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बिहार के 200 से अधिक छात्रों ने लिया नेपाल के स्कूलों में दाखिला, नहीं जानते देश का राष्ट्रगान

ByRajkumar Raju

May 11, 2022

नेपाल सीमा से सटे किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड क्षेत्र के सीमावर्ती गांवों के बच्चे नेपाल के सरकारी स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने रोजाना जाते हैं। घर से नजदीक एवं शिक्षा की बेहतर गुणवत्ता के कारण सीमावर्ती क्षेत्र के करीब 200 से अधिक बच्चे नेपाल के स्कूल में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा ग्रहण करते हैं। सीमावर्ती क्षेत्र के दल्लेगांव, तेलीभिट्टा, पाठामारी सहित कुछ अन्य गांव हैं, जहां के बच्चे वहां जाते हैं।

इनके अभिभावक बताते हैं कि बिहार के किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत दल्लेगांव पंचायत के कई गांवों के बच्चे गांव से मात्र आधे से एक किलोमीटर की दूरी पर नेपाल के झापा जिला के पाठामारी, खंगरूभिट्ठा, आमजूआनी आदि गांव में स्थित नेपाल के सरकारी स्कूलों में पढ़ने के लिए जाते हैं, क्योंकि नेपाल के इन स्कूलों में बच्चे बारह महीने जा सकते हैं। किसी भी मौसम में स्कूल पहुंचने में कोई कठिनाई होती है, जबकि भारत के स्कूलों में बरसात में स्कूल पहुंचना तो दूर की बात अपनी जान बचाना भी मुश्किल हो जाता है।

अच्छी है वहां की शिक्षा व्यवस्था- ग्रामीण

वहीं स्थानीय सीमावासियोंं ने बताया कि नेपाल के स्कूलों में गुणवत्ता शिक्षा मिलती हैं। भारत में निजी विद्यालय में फीस देकर जैसी व्यवस्था बच्चों को दी जाती है, उससे भी बढ़कर नेपाल में फ्री में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाती हैं। नेपाल के सरकारी स्कूलों में पोशाक, किताब, कापी, कलम, भोजन, बैठने की उचित व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, बिजली, पंखे आदि की समुचित व्यवस्था बच्चों को दी जाती हैं। विद्यालय की आधारभूत संरचना व अन्य कई सुविधाएं अच्छी है।

विद्यालयों में बच्चों के मनोरंजन व खेलकूद की भी व्यवस्था भारतीय स्कूलों की व्यवस्था से काफी बेहतर हैं। वहीं दूसरी ओर इन गांवों के बगल भारत में स्थित मध्य विद्यालय भवानीगंज, प्राथमिक विद्यालय तेलीभिट्ठा, मध्य विद्यालय दल्लेगांव तक पहुंचने में काफी समय लगता है और स्कूली शिक्षा भी नेपाल जैसी नहीं रहती है।

भारत के राष्ट्रीय गान नहीं बल्कि नेपाल की राष्ट्रीय गीत बच्चों को है याद

भारतीय बच्चों को न तो भारतीय राष्ट्रीय गीत की जानकारी हैं और न राष्ट्रीय गान की, जबकि इन बच्चों को नेपाल की राष्ट्रीय गीत की पूरी पंक्तियां कंठस्थ है। ये भारतीय बच्चे देश की महान विभूतियों के बारे में अनभिज्ञ और कुछ नहीं जानते, वहीं ये बच्चे नेपाल के अहम शख्शियत के बारे में बहुत सी बातें बता देते हैं।

…लेकिन इसका कोई फायदा नहीं 

पूर्व जिला पार्षद प्रतिनिधि देवव्रत कुमार बताते हैं कि क्षेत्र के बच्चे नेपाल के स्कूलों में अशिक्षा से दूर रहने के लिए ही पढ़ते है, मैट्रिक व इंटर स्तर की पढ़ाई करने के बाद ये अपने जीवन यापन के लिए भारत के प्रमुख शहरों की ओर विमुख हो जाते है। नेपाल की नागरिकता न होने से इन्हें नेपाल में कोई भी सरकारी नौकरी नहीं मिल पाती हैं।