HIGHLIGHTS
- संदिग्ध मौत: अकबरपुर के बकसंडा गांव में 29 वर्षीय पुष्पा देवी की मौत से सनसनी।
- दहेज की मांग: शादी के 9 साल बाद भी मोटरसाइकिल के लिए प्रताड़ित करने का आरोप।
- ससुराल पक्ष फरार: अस्पताल में मौत की खबर मिलते ही पति और परिजन मौके से हुए रफूचक्कर।
- मासूमों की चीख: पीछे छूट गए तीन छोटे बच्चे; 10 साल का बेटा और दो मासूम बेटियां।
नवादा | 14 मार्च, 2026
नवादा जिले के अकबरपुर थाना क्षेत्र के बकसंडा गांव में एक विवाहिता की मौत ने एक बार फिर दहेज की कुप्रथा और रिश्तों की संवेदनहीनता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 29 वर्षीय पुष्पा देवी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद मायके वालों ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना के बाद से ही मृतका का पति और पूरा ससुराल पक्ष घर छोड़कर फरार है, जो शक की सुई को और गहरा कर रहा है।
9 साल पहले हुई थी शादी, बाइक के लिए प्रताड़ना का आरोप
कौवाकोल निवासी मृतका की मां आशा देवी ने न्याय की गुहार लगाते हुए बताया कि उन्होंने अपनी बेटी पुष्पा की शादी साल 2015 में बकसंडा निवासी गोपाल सिंह के साथ बड़ी उम्मीदों से की थी। लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही खुशियों को ग्रहण लग गया। परिजनों का आरोप है कि दामाद लगातार मोटरसाइकिल की मांग कर रहा था और इसे लेकर पुष्पा को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।
आधी रात को आया फोन, अस्पताल पहुंचते ही भाग निकले ससुराल वाले
शुक्रवार की रात यह विवाद अपने चरम पर पहुँच गया। मृतका की मां के अनुसार, दामाद गोपाल सिंह ने फोन पर सूचना दी कि पुष्पा ने जहर खा लिया है। आनन-फानन में परिजन सदर अस्पताल पहुँचे, जहाँ से पुष्पा को गंभीर हालत में बिहारशरीफ रेफर किया गया। वहां एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान रात में ही पुष्पा ने दम तोड़ दिया। जैसे ही पुष्पा की मौत की पुष्टि हुई, अस्पताल में मौजूद ससुराल वाले शव को छोड़कर फरार हो गए। मायके वालों का स्पष्ट आरोप है कि उनकी बेटी ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उसे साजिश के तहत जहर दिया गया है।
तीन मासूमों के सिर से उठा मां का साया, पुलिस जांच में जुटी
नवादा पुलिस ने सदर अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। इस हृदयविदारक घटना के बाद पुष्पा के तीन बच्चों— सत्यम (10 वर्ष), आराध्या (6 वर्ष) और परिधि (4 वर्ष) के सिर से मां का साया हमेशा के लिए उठ गया है। पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि यह हत्या है या आत्महत्या। फिलहाल, फरार ससुराल वालों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
VOB का नजरिया
शादी के 9 साल बाद भी मोटरसाइकिल जैसी भौतिक मांग के लिए एक जान ले लेना समाज के माथे पर कलंक है। इस मामले में ससुराल पक्ष का अस्पताल से भाग जाना उनके अपराध बोध की ओर इशारा करता है। अगर यह आत्महत्या भी है, तो कानूनन ‘आत्महत्या के लिए उकसाना’ भी हत्या के समान ही गंभीर अपराध है। पुलिस को चाहिए कि वह फरार आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करे और स्पीडी ट्रायल के जरिए दोषियों को सजा दिलाए, ताकि उन तीन मासूम बच्चों को न्याय मिल सके जिनकी दुनिया उजड़ गई है।


