बने हुए थे। गिरफ्तार आरोपियों में एक बर्खास्त सिपाही और दो सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) होमगार्ड जवान शामिल हैं। अपराधियों का यह गिरोह न केवल चंपारण बल्कि वैशाली के हाजीपुर और सीमावर्ती जिले किशनगंज तक अपने पैर पसार चुका था। सदर-2 डीएसपी जितेश पाण्डेय के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई ने वर्दी की आड़ में छिपे चेहरों को बेनकाब कर दिया है।

पुलिस की कार्रवाई: डीएसपी ने साझा किए अहम सुराग

​मुफस्सिल थाना परिसर में पत्रकारों को संबोधित करते हुए सदर-2 डीएसपी जितेश पाण्डेय ने बताया कि पुलिस को पिछले कुछ समय से फर्जी पुलिसकर्मियों द्वारा लूटपाट की सूचनाएं मिल रही थीं। अपराधी विशेष कार्य बल (एसटीएफ) का नाम लेकर लोगों को डराते थे और जांच के नाम पर उनके कीमती सामान और नकदी लेकर फरार हो जाते थे।

​गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया और जाल बिछाकर गिरोह के पांच मुख्य सदस्यों को दबोच लिया। तलाशी के दौरान पुलिस ने गिरोह के पास से 1.81 लाख रुपये नकद और वारदात में इस्तेमाल किए जाने वाले तीन वाहन जब्त किए हैं। इन वाहनों का उपयोग अपराधी दूर-दराज के इलाकों में जाकर शिकार तलाशने और घटना को अंजाम देकर तेजी से भागने के लिए करते थे। पुलिस अब इन वाहनों के दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि पता चल सके कि ये वाहन चोरी के हैं या फर्जी नंबर प्लेटों का उपयोग किया गया था।

अपराधी प्रोफाइल: जब रक्षक ही बन गए भक्षक

​इस गिरोह का ढांचा अत्यंत संगठित और तकनीकी रूप से पुलिस कार्यप्रणाली से परिचित था। गिरोह की संरचना में अनुभवी पूर्व सुरक्षाकर्मी शामिल थे, जिससे उन्हें पुलिसिया रौब झाड़ने और आम जनता को गुमराह करने में आसानी होती थी:

  1. बर्खाश्त सिपाही: गिरोह का मुख्य सूत्रधार एक बर्खास्त सिपाही है, जिसे पूर्व में उसकी संदिग्ध गतिविधियों या अनुशासनहीनता के कारण पुलिस विभाग से बाहर कर दिया गया था। उसे पुलिस की कार्यशैली, वायरलेस कोड और चेकिंग की बारीकियों का पता था, जिसका फायदा उठाकर वह फर्जी छापेमारी का नाटक करता था।
  2. रिटायर्ड होमगार्ड जवान: गिरोह में दो ऐसे सदस्य भी शामिल हैं जो होमगार्ड से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। लंबी सेवा के कारण उनकी पहचान स्थानीय क्षेत्रों में थी और उन्हें वर्दी की गरिमा का नाजायज फायदा उठाना बखूबी आता था।
  3. अंतरजिला नेटवर्क: पुलिस की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि यह गिरोह केवल मोतिहारी तक सीमित नहीं था। इसके तार हाजीपुर (वैशाली) और किशंगनज जैसे जिलों से भी जुड़े हुए थे। हाजीपुर और किशनगंज में सक्रिय अन्य अपराधियों के साथ मिलकर ये लोग बड़े पैमाने पर ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहे थे।

वारदात का तरीका: ‘एसटीएफ’ का डर दिखाकर करते थे ठगी

​गिरोह के काम करने का तरीका (Modus Operandi) काफी शातिर था। ये लोग आमतौर पर उन व्यापारियों, किसानों या राहगीरों को निशाना बनाते थे जो बड़ी मात्रा में नकदी लेकर जा रहे होते थे।

  • फर्जी नाकेबंदी: अपराधी पुलिस की तरह दिखने वाली वर्दी या जैकेट पहनकर सुनसान रास्तों पर वाहन रोकते थे।
  • एसटीएफ की धौंस: खुद को पटना या मुख्यालय से आई एसटीएफ टीम बताकर वे पीड़ित पर अवैध सामान या हवाला का पैसा रखने का आरोप लगाते थे।
  • तलाशी के नाम पर लूट: भयभीत पीड़ित को जब वे अपनी गिरफ्त में ले लेते, तो तलाशी के बहाने उसकी जेब और वाहन से नकदी निकाल लेते थे।
  • मामला रफा-दफा करने का झांसा: गिरफ्तारी का डर दिखाकर वे पीड़ित को वहीं छोड़ देते और पैसे लेकर चंपत हो जाते थे।

​डीएसपी जितेश पाण्डेय ने बताया कि चूंकि गिरोह में पूर्व पुलिसकर्मी शामिल थे, इसलिए उनका हाव-भाव और बातचीत का लहजा इतना सटीक होता था कि आम आदमी के लिए असली और फर्जी पुलिस में फर्क करना मुश्किल हो जाता था।

बरामदगी और जांच का दायरा

​पुलिस ने गिरफ्तारी के साथ ही भारी मात्रा में साक्ष्य जुटाए हैं:

  • नकद राशि: ₹1,81,000 की बरामदगी यह दर्शाती है कि यह गिरोह हाल ही में किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे चुका था।
  • वाहन: जब्त किए गए तीन वाहनों का उपयोग विभिन्न जिलों में अपराध के लिए किया जा रहा था।
  • मोबाइल फोन: गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन खंगाले जा रहे हैं ताकि हाजीपुर और किशनगंज में मौजूद उनके आकाओं और अन्य साथियों का पता लगाया जा सके।

​मोतिहारी पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह को विभाग के भीतर के किसी वर्तमान कर्मी से कोई गुप्त सूचना तो नहीं मिल रही थी। बर्खास्त कर्मियों का अपराध की दुनिया में आना पुलिस विभाग के लिए भी एक चिंता का विषय है, क्योंकि ऐसे लोग विभाग की कमजोरियों को अच्छी तरह जानते हैं।

नागरिकों के लिए चेतावनी: कैसे पहचानें असली पुलिस?

​इस घटना के बाद जिला प्रशासन और पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे सचेत रहें।

  1. आईडी कार्ड की मांग: यदि कोई खुद को एसटीएफ या सादे लिबास में पुलिसकर्मी बताता है, तो नागरिक को उसका पहचान पत्र (ID Card) देखने का पूरा अधिकार है।
  2. स्थानीय थाने को सूचना: किसी भी संदिग्ध चेकिंग की स्थिति में तुरंत स्थानीय थाने या आपातकालीन नंबर 112 पर कॉल करें।
  3. वर्दी और बैज: पुलिसकर्मियों की वर्दी पर उनका नाम पट्टिका (Name Plate) और पद का बैज होना अनिवार्य है। एसटीएफ की टीमें भी विशेष अभियानों के दौरान अपनी पहचान स्पष्ट रखती हैं।

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