पटना | 17 जुलाई 2025:बिहार सरकार ने भूमि दस्तावेजों की पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए जुलाई अंत तक 50 लाख से अधिक पुराने जमीन दस्तावेजों को ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है।
यह कार्य मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के तहत चलाया जा रहा है। विभाग द्वारा 1908 से लेकर अब तक के निबंधन दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन तीन चरणों में किया जाएगा।
पहले चरण में 1990-1995 के दस्तावेज अपलोड
अभी पहले चरण में वर्ष 1990 से 1995 के बीच के दस्तावेजों को डिजिटल रूप से स्कैन कर ऑनलाइन अपलोड किया जा रहा है।
- इस कार्य में 5 एजेंसियां अप्रैल 2025 से लगी हुई हैं।
- पहले चरण में 50 लाख से अधिक दस्तावेजों को डिजिटाइज किया जाएगा।
- यह कार्य जुलाई 2025 के अंत तक पूरा कर लिए जाने की योजना है।
तीन चरणों में कुल 4.17 करोड़ दस्तावेज होंगे डिजिटाइज
| चरण | अवधि | दस्तावेजों की संख्या |
|---|---|---|
| पहला चरण | 1990-1995 | 50 लाख+ |
| दूसरा चरण | 1948-1990 | 2.23 करोड़ |
| तीसरा चरण | 1908-1947 | 1.44 करोड़+ |
विभाग के अनुसार, डिजिटाइजेशन के बाद पुराने दस्तावेजों की खोज, सत्यापन और सत्यता सुनिश्चित करने में आसानी होगी। इससे भूमि विवादों में कमी, भू-माफियाओं पर नियंत्रण और जनसाधारण की सुविधा में भारी सुधार होगा।
1796 से मौजूद हैं रिकॉर्ड, बड़ी चुनौती है संरक्षण
विभाग के पास वर्ष 1796 से लेकर अब तक के जमीन संबंधित दस्तावेज कागजी स्वरूप में उपलब्ध हैं, जिनमें से 99% दस्तावेज भूमि संपत्ति से संबंधित हैं।
पुराने दस्तावेजों को संरक्षित रखना और समय पर जानकारी उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण रहा है। डिजिटाइजेशन से यह काम बहुत आसान और सुलभ हो जाएगा।
घर बैठे मिलेगा डाउनलोड विकल्प: IG निबंधन
आबकारी आयुक्त सह महानिरीक्षक निबंधन रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि डिजिटाइजेशन के बाद नागरिक घर बैठे ही दस्तावेज देख और डाउनलोड कर सकेंगे। इससे विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी।
तीन-स्तरीय प्रक्रिया से हो रहा अपलोड
- स्कैनिंग: दस्तावेजों को हाई-रेजोल्यूशन स्कैन किया जाता है।
- डाटा एंट्री: स्कैन दस्तावेजों से संबंधित जानकारी को डेटाबेस में दर्ज किया जाता है।
- पब्लिक एक्सेस: अंतिम चरण में दस्तावेजों को वेबसाइट या पोर्टल पर आमजन के लिए सुलभ कराया जाता है।
प्रभाव और लाभ
- नागरिकों को तत्काल अभिलेख खोजने में सहूलियत
- भूमि विवादों के शीघ्र समाधान की संभावना
- दस्तावेजों में छेड़छाड़ की आशंका में कमी
- भ्रष्टाचार और दलाली पर नियंत्रण
- सरकारी विभागों में कार्यक्षमता में वृद्धि


